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जनसंख्या नीति की जरूरत नहीं, मुस्लिम प्रजनन दर में तेज गिरावट आई: ओवैसी

विजयदशमी के अवसर पर आज बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख की ओर से जनसंख्या पर समग्र नीति तैयार करने और इसे सब पर समान रूप से लागू करने तथा किसी को भी छूट नहीं दिए जाने संबंधी बयान पर एआईएमआईएम के प्रमुख और सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने पलटवार करते हुए कहा कि देश में जनसंख्या नियंत्रण की कोई जरूरत नहीं है. मुसलमानों की प्रजनन दर में सबसे तेजी से गिरावट आई है.

जनसंख्या नीति पर भागवत के बयान की आलोचना करते हुए ऑल इंडिया मजलिस ए इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख और हैदराबाद से सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 2 ट्वीट करते हुए कहा, “मोहन के लिए, यह अभद्र भाषा का सालाना दिवस है. “जनसंख्या असंतुलन” के डर से दुनिया भर में नरसंहार, जातीय सफाई और हेट क्राइम्स हुए हैं. सर्बियाई राष्ट्रवादियों द्वारा अल्बानियाई मुसलमानों के नरसंहार के बाद कोसोवो का गठन किया गया था.

कहां पर है असंतुलनः ओवैसी

ओवैसी ने अपने अगले ट्वीट में कहा, “यदि हिंदुओं और मुसलमानों का “एक ही डीएनए” है, तो “असंतुलन” कहां पर है? जनसंख्या नियंत्रण की कोई जरूरत नहीं है क्योंकि हमने पहले ही प्रतिस्थापन दर (Replacement Rate) हासिल कर ली है. चिंता बढ़ती उम्र और उन बेरोजगार युवाओं की है जो बुजुर्गों की देखभाल नहीं कर सकते. मुसलमानों की प्रजनन दर में सबसे तेजी से गिरावट आई है.”

इससे पहले विजयादशमी के अवसर पर आज बुधवार को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के नागपुर स्थित मुख्यालय में आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “जनसंख्या नियंत्रण के साथ-साथ पांथिक आधार पर जनसंख्या संतुलन भी महत्व का विषय है जिसकी अनदेखी नहीं की जा सकती.”

जनसंख्या नीति पर किसी को छूट नहींः भागवत

उन्होंने कहा कि देश में जनसंख्या पर एक समग्र नीति बने जो सब पर समान रूप से लागू हो और किसी को छूट नहीं मिले. उन्होंने यह भी कहा कि जनसंख्या असंतुलन भौगोलिक सीमाओं में बदलाव का कारण बनती है, ऐसे में नई जनसंख्या नीति सब पर समान रूप से लागू हो और किसी को छूट नहीं मिलनी चाहिए.

चीन की एक परिवार एक संतान की नीति का उल्लेख करते हुए संघ प्रमुख भागवत ने कहा, “जहां हम जनसंख्या पर नियंत्रण का प्रयास कर रहे हैं, वहीं हमें देखना चाहिए कि चीन में क्या हो रहा है. उस देश ने एक परिवार, एक संतान नीति अपनाया और अब वह बूढ़ा हो रहा है.” उन्होंने कहा कि भारत में 57 करोड़ युवा आबादी के साथ यह राष्ट्र अगले 30 वर्षों तक युवा बना रहेगा.

सरसंघचालक भागवत ने कहा कि समाज के विभिन्न वर्गों में स्वार्थ और द्वेष के आधार पर दूरियां और दुश्मनी बनाने का काम स्वतंत्र भारत में भी चल रहा है. ऐसे तत्वों के बहकावे में न फंसते हुए, उनके प्रति निर्मोही होकर निर्भयतापूर्वक उनका निषेध व प्रतिकार करना चाहिए.