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DSP की नौकरी को लात मारकर सियासत में रखा था कदम, बड़ी ही दिलचस्प है पासवान की कहानी

बतौर सियासी सूरमा व मौसम विज्ञानी के रूप में प्रख्यात दिवंगत केंद्रीय खाद्द मंत्री रामविलास पासवान का गुरुवार को निधन हो गया। उनके निधन पर समस्त देश में शोक की लहर है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह समेत अनेकों नेताओं ने उनके निधन पर दुख व्यक्त किया है। आज दोपहर उनके शव को पटना स्थित लोकजन शक्ति के कार्यालय पर अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। उनके निधन पर हर कोई शोकाकुल है। वहीं, अब उनके निधन के उपरांत उनसे जुड़े तरह-तरह के किस्से सामने आ रहे हैं। अभी एक ऐसा ही किस्सा सामने आ रहा है, जब उन्होंने डीएसपी की नौकरी को ठुकरा कर सियासत में कदम रखा था, और फिर इसका जो नतीजा रहा यह तो हम सबके सामने परिलक्षित है।

हो गया था डीएसपी के लिए चयन, लेकिन.. 
भारतीय राजनीति में सियासी पंडित के रूप में विख्यात रहे रामविलास पासवान एमए करने के बाद एलएलबी किया था। इसके बाद उन्होंने प्रतियोगी परीक्षाओं का रूख किया। परीक्षा के दौरान उनका चयन डीएसपी के लिए हो गया। लेकिन इस  बीच वे जयप्रकाश आंदोलन से जुड़ गए थे। इसके बाद वे 1979 में सोशलिस्ट पार्टी के महासचिव बनाए गए थे। इसके बाद 1977 में हाजीपुर सीट से लोकसभा का चुनाव लड़े फिर यहां से भारी मतों से जीत दर्ज की।

फिर किया लोकजन शक्ति पार्टी का गठन
इसके बाद फिर उन्होंने 2000 में बिहार की सियासत में धमाल मचाने के लिए लोकजन शक्ति पार्टी का गठन किया था। वे काफी लंबे अरसे तक पार्टी के अध्यक्ष बने रहें। उन्होंने 1981 में दलित संगठन की स्थापना की। केंद्र की  साझेदारी के साथ वे हमेशा से केंद्र में अपनी  जगह बनाने में सफल रहे। वे 50 साल से ज्यादा समय तक विधायक व सांसद रहें। इसके बाद फिर उन्होंने मंत्री के कुनबों में अपनी जगह बनाई। पासवान, वीपी सिंह, एचडी देवेगौड़ा, इंद्रकुमार गुजराल, अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और नरेंद्र मोदी की कैबिनेट की शोभा बढ़ा चुके हैं।

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