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भारत-इजरायल के बीच हुई स्‍मार्ट बम की ‘सीक्रेट डील’, अब बढ़ने वाली है चीन की मुश्किलें

पिछले दिनों इजरायल से आई एक खबर ने सनसनी फैला दी थी. इजरायल के राफेल एडवांस्‍ड डिफेंस सिस्‍टम्‍स की तरफ से 23 दिसंबर को एक ट्वीट किया गया था. इस ट्वीट में राफेल ने जानकारी दी थी कि उसे एक एशियाई देश के साथ कॉन्‍ट्रैक्‍ट साइन किया है. इस करार के बाद इस देश को बम गाइडेंस किट्स, एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइल्‍स और सॉफ्टवेयर लैस रेडियोज सप्‍लाई किए जाएंगे. कंपनी की तरफ से किसी देश का नाम नहीं बताया गया और न ही इसकी कीमत बताई गई. जेंस डिफेंस विकली की तरफ से इस डील की पुष्टि की गई थी. अब एक भारतीय मीडिया रिपोर्ट की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई है कि इजरायल ने यह डील दरअसल और किसी देश के साथ नहीं बल्कि अपने पुराने दोस्‍त भारत के साथ ही साइन की है.

200 मिलियन डॉलर की है डील

एक मीडिया रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर चीन के साथ जारी टकराव के बाद 200 मिलियन डॉलर की इस डील को सील किया है. यह डील चुपचाप हुई है और साल 2021 तक सभी आइटम भारत को मिल जाएंगे. भारत की तरफ से फिलहाल इस पर कुछ नहीं कहा गया है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक डील के बाद भारतीय वायुसेना (आईएएफ) को 200 स्‍पाइक लॉग रेंज एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलें और सेना को बीएनईटी ब्रॉडबैंक इंटरनेट प्रोटोकॉल टैक्टिकल रेडियो मिलेंगे. हालांकि भारत ने साल 2019 में भी इजरायल के साथ ही इस तरह की डील को साइन किया था. वह डील करीब 300 करोड़ रुपए की थी.

बालाकोट में हुआ था प्रयोग

स्‍पाइस बम वही खतरनाक हथियार हैं जिनका प्रयोग फरवरी 2019 में बालाकोट एयरस्‍ट्राइक में किया गया था. आईएएफ के मिराज-2000 फाइटर जेट्स ने पाकिस्‍तान के बालाकोट में स्थित जैश-ए-मोहम्‍मद के ट्रेनिंग कैंप्‍स को खत्‍म करने के लिए यह स्‍ट्राइक की थी. इस स्‍ट्राइक में मिराज जेट्स ने आतंकियों के अड्डों पर स्‍पाइस बम से हमला बोला था.

इस वर्ष जुलाई में न्‍यूज एजेंसी एएनआई की तरफ से इस बात की जानकारी दी गई थी कि लद्दाख में चीन के साथ जारी टकराव के बीच भारत सरकार तीनों सेनाओं के लिए इजरायल से इस हथियार को आपातकालीन स्थिति के लिए खरीदने की योजना बना रही है. एएनआई ने बताया था कि दुश्‍मन के बंकर्स और बिल्डिंग्‍स को नष्‍ट करने के मकसद से और ज्‍यादा स्‍पाइस बमों को खरीदा जाएगा.

क्‍यों कहते हैं स्‍मार्ट बम

स्‍पाइस बम को विशेषज्ञ स्‍मार्ट बम के तौर पर करार देते हैं. SPICE यानी SMART, Precise Impact और Cost-Effective. स्‍पाइस बम स्‍मार्ट नेविगेशन टेक्निक पर तैयार हुआ है. सैटेलाइट गाइडेंस और इलेक्‍ट्रो ऑप्टिकल सेंसर्स की मदद से बम टारगेट को अंदर तक नष्‍ट कर देता है. स्‍पाइस-1000 किट में 500 किलोग्राम वजन के बम होते हैं और इनकी रेंज 100 किलोमीटर तक होती है.

जबकि स्‍पाइस-2000 में 1,000 किलोग्राम के वजन वाले बम हैं और इनकी रेंज करीब 60 किलोमीटर होती है. लेसर गाइडेड बम की रेंज 15 किलोमीटर तक होती है और रेंज की वजह से ही स्‍पाइस को स्‍मार्ट बम के तौर पर भी जाना जाता है. स्‍पाइस बम में क्‍लाउड कवर के अलावा खराब मौसम में भी टारगेट को हिट करने की क्षमता है.

प्रोटेक्‍टेड एयर स्‍पेस में भी हमला

स्‍पाइस बम संरक्षित एयरस्‍पेस में भी टारगेट को हिट कर सकते हैं. चीन के पास अलग-अलग प्रकार के एयर डिफेंस सिस्‍टम हैं और इनमें रूस का एस-300 और एस-400 भी शामिल है. इसके अलावा देश में ही तैयार एक एयर डिफेंस सिस्‍टम को भी चीन की सेनाओं ने शामिल किया है. साल 2019 में पीटीआई ने जानकारी दी थी कि बालाकोट एयरस्‍ट्राइक के बाद आईएएफ फाइटर जेट सुखोई को स्‍पाइस-2000 बमों से लैस करने की प्रक्रिया में है.

स्‍पाइस से लैस होने के बाद सुखोई और खतरनाक हो सकता है. आईएएफ के पास इस समय 250 सुखोई हैं और इन्‍हें तकनीक के लिहाज से काफी अहम माना जाता है. सुखोई 35 टन से ज्‍यादा के वजन के साथ टेकऑफ कर सकता है यानी मिराज-2000 से दोगुने वजन के साथ सुखोई उड़ान भर सकता है. एक सुखोई बार में तीन स्‍पाइस बम के साथ हमला बोलने में सक्षम है.

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