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मुख्य सचिव द्वारा सेवामुक्त डी. डी. पी. ओ. के खिलाफ केस दर्ज करने के हुक्म

निजी व्यक्तियों को 100 एकड़ पंचायती ज़मीन तबदील करने में हुई अनियमितताओं का सख़्त नोटिस लेते हुये मुख्य सचिव अनुराग वर्मा ने वित्त कमिश्नर, ग्रामीण विकास एवं पंचायत को हिदायत की है कि सेवामुक्त डी. डी. पी. ओ. कुलदीप सिंह और 27- 2-2023 के उस ( कुलदीप सिंह) की तरफ से दिए हुक्मों के अन्य लाभार्थियों के खि़लाफ़ भ्रष्टाचार रोकथाम कानून और आइपीसी की अन्य सम्बन्धित धाराओं के अंतर्गत एफ. आई. आर. दर्ज की जाये।

अनुराग वर्मा द्वारा की गई जांच में यह बात सामने आई है कि कुलदीप सिंह की तरफ से बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई थीं। तिथि 24-2-2023 को कुलदीप सिंह पठानकोट में एडीसी (डी) के तौर पर तैनात थे, उस दिन शुक्रवार था। उसने 28-2-2023 दिन मंगलवार को सेवामुक्त होना था। इसलिए उसने अगले कामकाजी दिन यानि 27-2-2023 ( सोमवार) को सुनवाई के लिए केस सूचीबद्ध किया। कुलदीप सिंह ने 27-2-2023 को ही निजी पटीशनरों के हक में केस का फ़ैसला सुनाया। उन्होंने ग्राम पंचायत को इसके सबूत रिकार्ड पर लाने का कोई मौका देना ज़रूरी नहीं समझा।

जांच रिपोर्ट में साफ़ तौर पर कहा गया है कि ऐसे मामलों में 26 जनवरी, 1950 से लेकर अब तक की सभी जमाबंदियों की जांच की जाये। कुलदीप सिंह ने इन जमाबंदियों को रिकार्ड पर लाने की जहमत नहीं उठाई। यह पाया गया कि उसके द्वारा की गई अनिमितताएं पहली नज़र में जानबुझ कर की गई और दोषपूर्ण थीं क्योंकि कुलैकटर को अपनी शक्तियों का प्रयोग करते हुये यह अच्छी तरह पता था कि वह ( कुलदीप सिंह) 28. 02. 2023 को सेवामुक्त हो रहा है। अपनी सेवामुक्ति से सिर्फ़ 24 घंटे पहले उसने एक केस का फ़ैसला किया जिसमें 734 कनाल 1 मरला ( 91.75 एकड़) शामलाट ज़मीन निजी व्यक्तियों के हक में और कुलैकटर की कार्रवाई से ग्राम पंचायत को करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ।

वर्मा ने ग्रामीण विकास एवं पंचायत विभाग को कुलदीप सिंह के विरुद्ध पंजाब सिवल सर्विसिज रूल्ज के नियम 2.2 (बी) के अंतर्गत अनुशासनात्मक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने विभाग को यह भी हिदायत की है कि नियमों के अंतर्गत ज़रूरत अनुसार कुलदीप सिंह के बनते सेवामुक्ति के लाभ न दिए जाएं।