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HC ने CAA के विरुद्ध प्रदर्शन को बताया विनाशकारी, उमर खालिद को नहीं दी जमानत

दिल्ली हिंसा (Delhi Violence) को लेकर गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र नेता (Former JNU student leader) उमर खालिद (Umar Khalid) को जमानत देने से इंकार करे हुए सोमवार को उच्च न्यायालय (high Court) ने सख्ती टिप्पणी की। उच्च न्यायालय ने कहा कि सीएए (CAA against Protest) के खिलाफ आयोजित विरोध प्रदर्शन उस तरह का नहीं था जो ‘राजनीतिक संस्कृति या लोकतंत्र में सामान्य होते हैं, बल्कि बहुत ही विनाशकारी और हानिकारक (destructive and harmful) थे।’

पीठ ने यह टिप्पणी करते हुए कहा है कि आरोपियों का कृत्य प्रथम दृष्टया यूएपीए के तहत आतंकवादी अधिनियम की श्रेणी में आता है। न्यायालय ने कहा है कि आरोपपत्र और अन्य तथ्यों व दस्तावेजों को देखने से पता चलता है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में व्यवधान पैदा करने के लिए जानबूझ कर सड़कों को अवरुद्ध किया गया था और इस्तेमाल किए गए हथियारों, हिंसा में लोगों की मौतों और नुकसान से संकेत मिलता है कि यह पूर्व नियोजित था।

खालिद अन्य के संपर्क में था
जस्टिस सिद्धार्थ मृदुल और रजनीश भटनागर की पीठ ने कहा है कि तथ्यों से जाहिर है कि खालिद अन्य सहयोगियों/आरोपियों के साथ लगातार संपर्क में था। पीठ ने नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) के विरोध में आयोजित प्रदर्शन हिंसक दंगों में बदल गए जो पहली नजर में षड्यंत्रकारी बैठकों में सुनियोजित लग रहे थे। गवाहों के बयान से लग रहा है कि इस विरोध प्रदर्शन में खालिद सक्रिय रूप से शामिल था।

पुलिस पर हमला आतंकी कृत्य जैसा
उच्च न्यायालय ने कहा कि हिंसा के दौरान महिला प्रदर्शनकारियों द्वारा पुलिसकर्मियों पर हमले एक पूर्व-नियोजित षड्यंत्र का प्रतीक थे जो यूएपीए कानून के तहत आतंकवादी कृत्य की परिभाषा के दायरे में हैं। पीठ के कहा है कि हिंसा के लिए इस्तेमाल किए गए हथियार, हमले का तरीका, हुए नुकसान और उसके नतीजतन लोगों की मौत के मामलों से संकेत मिलता है कि यह पूर्व नियोजित था। न्यायालय ने कहा है कि पुलिस कर्मियों पर हमले के दौरान आगे महिलाओं का होना और उनके पीछे आम लोगों का होना तथा इलाके में हिंसा के हालात पैदा करना, इस तरह की पूर्व नियोजित योजना की बानगी है और इसे प्रथम दृष्टया किसी आतंकवादी कृत्य की परिभाषा के दायरे में माना जाएगा।

दो साल से जेल में बंद है पूर्व जेएनयू छात्र नेता
नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के विरोध में आयोजित प्रदर्शन को लेकर उत्तर पूर्वी दिल्ली में फरवरी, 2020 में हुई हिंसा में 53 लोगों की मौत हो गई, जबकि 700 से अधिक लोग घायल हो गए। इस मामले में खालिद को 13 सितंबर, 2020 को गिरफ्तार किया गया था और तब से वह न्यायिक हिरासत के तहत जेल में है।

दाखिल की थी याचिका
दिल्ली में हिंसा की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद ने याचिका में उच्च न्यायालय से जमानत की मांग करते हुए कहा था कि दिल्ली पुलिस के पास इस बात का कोई साक्ष्य नहीं है कि अपराध में उसकी सहभागिता है। उसका कोई संबंध नहीं है।

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