राज्यसभा में गुरुवार को वक्फ संशोधन विधेयक को लेकर सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच तीखी नोंकझोंक हुई। कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य सैयद नासिर हुसैन ने केन्द्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर देश में ध्रुवीकरण की राजनीति करने का आरोप लगाते हुये कहा कि सरकार यह विधेयक सिर्फ वक्फ की संपत्ति को हड़पने के लिए लेकर आयी है। इस पर भाजपा सासंद राधामोहन दास अग्रवाल ने पलटवार करते हुए कहा कि इसका उद्देश्य वक्फ द्वारा किसी की संपत्ति पर दावा करने से रोकना और वक्फ की संपत्तियों का गरीब मुस्लिमों के उत्थान के लिए उपयोग करना है।
हुसैन ने वक्फ (संशोधन) विधेयक 2025 और मुसलमान वक्फ (निरसन) विधेयक 2025 पर चर्चा की शुरूआत करते हुये कहा कि 1995 में और वर्ष 2013 में जब इससे जुड़े विधेयक लाये गये थे तब भाजपा ने समर्थन किया था। उन्होंने सवाल किया कि भाजपा ने इसका क्यों समर्थन किया था और इसको सर्वसम्मति से पारित क्यों किया गया था। वर्ष 2009 में भाजपा ने अपने चुनाव घोषणा पत्र में इससे जुड़ी एक समिति की रिपोर्ट का उल्लेख करते हुये उसको लागू करने की बात कही थी। वर्ष 2013 में कांग्रेस सरकार ने उस समित और सच्चर समिति की रिपोर्ट को मिलाकर संशोधन किया था और उसका भाजपा ने समर्थन किया था।
उन्होंने कहा कि 2014 से 2024 तक केन्द्र में रही मोदी सरकार को यह समक्ष नहीं आया कि वक्फ कानून तुष्टीकरण वाला कानून है। वर्ष 2024 में जब भाजपा लोकसभा चुनाव में 400 सीटें नहीं जीत पायी और उसको 240 सीटें मिली तो इस संशोधन को लेकर आ गयी ताकि ध्रुवीकरण किया जा सके और धर्म की राजनीति की जा सके। उन्होंने इस विधेयक को मुस्लिम समुदाय को बदनाम करने वाला बताते हुये कहा कि वक्फ कानून को लेकर भ्रामक प्रचार किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि सुयक्त संसदीय समिति की रिपोर्ट को सदन में रखा जाना चाहिए कितने लोग विरोध में थे और कितने लोग पक्ष में थे यह पता चल सके। समिति की सिफारिशों में विरोधी सदस्यों की बातें नहीं है। समिति की बैठक में अनुच्छेदों पर चर्चा नहीं की गयी। समिति ने सर्वसम्मति से सिफारिश नहीं की बल्कि समर्थकों सदस्यों ने इसको जोर डालकर मंजूर कर दिया। यह सिर्फ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) के सांसदों की सिफारिश थी।
उन्होंने कहा कि यह संशोधन संविधान के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि देश के सभी धर्मों के लिए एक समान कानून होनी चाहिए। सभी धर्मों के लिए कानून बनाया जाना चाहिए, लेकिन उससे पर्सनल लॉ बोर्ड को अलग रखा जाना चाहिए। एक समुदाय को दूसरे दर्जे का नागरिक बनाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि दान के विचार हर धर्म में है। इस देश में हर धर्म के लिए अलग अलग कानून है। राज्यों में बनाये गये हैं। उन्होंने कहा कि सर्व आयुक्त सर्वे करता है। कलेक्टर उसको अनुमोदित करता है तो उसके बाद ही संपत्ति वक्फ की घोषित की जाती है।
इसी बीच गृह मंत्री अमित शाह ने हस्तक्षेप करते हुये कहा कि जो विवाद है वह इतना ही है कि जो न्यायाधिकरण के फैसले से असंतुष्ट होते हैं उनको सिविल में चुनौती देने का वक्फ कानून में अधिकार नहीं दिया गया है। न्यायाधिकरण का फैसला 99 प्रतिशत सही माना जाता है। जिसकी भूमि है उसको अपील करने का अधिकार नहीं है।
इसके बाद हुसैन ने कहा कि सरकार की पूरी नजर वक्फ की भूमि पर है। देश में अलग अलग धर्म स्थल है। देश में दंगे फसाद कराने की कोशिश की जा रही है। सिर्फ वोट की राजनीति हो रही है। नया पोर्टल लाने की बात की जा रही है। सरकार मुसलमान पर निगरानी करना चाह रही है। वर्ष 2013 में तत्कालीन सरकार द्वारा राजधानी दिल्ली के लुटियन क्षेत्र में 123 संपत्तियों को वक्फ को सौंपने का उल्लेख करते हुये। उन्होंने कहा कि जब अंग्रेज लुटियन बना रहे थे तब यह भूमि दी गयी थी। इसको लेकर लोगों को गुमराह किया जा रहा है। उच्च न्यायालय के आदेश पर सरकार ने यह भूमि वक्फ के नाम किया था।
भाजपा के अग्रवाल ने कहा कि हुसैन के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने पर कर्नाटक विधानसभा में पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगाये गये थे, जिसका भाजपा सदस्यों ने विरोध किया था और विरोध करने वालों को जेल में डाल दिया गया था। उन्होंने कहा कि इस विधेयक को लेकर देश के लिए यह गौरव का दिन है। गरीब मुसलमानों के लिए, पासमंदा मुसलमानों के लिए गर्व की बात है। क्रांतिकाकरी बदलाव होने जा रहा है। सामाजिक बदलाव लाने वाला है। उन्होंने कहा कि हिन्दू समाज की बुराईयों को लगातार हटाये जाता रहा है, लेकिन जब मुस्लिम समुदाय की बात होती है तो एक भी सुधार का काम नहीं किया गया है। यह पहली बार है जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने यह ऐतिहासिक काम किया है।