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भारत की इस कूटनीतिक चाल के आगे झुका ड्रैगन, अब लगा रहा है दोस्ती की गुहार, लेकिन भारत..

कभी युद्ध की धमकी तो कभी वार्ता की सेतु पर सवारी.. आखिर कहां तक जायज़ है ड्रैगन का यह दोहरा रूख.. इस पर आए दिन चर्चा का सिलसिला बरकरार है। मगर ड्रैगन के इस रूख ने भारत को यकीनन असमंसजस में डाल दिया है। अब भारत की यह जरूरत बन चुकी है कि वो एक-एक कदम फूंक-फूंक कर रखे, ताकि हर स्थिति का सामना दट कर किया जा सके। अब भारत के लिए यह समझना चुनौतीपूर्ण हो चुका है कि आखिर उसके लिए कौन सा रूख असल है। एक तरफ जहां ड्रैगन वार्ता की बात कहता है तो वहीं दूसरी तरफ एलएसी पर तनाव को बढ़ाने का काम करता है और तो और दूसरी तरफ जिस तरह से वो अपने सरकारी भौंपू गलोब्ल टाइम्स का सहारा लेकर अपनी भड़ास को निकालने का काम करता है। यह तो जगजाहिर है।

अब गिड़गिड़ा रहा चीन 
उधर, अब इस पूरे मसले को लेकर चीन भारत के समक्ष गिड़गिड़ा रहा है। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को भारत से आग्रह किया कि वो अपने आक्रामक रवैये में कमी लाए और बॉर्डर पर तैनात सैनिकों को डिस-एंगेज करने की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू करें। इतना ही नहीं, चीन तो यहां तक कह रहा है कि भारत और चीन के बीच उपजी तनाव की स्थिति  की मुख्य वजह कोई और नहीं बल्कि खुद भारत ही है, इसलिए अब यह भारत की जिम्मेदारी बन जाती है कि वो इस तनाव को कम करने की दिशा में कदम बढ़ाए।

जमकर निकाल रहा अपनी भड़ास 
इसके साथ ही चीन सीमा पर जारी विवाद को लेकर जमकर अपनी भड़ास निकाल रहा है। अपने सरकारी अखबार गोलब्ल टाइम्स का सहारा लेते हुए ड्रैगन कह रहा है कि भारत साइक्‍लोजिकल वारफेयर तैयार करते हुए कह रहा कि सर्दियों में उनकी सेना तैयार है, लेकिन सर्दियों में न तो उसकी लॉजिस्टिकल सप्लाई अच्छी है और न ही ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम अच्छा है।

भारत नहीं फंसने वाला है 
उधर, चीन के इस पूरे कदम को लेकर रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यह सब तरीके साइकोलोजिक्ल वारफेयर का हिस्सा है कि एक तरफ वहां वो डिसएंगेजमेंट की मांग कर रहा है तो वहीं दूसरी तरफ सीमा पर अपनी तैयारियां भी बढ़ा रहा है। लेकिन यह बात भी आईने की तरह साफ है कि उसकी इन रणनीतियों का भारत पर कोई असर नहीं हो रहा है।

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