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भारत की दहाड़ से चीन में पसरा मातम, राफेल के बाद इस घातक मिसाइल का होगा आगमन!

यह तो परिलक्षित है कि भारत के रिश्ते चीन और पाकिस्तान का साथ कैसे हैं। दो जून की रोटी को मोहताज रहने वाला पाकिस्तान भारत में आतंकियों की घुसपैठ कराने की जुगत में लगा रहता है तो कभी चीन अपनी विस्तारवादी नीति के सारे भारत की सरजमीं को हथियाने की युक्ति में लगा रहता है। ऐसी स्थिति में किसी भी विषम परिस्थिति से निपटने के लिए भारत अपनी तरफ से अपनी सभी तैयारियों को पुख्ता कर लेना चाहता है। इस कड़ी में राफेल, तेजस, ब्रांहस्त्र के बाद अब भारत एक और ऐसे घातक मिसाइल को बनाने की तैयारी शुरू हो चुकी है। जिसके बारे में जानते ही चीन और पाकिस्तान के होश फाख्ता हो रहे हैं।

इस सिलसिले में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने ट्वीट कर कहा था कि ‘डीआरडीओ ने स्वदेशी रूप से विकसित स्क्रैमजेट प्रप्लशन प्रणाली का इस्तेमाल करते हुए हाइपरसोनिक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेटर व्हीकल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया है। इस सफलता के साथ, सभी महत्वपूर्ण तकनीकें अब अगले चरण की ओर जाने के लिए सुनिश्चित हो गई हैं।’ माना जा रहा है कि इस तकनीक का भारत में बहुत तरह से इस्तेमाल किया जा सकता है। इसके तहत कम लागत में सैटेलाइट मिसाइल बनाने के साथ ही नई पीढ़ी के लिए मिसाइल बनाना भी शामिल है। वैसे रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) समय समय पर मिसाइलों और रॉकेट प्रणाली के अलग-अलग तरह के टेस्ट करता रहता है लेकिन यह परीक्षण कई मायनों में बेहद अलग और खास है।

भारत ने पहली मर्तबा हायपरसोनिक हथियार प्रणाली विकसित करने की दिशा में सफलता हासिल की है। अब इसे देखते हुए भारत द्वारा भविष्य में अधिक उन्नत मिसाइल बनाने की बात कही जा रही है। भारत के तुनीर में मौजूद हथियारों में से ब्रह्मोस क्रूज मिसाइल के लिए चीन के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।  2.5 से 2.8 मैक के बीच आवाज की गति से कहीं ज्यादा रफ्तार से उड़ती है। इस मिलाइल को रोकना सबसे बड़ी चुनौती है। जब तक इसे रोकनी की चेष्टा की जाती है। तब तक तो यह अपने दुश्मनों के चीथड़े तक अलग कर देती है। यह तथ्य तो अब दृष्टिगोचर है कि अगर ब्रह्मोस को दागा तो लक्ष्य की तबाही तय है। शायद.. इसलिए इसे अजेय मिसाइल की संज्ञा दी जाती है। उधर, अब ऐसी स्थिति में जब भारत के रिश्ते चीन के साथ तनावपू्र्ण बने हुए हैं तो भारत को रक्षा क्षेत्र में प्राप्त हुई यह उपलब्धि यकीनन मील का पत्थर साबित हो सकती है।

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