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ठा. विक्रम सिंह हुए 81वर्ष के, अब नहीं कुछ चाह, समाज व देश में सुधार आए, यही कामना बाकी

लेखक :- सुरेंद्र सिंघल, वरिष्ठ पत्रकार, नई दिल्ली.
 
नई दिल्ली (दैनिक संवाद न्यूज)। मौजूदा समय में भारत के आर्य समाज के शिखर पुरूषों में से एक ठाकुर विक्रम सिंह 81वे वर्ष में लग गए हैं। उनका जयंती समारोह 19 सितंबर को नई दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में सादगी के साथ भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। संयोजक पूर्व आईपीएस डा. आनंद कुमार ने आज बताया कि समारोह के मुख्य अतिथि स्वामी रामदेव होंगे और देशभर से चार से पांच हजार आर्य समाजियों और प्रशंसकों के ठाकुर विक्रम सिंह को जन्मदिन की बधाई देने के लिए उपस्थित होने की संभावना है। डा. आनंद कुमार ने बताया कि ठाकुर विक्रम सिंह पर एक विशिष्ट ग्रंथ तैयार किया गया है।
जिसके पांच सौ पृष्ठों में देश के विद्वानों, साहित्यकारों एवं इतिहासकारों ने आर्य समाज के महत्व और ठाकुर विक्रम सिंह की आर्य समाज और देश के प्रति की गई सेवाओं को विषय वस्तु बनाया गया है। ग्रंथ के संपादक जाने-माने विद्वान ज्वलंत कुमार शास्त्री जी हैं। 80 वर्ष पूरे करने पर ठाकुर विक्रम सिंह ने वरिष्ठ पत्रकार सुरेंद्र सिंघल को खास बातचीत करते हुए बताया कि उनकी अब कोई निजी चाहना शेष नहीं है। वह चाहते हैं कि किसी भी तरह से समाज और देश में सुधार आए। उन्होंने कहा कि भले ही वे 80 वर्ष के हो गए हों लेकिन आज भी उनमें 40 वर्ष की आयु का सामर्थ्य और कुछ बेहतर कर गुजरने की प्रबल भावना बनी हुई है। उन्हें सबसे ज्यादा चिढ़ शराब और मांसाहार से है। हालांकि दुनिया आज इन दोनों व्यसनों के दुष्प्रभावों को समझ गई है और इसमें उत्तरोत्तर कमी हो रही है लेकिन वे चाहते हैं कि कम से कम अपना भारत देश हिंसा, पशु क्रूरता, मांसाहार और तमाम तरह की नशाखोरी से मुक्त बने।
उन्होंने कहा कि वे 80 वर्षों में ऐसा कुछ नहीं कर सके जो उन्होंने सोचा था। उनकी पढ़ाई ठीक से नहीं हो पाई। युवावस्था में धनोपार्जन नहीं कर सके। तीसरी अवस्था में दान, पुण्य और परोपकार करने के साधन मुहैया हुए जिसका निमित्त उनकी योग्य संतान बनी। वे कहते हैं कि जीवन की सारी कठिनाईयां आराम से कट गईं और अब बुढ़ापा है वह ठीक से व्यतीत हो रहा है। वह कहते हैं कि 80 साल का उनके जीवन का यही निचोड़ है कि परमात्मा जीवों को कर्मों का फल देता है। रोज तीन-चार बजे उठकर सैर करने निकलते हैं और अपनी दिनचर्या को बहुत ही व्यवस्थित ढंग से पूरी करते हैं। उन्होंने कभी भी कहीं पहुंचने में एक मिनट का भी विलंब नहीं किया। ठाकुर विक्रम सिंह खुद को इस मायने में सौभाग्यशाली मानते हैं कि आर्य समाज के बड़े विद्वानों के सान्निध्य में उनका जीवन गुजरा। पंड़ित रामचंद्र देहलवी और अमर स्वामी जी महाराज शामिल हैं।
आर्य समाजी और प्रखर सांसद रहे सर्वश्री प्रकाशवीर शास्त्री, ओमप्रकाश त्यागी, शिवकुमार शास्त्री, लाला रामगोपाल शाल वाले, सांसद ठाकुर यशपाल सिंह के अलावा देश के तीन प्रधानमंत्रियों चौधरी चरण सिंह, वीपी सिंह और चंद्रशेखर से उनके बेहद निकट संबंध रहे। गुजरात के मौजूदा राज्यपाल आचार्य देवव्रत और केरल के राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान भी उनके करीबियों में हैं। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत से भी उनके निकट संबंध हैं। ठाकुर विक्रम सिंह को यह मलाल जरूर खटकता है कि उन्हें उनकी यथाशक्ति और योग्यतानुसार देश और राष्ट्र निर्माण एवं समाज सुधार का अवसर प्राप्त नहीं हो सका। यदि आज भी उन्हें मौका मिल जाए तो वह बहुत कुछ बदलकर दिखा सकते हैं। उनमें पूरी सामर्थ्य और पुरूषार्थ कायम है।