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आखिर कौन है! खैबर पख्तूनख्वा की पहली महिला, जानिए DPO की कहानी

हाल ही में चित्राल पुलिस (Chitral Police) में शामिल हुईं खैबर पख्तूनख्वा (Khyber Pakhtunkhwa) की पहली महिला डिस्ट्रिक्ट पुलिस ऑफिसर (Districts Police Officer) सोनिया शमरोज (Sonia Shamroz) इन दिनों चर्चा में हैं. उनके परिवार ने शमरोज और उनकी चार बहनों की परवरिश ये सोचकर की उनके लिए जिंदगी में कुछ भी नामुमकिन न रहे. परिवार के इसी प्रोत्साहन की मदद से शमरोज खैबर पख्तूनख्वा की पहली महिला डीपीओ (DPO) बन पाई हैं.

Image Dawn की रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान पुलिस बल में महिलाओं की संख्या दो प्रतिशत से भी कम है. इसमें खैबर पख्तूनख्वा में महिला पुलिस बल की संख्या और भी कम है. ये आंकड़े शमरोज के संकल्प को दिखाते हैं. साथ ही इनसे हम उन चुनौतियों का भी अंदाजा लगा सकते हैं जिनका सामना उन्हें अपनी यात्रा के दौरान करना पड़ा.

परीक्षा से ज्यादा चुनौतीपूर्ण यात्रा

शमरोज के परिवार के कई लोग सरकार सेवा में काम करते हैं. उन्होंने आर्मी बर्न हॉल कॉलेज में पढ़ाई की. उन्होंने कहा कि अनुशासन और वर्दी ने मुझे प्रेरित किया और इसी वजह से मैंने सीएसएस की परीक्षा दी. परीक्षा में बैठना और इसे पास करना शमरोज के लिए उतना मुश्किल नहीं था जितनी चुनौतीपूर्ण उनकी यात्रा थी. एक बच्ची की मां शमरोज पहली महिला थी जो पुलिस की ट्रेनिंग करने जा रही थीं.

इस कठिन दौर में उनके पति और ससुराल वालों ने उनका साथ दिया और उनकी बेटी का ख्याल रखा जिससे शमरोज अपनी ट्रेनिंग पूरी कर पाईं. उनकी पहली पोस्ट मनसेहरा की एएसपी के रूप में थी, जो उनके लिए सीखने का एक बड़ा मौका था. उन्होंने कहा कि शुरू में लोग एक महिला को पुलिस के रूप में देखकर उलझन में थे लेकिन मेरे प्रयासों और काम ने उनका भरोसा जीत लिया.

चित्राल की सबसे बड़ी समस्या आत्महत्या दर

उन्होंने कहा कि मानसेहरा में मैं क्राइम सीन पर गईं और अपराधियों को पकड़ा, जिसने पुलिस के रूप में महिलाओं का छवि को बदलने का काम किया. शमरोज की पोस्टिंग ओघी और एबटाबाद में होने के साथ-साथ उन्होंने मानसेहरा में पुलिस ट्रेनिंग स्कूल के प्रिंसिपल के रूप में भी काम किया. इसके बाद उन्हें यूनाइटेड किंगडम के यॉर्क विश्वविद्यालय में ‘महिलाओं और संघर्ष के खिलाफ हिंसा’ की पढ़ाई करने के लिए Chevening स्कॉलर के रूप में चुना गया.

अपने परिवार के सहयोग, अनुभवों और ट्रेनिंग के बिना शमरोज ये सफर तय नहीं कर पाती. हाल ही में वो चित्राल पुलिस में एक डीपीओ के रूप में शामिल हुईं. पद ग्रहण करने के बाद उनकी चर्चा हो रही है. उन्होंने कहा कि चित्राल के दो प्रमुख मुद्दे हैं पहला आत्महत्या दर, जिसका शिकार ज्यादातर महिलाएं हैं. उन्हें लगता है कि ज्यादातर महिलाएं पीड़ित हैं, अवसरों की कमी है और शिकायत सुनने वाला कोई नहीं है.

डाउन डिस्ट्रिक्ट मैरिज भी बड़ी समस्या

शमरोज ने बताया कि बहुत सारी युवा लड़कियां विशेष रूप से आत्महत्या करती हैं, जब वो किसी से शादी करने के लिए मजबूर की जाती हैं या घरेलू हिंसा का शिकार होती हैं. समस्या का हल निकालने के बजाय वो आत्महत्या कर लेती हैं. दूसरा मुद्दा है ‘डाउन डिस्ट्रिक्ट मैरिज’, जिसमें दूसरे जिलों और प्रांतों से पुरुष नॉर्थ चित्राल आते हैं और छोटी उम्र की लड़कियों से शादी करके चले जाते हैं. कई बार इसके लिए उनके माता-पिता को पैसे भी दिए जाते हैं.

जनवरी के बाद से 100 से अधिक मामले किए हल

महिलाओं को अनुकूल माहौल देने और व्यवस्था को बदलने के लिए शमरोज लगातार काम कर रही हैं. जनवरी के बाद वो 100 से अधिक मामलों को हल कर चुकी हैं. लोअर चित्राल में काम करने वाले एक सामाजिक कार्यकर्ता ने नाम बताने की शर्त पर Image को बताया कि उसे अलग-अलग नंबरों से उत्पीड़न कॉल आ रहे थे. उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वो क्या करें. आखिरकाल वो चित्राल पुलिस स्टेशन की नई महिला डेस्क के साथ संपर्क किया और डीपीओ सोनिया और अधिकारी दिलशाद परी ने मामले की जांच की. कुछ ही समय में उन्होंने अपराधी को ढूंढ़ निकाला और उसे सजा दी.

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