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धनतेरस पर गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान

कार्तिक मास के कृष्णपक्ष की त्रयोदशी या फिर कहें धनतेरस के दिन से ही दीपावली के पंचमहापर्व की शुरुआत होती है. धनतेरस के दिन धन के देवता कुबेर और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की विशेष पूजा की जाती है. साथ ही साथ धनतेरस का दिन खरीददारी के लिए सबसे शुभ माना गया है. धनतेरस के दिन खरीदी गई चीजें शुभता प्रदान करती हैं. यही कारण है कि लोग इस पर्व का पूरे साल इंतजार करते हैं. शुभत्व की कामना लिए धनतेरस के दिन ही लोग दिवाली की रात विशेष पूजा के लिए गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति को खरीदना पसंद करते हैं. यदि आप भी शुभ और लाभ दिलाने वाले गणेश-लक्ष्मी की मूर्ति बाजार से खरीदने जा रहे हैं, उससे जुड़ी कुछ जरूरी बातें जरूर याद रखें, ताकि दिवाली की रात आपकी साधना पूरी तरह से सफल हो.

दीपावली के अपनी साधना को सफल बनाने के लिए गणेश-लक्ष्मी जी की मूर्ति खरीदते समय आपको सबसे पहले ध्यान देना है कि उनकी मूर्ति किसी भी प्रकार से खंडित न हो. यदि आप दिवाली की रात धन की देवी मां लक्ष्मी और गणपति की पूजा को सफल बनाना चाहते हैं तो आपको भूलकर भी गणपति की प्लास्टिक अथवा प्लास्टर ऑफ पेरिस की मूर्ति नहीं खरीदनी चाहिए. पूजा के लिए हमेशा मिट्टी या धातु की मूर्ति का ही प्रयोग करना चाहिए. ऐसे में आप इन दोनों में से एक विकल्प चुन सकते हैं.

दिवाली की पूजा के लिए गणेश- लक्ष्मी की बैठी हुई मुद्रा वाली मूर्ति ही खरीदें. दिवाली के दिन मां लक्ष्‍मी की खड़ी मुद्रा वाली मूर्ति या तस्वीर की पूजा घर में भूलकर भी न करें. साथ ही साथ मां लक्ष्मी की पूजा की जाने वाली मूर्ति में उनकी प्रिय सवारी उल्लू का चित्र भी अंकित होना चाहिए. दीपावली के दिन गणपति की बाईं तरफ वाली मूर्ति की पूजा अत्यंत शुभ मानी जाती है. ऐसे में गणपति की मूर्ति को खरीदते समय इस बात का पूरा ख्याल रखना चाहिए. साथ ही साथ गणपति की मूर्ति में उनकी प्रिय सवारी चूहा भी बना होना चाहिए. गणपति की मूर्ति को खरीदते समय न सिर्फ उनकी बाईं तरफ सूड़ को चेक करें बल्कि यह भी देखें कि उनके हाथ या फिर सूंड़ में उनका प्रिय मोदक बना हुआ हो. गणपति को अत्यंत प्रिय लगने वाले मोदक के साथ बनी मूर्ति को शुभ माना जाता है.