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कांग्रेस -बसपा से लग चुका है जोर का झटका, अब छोटे दलों से गठबंधन करेंगे अखिलेश यादव

विधानसभा चुनाव से पहले चुनावी समीकरण और गठबंधन का दौर तेज हो गया है। इस बीच अखिलेश यादव ने कहा है कि समाजवादी पार्टी को बीते कुछ चुनावों में कांग्रेस और बसपा जैसे प्रमुख राजनीतिक दलों के साथ गठबंधन का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। इसी पूर्व के अनुभवों को देखते हुए अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी ने विधानसभा चुनावों में छोटे दलों के साथ मिलकर काम करने का फैसला किया है। अखिलेश यादव जिन पार्टियों के साथ गठबंधन कर रहे हैं, इनमें से अधिकांश पार्टियों के पास चुनाव चिह्न भी नहीं हैं। इससे इनके अधिकांश कैंडिडेट साइकिल छाप पर ही चुनाव लड़ेंगे। इससे चुनाव लड़ने वाले प्रत्येक प्रत्याशी को सपा का प्रत्याशी के रूप में देखा जाएगा। राष्ट्रीय लोक दल (रालोद), सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (एसबीएसपी), महान दल और जनवादी पार्टी जैसी पार्टियां, जिनका राज्य के अलग-अलग हिस्सों में प्रभाव है। आने वाले दिनों में सपा के साथ सीट बंटवारे के फॉर्मूले को औपचारिक रूप देने के लिए तैयार हैं। .

रालोद को है किसानों से उम्मीद

जयंत चौधरी के नेतृत्व वाली रालोद पहले से ही सपा के साथ गठबंधन में है। यूपी विधानसभा में कोई प्रतिनिधित्व नहीं होने के कारण, पार्टी को उम्मीद है कि किसान आंदोलन से उसे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुसलमानों और जाटों को एक ही मंच पर लाने में मदद मिलेगी। रालोद के प्रवक्ता सुनील लोहटा ने बताया, ‘पश्चिमी यूपी में माहौल बदल गया है। किसान और मजदूर अब हाथ मिला चुके हैं। समाजवादी पार्टी के साथ मिलकर हम इस क्षेत्र में बीजेपी को हराएंगे।

राजभर का है सपा से गठबंधन

एसबीएसपी प्रमुख ओम प्रकाश राजभर ने बुधवार को लखनऊ में अखिलेश यादव से मुलाकात के बाद सपा के साथ गठबंधन की घोषणा कर दी है। पार्टी का राजभरों के बीच एक समर्थन आधार है, जिनकी वाराणसी और इसके आसपास के जिलों जैसे गाजीपुर, आजमगढ़ और मऊ में काफी उपस्थिति है। 2017 के विधानसभा चुनावों में, एसबीएसपी टीम बीजेपी में थी और उसने आठ सीटों पर चुनाव लड़ा था। चार पर जीत हासिल की थी। एक सहयोगी के रूप में एसबीएसपी के साथ, एसपी राजभर के वोटों को हासिल करने के लिए आशान्वित है।

मौर्य ने सपा से मांगी कम सीटें

केशव देव मौर्य द्वारा 2008 में शुरू किया गया महान दल, कुशवाहों, शाक्य और सैनियों के बीच प्रभाव होने का दावा करता है। इससे पहले यह 2019 के लोकसभा चुनावों के दौरान कांग्रेस के साथ गठबंधन में थी और उसने दो सीटों पर चुनाव लड़ा था। मौर्य पिछले एक साल से सपा के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

कुछ हिस्सों में सक्रिय संजय चैहान की पार्टी

संजय चौहान के नेतृत्व वाली जनवादी पार्टी (समाजवादी) पिछले कुछ वर्षों से पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में सक्रिय है। 2019 में चौहान  ने सपा के टिकट पर चंदौली से लोकसभा चुनाव लड़ा और भाजपा उम्मीदवार से लगभग 14,000 मतों से हार गए। चैहान का दावा है कि उनकी पार्टी के माध्यम से उनका समुदाय राजनीतिक रूप से जागरूक हो रहा है और 2022 के चुनावों में बदलाव लाएगा। सपा नेता और एमएलसी उदयवीर सिंह ने बताया कि यह सब आधार में अधिक वोट जोड़ने के बारे में है। ये पार्टियां हमारी स्वाभाविक सहयोगी हैं। कुछ अन्य पार्टियां जिनसे सपा ने गठबंधन के लिए संपर्क किया है। उनमें अपना दल (कृष्णा पटेल), पीस पार्टी और आजाद समाज पार्टी है।

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