Breaking News

भारत-पाकिस्तान के सिंधु आयुक्तों की बैठक खत्म, मीटिंग में लिए गए कई अहम फैसले

भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु जल समझौते को लेकर दो दिवसीय बैठक समाप्त हो गई. इस दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर में पाकल दुल और लोअर कलनाई पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइनों को लेकर आपत्तियां जताई. पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 को खत्म किए जाने के बाद लद्दाख में भारत द्वारा शुरू की गईं पनबिजली परियोजनाओं के बारे में अतिरिक्त जानकारी मांगी. पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सिंधु आयोग (पाकिस्तान) के आयुक्त सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह ने किया. पाकिस्तानी प्रतिधिनिमंडल सोमवार शाम को यहां पहुंचा था. अगस्त, 2019 में भारत सरकार द्वारा जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 के प्रावधानों को निरस्त करने और राज्य को दो केंद्र शासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांटने के बाद दोनों आयोगों की यह पहली बैठक है.


दो साल बाद हुई दोनों देशों के बीच बैठक

भारत ने अपनी ओर से पाकल दुल और लोअर कनलाई पनबिजली परियोजनाओं के डिजाइनों को उचित ठहराया. दोनों पक्षों के बीच दो साल के बाद यह बैठक हुई. इससे पहले अगस्त 2018 में लाहौर में बैठक हुई थी. बैठक में शामिल हुए भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व भारत के सिंधु आयोग के आयुक्त पीके सक्सेना ने किया और इसमें केंद्रीय जल आयोग, केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण एवं राष्ट्रीय जल विद्युत ऊर्जा निगम के उनके सलाहकार शामिल थे.

क्यों महत्वपूर्ण रही बैठक

यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दोनों देशों की सेनाओं द्वारा नियंत्रण रेखा और अन्य क्षेत्रों में संघर्ष विराम समझौते का कड़ाई से पालन करने के संबंध में पिछले महीने की गई घोषणा के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच यह पहली महत्वपूर्ण वार्ता है. भारत ने जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को केंद्रशासित प्रदेश बनाने के बाद से इन इलाकों में कई पनबिजली परियोजनाओं को मंजूरी दी है. इनमें लेह क्षेत्र में दुरबुक श्योक (19 मेगावाट क्षमता), शांकू (18.5 मेगावाट क्षमता), नीमू चिलिंग (24 मेगावाट क्षमता), रोंगदो(12 मेगावाट क्षमता), रत्न नाग (10.5 मेगावाट क्षमता) और कारगिल में मांगदम सांगरा (19 मेगावाट क्षमता), कारगिल हंडरमैन (25 मेगावाट क्षमता) व तमाश (12 मेगावाट क्षमता) परियोजना शामिल है.

पाकिस्तान ने इन परियोजनाओं के संबंध में मांगी जानकारी

उल्लेखनीय है कि सिंधु जल समझौते में दोनों देशों के आयोगों की साल में कम से कम एक बार बैठक का प्रावधान है. यह बैठक बारी-बारी से भारत और पाकिस्तान में होती है. पिछले साल मार्च में नई दिल्ली में होने वाली बैठक कोविड-19 महामारी की वजह से स्थगित कर दी गई थी. भारत ने जुलाई 2020 में कोविड-19 महामारी के चलते सिंधु जल समझौते से जुड़े मुद्दों पर चर्चा करने के लिए ऑनलाइन बैठक करने का प्रस्ताव किया था, लेकिन पाकिस्तान ने बैठक अटारी सीमा चौकी पर करने पर जोर दिया जिसे भारत ने महामारी के मद्देनजर अस्वीकार कर दिया था. भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में हुए सिंधु जल समझौते के तहत सतलुज ब्यास और रावी नदी का पानी भारत को जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब का पानी पाकिस्तान को मिलता है.

 

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *