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सहारनपुर : विज्ञान अध्यात्म व देश प्रेम की त्रिवेणी थे डा एपीजे अब्दुल कलाम : आचार्या प्रतिष्ठा

 रिर्पोट :- गौरव सिंघल, वरिष्ठ संवाददाता, सहारनपुर मंडल।
सहारनपुर (दैनिक संवाद न्यूज ब्यूरो)। भारत की विश्व ख्याति की कत्थक परफॉर्मर और आज अंतरराष्ट्रीय योग गुरु तथा विदेश मंत्रालय के अंतर्गत मॉरीशस स्थित विश्व के सबसे बड़े सांस्कृतिक केंद्र की निदेशक आचार्य प्रतिष्ठा ने आज पूर्व राष्ट्रपति एवं अमर वैज्ञानिक एपीजे अब्दुल कलाम की पुण्यतिथि पर उनकी स्मृति को अपने इस संस्मरण के साथ ताजा किया है।
उनका कहना है कि एपीजे अब्दुल कलाम विज्ञान अध्यात्म व राष्ट्रप्रेम की त्रिवेणी थे। उन्होंने आइसलैंड प्रस्तुति के समय एपीजे अब्दुल कलाम के साथ खींची गई अपनी फोटो और कलाम के निधन से पूर्व उनके साथ उनके आवास पर हुई अंतिम भेंट की तस्वीरें भी आज साझा की है। उनका कहना है कि भारत की कला और संस्कृति के लिए उन्हें अनेक बार विदेशों में जाने का मौका मिला और अनेक राष्ट्रीय विभूतियों के साथ भेंट व चर्चा के अवसर भी मिले। इनमें भारत के तत्कालीन राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम भी शामिल हैं।
उनका कहना है कि यह उनका सौभाग्य है कि महान वैज्ञानिक, दार्शनिक, अध्यात्मिक महामानव और गौरवशाली राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के देहावसान से 2 सप्ताह पूर्व भी उनके आवास पर करीब आधा घंटा महत्वपूर्ण चर्चा करने का सौभाग्य उन्हे मिला था लेकिन उनके साथ सांस्कृतिक दल सदस्य के रूप में आइसलैंड की पहली विदेश यात्रा उनके लिए अविस्मरणीय है। उनका कहना है कि उनके सिर पर रखे हुए डा कलाम के आशीर्वाद के हाथ का स्पर्श और दोनों देशों के राष्ट्रपतियों के उपस्थित जनसमूह के बीच उनकी कथक नृत्य प्रस्तुति देखकर उनका यह कहना की “यू आर नॉट ओनली द यंगेस्ट बट आल्सो द बेस्ट” (तुम सिर्फ सबसे छोटी ही नहीं हो, प्रस्तुति में सर्वोत्तम भी हो) मेरे लिए एक ऐसा आशीर्वाद बन गया कि उनकी जुबान को सच साबित किए रखने के लिए सर्वोत्तम से नीचे रहना मेरी नियति में ही नहीं रहा।

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