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एडीओ पंचायत बनीकोडर के खिलाफ भाकियू अंबावत मैदान में

रिपोर्ट – भक्तिमान पाण्डेय रामसनेहीघाट बाराबंकी –बनीकोडर बाराबंकी- योगी सरकार के जीरो टॉलरेंस को जम कर लग रहा पलीता,मिली जानकारी के अनुसार बाराबंकी के विकास खंड बनीकोडर में एडीओ पंचायत के के पद पर तैनात लक्ष्मी मणि त्रिपाठी पर भ्रष्टाचार का बड़ा आरोप लगा है, भाकियू अंबावत गुट के बनीकोडर ब्लाक अध्यक्ष दिनेश कुमार रावत ने सीडीओ बाराबंकी को पत्र लिखते हुए अवगत कराया कि एडीओ पंचायत बनीकोडर के द्वारा क्षेत्र की जनता को लगातार दौड़ाया जा रहा है, यदि कोई व्यक्ति शौचालय आदि के घोटाले की शिकायत करता है तों उल्टे उससे ही अभद्रता करने लगते हैं, सबसे बड़ी बात कि कितना भी आप दूरभाष पर संपर्क करें लेकिन फोन नहीं उठता हैं, मृत्यु प्रमाण पत्र जारी करने में आनाकानी करते हैं, और आनलाइन मृत्यु प्रमाण पत्र तों बनाना ही भूल गए हैं, मौजूदा एडीओ पंचायत करीब तीन वर्षों से जमें हुए हैं और जमकर मनमानी पर उतारू हैं, इस संबंध में भाकियू अंबावत के ब्लाक अध्यक्ष दिनेश ने कई बार इनके कारनामों को लेकर उच्च अधिकारियों से शिकायत भी की परंतु नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा, और एडीओ पंचायत बनीकोडर अपनी तानाशाही जारी किए हैं.


गांव के किसानों की समस्याओं को लेकर भाकियू अंबावत गुट के बनीकोडर ब्लाक अध्यक्ष दिनेश कुमार रावत ने कहा कि यदि मृत्यु प्रमाण पत्र और शौचालय निर्माण व अन्य मुद्दों का समाधान एवं दबंग मठाधीश एडीओ पंचायत पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तों भाकियू अंबावत मैदान में उतरने को मजबूर होगा,
वैसे दिनेश कुमार रावत की बातों पर गौर किया जाए तो बाराबंकी के बनीकोडर में भ्रष्टाचार रुपी गंदा नाला बह रहा है और उस गन्दे नाले में विकास खंड बनीकोडर के एडीओ पंचायत व अन्य जिम्मेदार डुबकी लगाते हुए नजर आ रहे हैं.

यदि पूरे मामले को अगर देखा जाए तो वर्तमान भाजपा सरकार की मूक सहमति नजर आ रही है, पूरे ब्लाक में अधिकारी जनता को लगातार दौड़ाते रहते हैं और वीडीओ आदित्य तिवारी से शिकायत करने पर वह अपना हमेशा की तरह जांच करवाने का जुमला फेंक कर मामले को ठंडे बस्ते में डाल देते हैं इस पूरे घटनाक्रम से साफ साफ जाहिर होता है कि बनीकोडर में भाजपा सरकार की जीरो टॉलरेंस की नीति को जबरदस्त तरीके से पलीता लगाने का काम जोर शोर से चल रहा है, सरकार के नुमाइंदे आंख मूंद कर सत्तानिंद्रा के आसन पर विराजमान हैं, वैसे भी बनीकोडर के बारे में एक बात चर्चा में हैं कि परिवार रजिस्टर और मृत्यु प्रमाण पत्र के के लिए ग्राम प्रधान की चापलूसी जरूर करनी होती है और ग्राम प्रधान लोग चुनावी रंजिश के चलते झूठी बात अधिकारियों को बताते हैं जिससे गांव निवासियों को जरुरी कागजात नहीं मिल पाते हैं, और स्वाभीमानी ग्रामीणों को प्रधानों के आगे झुकने को मजबूर किया जा रहा है, जैसे लगता है कि प्रधानों के वोटबैंक मजबूत करने का ठेका ले रखा है.

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