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शनिवार के दिन जरूर पढ़ें यह कथा, आपके जीवन से धन की कमी दूर हो जाएगी

ब्रह्मपुराण के अनुसार, अपने बचपन से ही शनिदेव श्रीकृष्ण के भक्त थे। वे उनकी भक्ति में लीन रहा करते थे। बचपन में ही इनका विवाह चित्ररथ की कन्या से संपन्न कराया गया था। एक दिन ऐसा हुआ कि वह ऋतु स्नान के बाद पुत्र प्राप्ति की कामना लेकर शनिदेव के समक्ष पहुंची। लेकिन शनिदेव तो कृष्ण जी की भक्ति में लीन थे। ऐसे में वो उनकी प्रतीक्षा करने लगीं। लेकिन कुछ ही समय में वो थक गईं। उनका ऋतकाल निष्फल हो गया। इससे वो बेहद क्रोध में आ गईं और उन्होंने क्रोधित हो शनिदेव को श्राप दे दिया। उनकी पत्नी ने उन्हें श्राप दिया कि वो आज से जिसे भी देखेंगे वो नष्ट हो जाएगा।


जब शनिदेव का ध्यान टूटा तो उन्होंने अपनी पत्नी को मनाने का प्रयास किया। ऐसा करने पर उनकी पत्नी को अहसास हुआ कि उनसे गलती हो गई। लेकिन श्राप के प्रतिकार की शक्ति उनमें नहीं थी। बस तब से ही शनिदेव अपना सिर नीचे कर रहने लगे। वे नहीं चाहते थे कि उनकी दृष्टि से किसी का भी बुरा हो। ज्योतिष शास्त्र में कहा गया है कि अगर शनि ग्रह कहीं रोहिणी भेदन कर दे तो पृथ्‍वी पर 12 वर्षों का घोर दुर्भिक्ष पड़ जाए। यह योग महाराज दशरथ के सामने भी आया था। अपनी प्रजा को इस कष्ट से बचाने के लिए महाराज दशरथ अपने रथ पर सवार होकर नक्षत्र मंडल पहुंच गए। सबसे पहले उन्होंने शनिदेव को प्रणाम किया और फिर क्षत्रिय धर्म के अनुसार, उनसे युद्ध करते हुए उन पर संहारास्त्र का संधान किया।

राजा दशरथ की कर्तव्यनिष्ठा से शनिदेव बेहद प्रसन्न हुए। उन्होंने महाराज दशरथ से वर मांगने को कहा। तब राजा दशरथ ने मांगा कि जब तक सूर्य, नक्षत्र आदि विद्यमान हैं तब तक आप संकटभेदन न करें। शनिदेव ने उन्हें वरदान दे दिया। अगर शनिवार के दिन उपरोक्त कथा को पढ़ा जाए तो व्यक्ति के जीवन से धन संकट दूर हो जाता है।

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