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तम्बाकू और धूम्रपान मानव शरीर के लिए मीठा जहर :- सचिव

रिर्पोट :- गौरव सिंघल, वरिष्ठ संवाददाता,
दैनिक संवाद, सहारनपुर मंडल।
 
सहारनपुर (दैनिक संवाद न्यूज ब्यूरो)। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव/न्यायिक अधिकारी वरिष्ठ श्रीमती सुमिता ने छात्र, छात्राओं, अध्यापकगण एवं मनैजमैंट से कहा कि “Health is Wealth” ये कहावत हम सबको अहसास कराता है कि स्वास्थ्य से बढकर कोई दौलत नहीं है। स्वास्थ्य के लिये जो भी हानिकारक चीजे उसे छोडना ही बेहतर है। तम्बाकू/धू्रमपान से प्रत्येक वर्ष दुनिया भर में 6 मिलयिन लोगो की मौतें होती है। जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के अध्यक्ष/जनपद न्यायाधीश सर्वेश कुमार के मार्गदर्शन में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा जारी एक्शन प्लान के अनुपालन में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के द्वारा Legal Litracy Camp  regarding the harm caused by smoking and chewing of tobacco in any form के विषय पर दिशा भारती काॅलेज ऑफ़  मैनेजमैन्ट एण्ड एजूकेशन सहारनपुर में विधिक साक्षरता शिविर/जागरूकता कैम्प में सचिव श्रीमती सुमिता ने अपने सम्बोधन में यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि तम्बाकू/धूम्रपान निःसन्देह इसकी लत अनेक बीमारियों को जन्म देती है। पूरे विश्व में लगभग 25 प्रतिशत लोग मुंह और गले के कैंसर और अस्थमा से पीडित है। उन्होंने कहा कि तम्बाकू एक धीमा जहर है जो इंसान को अन्दर से खोखला बनाता है और व्यक्ति क्षणिक आनन्द से आनन्दित होता रहता है। तम्बाकू में निकोटिन पाया जाता है जिसका सेवन करते ही 10 सैकेण्ड में मानव मस्तिष्क आनन्द का अनुभव करता है और उसके बाद ढेर सारी बीमारियों की ओर शरीर को ढकेल देता है। सचिव  ने कहा कि तम्बाकू/धूम्रपान  के विरूद्ध COTPA- The Cigarettes and other Tobacco Products Act 2003 बनाया गया। जिसके द्वारा यह प्रविधान किया गया कि शैक्षिणक संस्थानों के 100 गज की दूरी के अन्दर किसी तम्बाकू, सिगरेट की दुकाने, खरीद बिक्री पर रोक लगाई गई है। अठारह वर्ष से कम उम्र के बच्चो को सिगरेट/तम्बाकू बेचना अपराध है।
सार्वजनिक स्थानों पर धुम्रपान/तम्बाकू सेवन अपराध है बिना स्पष्ट चेतावनी अंकित किये सिगरेट , तम्बाकू का बेचना निषिद्ध है। उक्त विधिक प्रावधानों के उल्लघंन पर दो से पांच वर्ष तक सजा और दस हजार तक जुर्माने का प्रावधान है। जरूरत है स्वंय की व बच्चों की परवरिश को मजबूत बनायें कि ताकि बच्चें, युवा वर्ग हताशा व निराश होकर नशे के आदि न बन जाये। जब नैतिक मूल्य मजबूत होगे तो खुद को खडा करने के लिये किसी क्षणिक आनन्द की या नशे की आवश्यकता नहीं होगी। यह गुरूतर जिम्मेदारी हम सबको विशेषकर माता-पिता व शिक्षकगणों को निभानी चाहिए। इस अवसर पर काॅलेज की छात्रों और शिक्षिकों ने बड़ी संख्या में भाग लिया।

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