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बंगाल में हार नहीं, ‘जीत’ की रणनीति का हिस्सा हो सकता है ममता का पत्र

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बीच विपक्षी एकता की बात कर तृणमूल कांग्रेस अध्यक्ष ममता बनर्जी ने नई बहस छेड़ दी है। विपक्षी नेताओं को लिखे पत्र को भाजपा चुनाव में उनकी परेशानी के तौर पर पेश कर रही है। वही, कांग्रेस पत्र को चुनाव में मतदाताओं को संदेश देने और भविष्य में जरूरत पड़ने पर समर्थन के लिए माहौल बनाने के तौर पर देख रही है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की छवि एक संघर्ष करने वाली महिला की है। पश्चिम बंगाल चुनाव में अहम जिम्मेदारी संभालने वाले एक नेता ने कहा कि वह असानी से हार नहीं मानती। इस पत्र का असल मकसद मतदाताओं को यह संदेश देना है कि पूरा विपक्ष एक है, इसलिए भाजपा को हराने वाले उम्मीदवार को वोट दे। क्योंकि, कांग्रेस के गढ़ माने जाने वाली सीट पर अभी मतदान नहीं हुआ है। इन सीट पर सातवें और आठवे चरण में मतदान है।

सेंटर फॉर द स्टडी ऑफ डेवलपिंग सोसाइटीज के निदेशक ड़ॉ संजय कुमार कहते हैं कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की चिठ्ठी का अर्थ निकालना मुश्किल है। कई लोग ऐसा मान सकते हैं कि यह लिखकर उन्होंने हार मान ली है। पर यह रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है, क्योंकि अगर आपने पहले ही इस बात का जिक्र कर दिया तो जमीनी स्तर पर समन्वय बेहतर होने लगता है। इसका फायदा चुनाव और चुनाव के बाद बनी स्थितियों में मिल सकता है।

वरिष्ठ नेता अबु हाशिम खान माल्दा दक्षिण से सांसद हैं। वर्ष 2016 के चुनाव में मालदा जिले की 12 विधानसभा में आठ सीट कांग्रेस ने जीती थी। पार्टी लेफ्ट और आईएसएफ के साथ गठबंधन में चुनाव लड़ रही है। इसके बावजूद वह कह चुके हैं कि चुनाव के बाद तृणमूल कांग्रेस को समर्थन की जरूरत पड़ती है, तो कांग्रेस समर्थन करेगी। ममता बनर्जी भी यही चाहती हैं।

कांग्रेस के एक नेता ने कहा कि उन्होंने जिन पार्टियों को पत्र लिखा है, उनमें सिर्फ कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। एनसीपी, शिवसेना, जेएमएम, आप, सपा और राजद पहले ही उनका समर्थन कर चुके हैं। ऐसे में तृणमूल कांग्रेस ने मतदाताओं को यह संदेश देने की कोशिश की है कि सभी एक है। चुनाव में मजबूत उम्मीदवार को वोट दीजिए। कांग्रेस और तृणमूल कांग्रेस 2011 में गठबंधन में चुनाव लड़ चुके हैं।

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