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आखिरी सांस तक लड़ने वाले मेजर, जिनके 120 सिपाहियों ने 1300 चीनी सैनिकों को किया था ढेर

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) गुरुवार को लेह-लद्दाख (Leh Ladakh) के दौरे के दौरान चुशूल (Chushul) में स्थित रेजांग ला (Rezang La) भी जाएंगे. वहां 1962 के युद्ध में शहीद हुए सैनिकों की याद में नए सिरे से बनाए गए वॉर मेमोरियल का वह उद्घाटन भी करेंगे. रेजांग ला में हुए युद्ध की 59वीं वर्षगांठ पर वहां वह शहीदों को श्रद्धांजलि देंगे. यह युद्ध स्मारक 13 कुमाऊं रेजीमेंट के उन बहादुर भारतीय सैनिकों को समर्पित है, जिन्होंने रेजांग ला की लड़ाई में चीन को पटखनी देते हुए अपने प्राणों की आहुति दी थी. आइये जानते हैं रेजांग ला के बारे में…

1962 में चीन के साथ हुई जंग में भारतीय सैनिकों ने जबरदस्‍त बहादुरी दिखाई थी. लेह-लद्दाख के रेजांग ला में भी चीनी सैनिकों से भारतीय सैनिकों की जंग हुई थी. यहां भारतीय सेना की 13 कुमाऊं बटालियन की चार्ली सी कंपनी तैनात थी. इसके 120 सैनिक समुद्र तल से 18,000 फीट की ऊंचाई पर बर्फीली चोटी पर डटे हुए थे. 1962 के युद्ध के दौरान चीनी सेना ने 18 नवंबर को तड़के 4 बजे रेजांग ला पोस्‍ट पर हमला बोला था. चीन चुशूल और लेह के बीच की सड़क को बाधिक करके इस क्षेत्र से देश का संपर्क तोड़ना चाहता था. रिपोर्ट के अनुसार भारतीय स‍ैनिकों ने अपनी जान की परवाह किए बिना चीनी सैनिकों से लोहा लिया था. इस जंग में करीब 114 भारतीय सैनिक शहीद हुए थे. इस जंग में तोप नहीं थीं. गोला-बारूद भी कम था. हथियार पुराने थे. इसके बावजूद भारतीय सैनिकों ने चीन के 1300 सैनिकों को मार गिराया था.

इन सैनिकों की अगुवाई मेजर शैतान सिंह ने की थी. उन्हें बहादुरी के लिए मरणोपरांत परमवीर चक्र से नवाजा गया था. इन सैनिकों की याद में हरियाणा के रेवाड़ी में भी एक युद्ध स्‍मारक है. शहीद हुए सैनिकों में से अधिकांश यहीं के थे. रेजांग ला में हमले के दो दिन बाद चीन की ओर से 20 नवंबर को सीज फायर किया गया था. रेजांग ला में पहले भी वार मेमोरियल था, लेकिन वो छोटा था. नए रेजांग ला वार मेमोरियल को बड़ा बनाया गया है. इसमें 108 फीट उंचा तिरंगा भी लगाया गया है. जो भारतीय सैनिकों की वीरता याद दिलाता है. नए वॉर मेमोरियल में सभी 114 शहीदों के नामों वाली पत्थर की पट्टिकाएं लगाई गई हैं.

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