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कभी बच्चों के लिए गुब्बारे बनाती थी MRF, अब बनाती है लड़ाकू विमान सुखोई के टायर, रचा एक और इतिहास

क्या आप जानते टायर बनाने वाली कंपनी एमआरएफ का पूरा नाम जानते हो? अगर नहीं तो आपको बता दें कि एमआरएफ का पूरा नाम मद्रास रबड़ फैक्ट्री (MRF-Madras Rubber Factory ) है. इसकी नींव आजादी से पहले रखी गई थी. सन 1946 में एमआरएफ की शुरुआत एक गुब्बारे बनानी वाली कंपनी के तौर पर हुई. केएम मैमन मापिल्लई ने इसे शुरू किया था.

एमआरएफ दिनों बहुत चर्चा में है. कंपनी की चर्चा इस बार उसके शेयर को लेकर हो रही है. एमआरएफ का शेयर पहली बार 1 लाख रुपये की कीमत पर पहुंच गया है. मौजूदा समय में भारतीय शेयर बाजार का ये सबसे महंगा शेयर है.

शुरुआत में गुब्बारे बनाती थी MRF

एमआरएफ की वेबसाइट पर दी गई जानकारी के मुताबिक, एम मैमन मापिल्लई ने आजादी से पहले सन 1946 में इसकी नींव रखी थी. केएम के पिता भी एक सफल कारोबारी थे लेकिन उन्होंने बहुत ही कठिन हालात में कंपनी शुरू की.

बताया जाता है कि त्रावणकोर के राजा ने आजादी की लड़ाई में शामिल होने की वजह से उनके पिता केसी मैमन मापिल्लई की सारी प्रॉपर्टी को जब्त कर लिया था. ऐसे में उनके सभी धंधे ठप हो गए थे. हालांकि, इसके बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और गुब्बारे बनाने वाली कंपनी शुरू की.

पहले हर दुकान पर जाकर बेचते थे गुब्बारे 

शुरुआत में केएम खुद दुकान पर जाकर दुकानदारों को गुब्बारे बेचते थे. इसके बाद उनकी जिदंगी में अहम मोड़ आज़ादी के बाद आया. उन्होंने सन 1954 में ट्रेड रबड़ उत्पादन की ट्रेनिंग ली. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा

सन 1962 में एमआरएफ ने टायर बनाना शुरू किया. सन 1964 में एमआरएफ टायर का अमेरिका को एक्सपोर्ट शुरू किया. इसके बाद सन 1973 में देश का पहला रेडियल टायर पेश किया.

वेबसाइट पर दी गई जानकारी साल 2007 में कंपनी का कारोबार पहली बार एक अरब अमेरिकी डॉलर पर पहुंच गया. इसके बाद 4 साल कारोबार 4 गुना तक बढ़ गया.

बनाती है लड़ाकू विमान सुखोई के टायर

कंपनी आज ट्यूब, बेल्ट, ट्रेड, हवाईजहाज तक के टायर बनाती है. एमआरएफ भारत की एकमात्र टायर निर्माता कंपनी है जो सुखोई 30 एमकेआई सिरीज के लड़ाकू विमानों के लिए टायर बनाती है. दुनिया के करीब 65 देशों को प्रोडक्ट एक्सपोर्ट किए जाते हैं.

 

निवेशक हुए मालामाल

एनएसई पर दी गई जानकारी के मुताबिक, सन 1993 में एमआरएफ का शेयर महज 11 रुपये का था. उस समय किसे ने इस शेयर में 1000 रुपये लगाए होते उसे 90 शेयर मिलते. जिनकी कीमत इस समय 90 लाख रुपये है. जी हां, सोमवार को एनएसई पर एमआरएफ का शेयर पहली बार 1 लाख रुपये के स्तर को पार कर गया था. हालांकि, अब शेयर 90 हजार रुपये के स्तर पर है.

एक्सपर्ट्स का कहना है कि शेयर में तेजी बड़े डिविडेंड की खबरों के चलते आई थी. लेकिन एमआरएफ ने महज 3 रुपये प्रति शेयर के डिविडेंड का ऐलान किया है. इसीलिए शेयर में तेज मुनाफावसूली देखने को मिल रही है. गुरुवार को एमआरएफ का शेयर 8 फीसदी से ज्यादा लुढ़क गया.

कंपनी ने गुरुवार को अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के नतीजों का भी ऐलान किया है. इस दौरान कंपनी का मुनाफा 236.63 करोड़ रुपये से बढ़कर 511.72 करोड़ रुपये हो गया है. वहीं, इस दौरान कंपनी की आमदनी 4008.89 करोड़ रुपये से बढ़कर 4,567 करोड़ रुपये पर पहुंच गई है.

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