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ज्योतिरादित्य को 30 साल बाद मिला अपने पिता का विभाग, ऐसी है रोमांचक कहानी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट में जहां 12 मंत्रियों को इस्तीफा हो गया वहीं 43 ने शपथ ली। इस विस्तार में मध्यप्रदेश के नेता एवं ग्वालियर राजघराने के ज्योतिरादित्य सिंधिया को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है। मध्यप्रदेश में भाजपा की सरकार बनाने में अहम भूमिका निभाने के लिए उन्हें पुरस्कृत किया गया है। सिंधिया को केंद्रीय उड्डन मंत्रालय का प्रभार मिला है। पीवी नरसिम्हा राव की सरकार में ज्योतिरादित्य के पिता माधवराव सिंधिया केंद्रीय उड्डयन मंत्री के रूप में सेवायें दे चुके हैं। नरसिम्हा राव की सरकार में माधवराव सिंधिया साल 1991 से 1993 तक केंद्रीय उड्डयन मंत्री एवं पर्यटन मंत्री रहे। तीस साल बाद माधवराव सिंधिया के बेटे ज्योतिरादित्य को उड्डयन मंत्रालय का प्रभार मिला है। उड्डयन मंत्रालय संभालने से पहले दोनों नेता केंद्रीय मंत्री के रूप में कार्य कर चुके हैं। राजीव गांधी की सरकार के समय माधव राव सिंधिया रेल मंत्री थे। मनमोहन सिंह की सरकार में ज्योतिरादित्य संचार एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का प्रभार संभाल चुके हैं। ज्योतिरादित्य को पोस्टल सिस्टम में एक नए दौर की शुरुआत करने के लिए जाना जाता है।

उड्डयन मंत्री के रूप में माधवराव सिंधिया का अनुभव अच्छा नहीं रहा। उन्हें एक विमान दुर्घटना के बाद पद से हटना पड़ा। ज्योतिरादित्य को इस उड्डयन मंत्रालय की जिम्मेदारी ऐसे समय मिली है जब यह विभाग कई कठिन स्थितियों से गुजर रहा है। कोरोना संकट के चलते अंतरराष्ट्रीय उड़ानें बंद हैं। यात्रियों की संख्या में घटी है। एयर इंडिया घाटे में चल रही है। कठिन स्थितियों के बीच से उड्डयन मंत्रालय को उबारकर पटरी पर लाने की अहम जिम्मेदारी ज्योतिरादित्य के कंधों पर है।

देश कोरोना महामारी के प्रकोप से परेशान है। अर्थव्यवस्था के साथ आम जनजीवन बेहाल है। अगले तीन सालों में सरकार को अपने कामकाज से लोगों को अपने भरोसे में लेना है। प्रधानमंत्री ने नये नेताओं पर भरोसा जताया है। ज्योतिरादित्य सिंधिया उनमें से एक हैं। मोदी कैबिनेट में अनुराग ठाकुर, किरन रिजिजू, सर्वानंद सोनोवाल और जी किशन रेड्डी जैसे नये नेताओं को बड़ी जिम्मेदारी दी गई है।

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