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Budget 2021: कृषि सेक्टर में भारी निवेश का रोडमैप तैयार, बजट में किसानों को मनाने का मिलेगा मौका

कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का आंदोलन जारी है. 11 दौर की वार्ता के बाद भी कोई समाधान नहीं निकल पाया है. अब अंतिम उम्मीद बजट पर टिकी है जिसमें सरकार किसानों के लिए कोई बड़ा ऐलान कर सकती है. माना जा रहा है कि सरकार बजट के जरिये किसान आंदोलन का समाधान निकालने की कोई घोषणा कर सकती है. सरकार पहले से घोषणा कर चुकी है कि 2022 तक किसानों की आमदनी डबल करने के लिए प्रतिबद्ध है और इसकी छाप सोमवार को बजट में देखी जा सकती है.

अभी हाल में जारी आर्थिक सर्वेक्षण में बताया गया था कि 2021 में कृषि के क्षेत्र में सबसे बड़ा सुधार देखने को मिल सकता है. इसी सेक्टर में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है. किसानों की आय दोगुनी करने के लिए एक अनुमान के मुताबिक आर्थिक वृद्धि दर 15 परसेंट के आसपास होनी चाहिए जबकि अगले वित्त वर्ष में 11 परसेंट का अनुमान जताया गया है. आय दोगुनी तभी होगी जब कृषि क्षेत्र में बड़े ऐलान होंगे. इस दिशा में माना जा रहा है कि सरकार कृषि क्षेत्र से जुड़े इंफ्रास्ट्रक्चर पर खर्च को बढ़ा सकती है.

मंडियों के लिए बड़ी घोषणा

दूसरी सबसे बड़ी घोषणा एपीएमसी मंडियो को लेकर की जा सकती है. किसान आंदोलन की जड़ में एपीएमसी मंडिया हैं और किसानों की शिकायत है कि नए कृषि कानूनों के माध्यम से मंडियों को बंद करने की तैयारी है. इस बजट में सरकार मंडियों के मॉडर्नाइजेश के लिए बड़ी राशि आवंटित कर सकती है. इससे मंडियों में सुधार होगा और किसानों में यह भरोसा बढ़ेगा कि नए कृषि कानूनों से मंडियां बंद नहीं होंगी बल्कि और मजबूत होंगी.

ई-नाम के लिए अलग से फंड

सरकार ने नेशनल एग्रीकल्चर मार्केट यानी कि ई-नाम (E-NAM)का अलग से प्लेटफॉर्म बनाया है. इस प्लेटफॉर्म के लिए 1000 करोड़ रुपये के फंड का ऐलान हो सकता है. सरकार यह भी चाहती है कि कमाई के लिए किसान अलग-अलग तरह की फसल लगाएं जिनमें नकदी और गैर-नकदी फसलें शामिल हों. इस प्रचलन को बढ़ावा देने के लिए सरकार इनसेंटिव का ऐलान कर सकती है. इस बजट में नेशनल ऑयल सीड मिशन का ऐलान हो सकता है. सरकार इसके लिए 5 हजार करोड़ रुपये के फंड की घोषणा कर सकती है. बजट में आवंटन बढ़ाकर किसान रेल और कृषि उड़ान स्कीम को मजबूती देने की तैयारी है.

टेक्नोलॉजी पर ज्यादा ध्यान

कृषि क्षेत्र के समग्र विकास के लिए बजट में स्वदेशी कृषि अनुसंधान, तिलहन उत्पादन, खाद्य प्रसंस्करण और जैविक खेती के लिए अलग से फंड की मांग हो रही है जिस पर सरकार कुछ घोषणा कर सकती है. उद्योग से जुड़े विशेषज्ञों ने कहा है कि प्रत्यक्ष नकद हस्तांतरण (DBT) योजना का इस्तेमाल किसानों को सब्सिडी देने की जगह अधिक समर्थन देने के लिए होना चाहिए. जानकारों की मानें तो खाद्य प्रसंस्करण उद्योग ने किसान के लिए बेहतर कीमत पाने और बिचौलियों को कम करने में अहम भूमिका निभाई है. बजट में खाद्य प्रसंस्करण के लिए ब्याज प्रोत्साहन, करों में कटौती, टेक्नोलॉजी का उपयोग और विशेष प्रोत्साहन देना चाहिए. इसके लिए सरकार कुछ घोषणाएं कर सकती है.

स्टार्टअप को मिलेगी मदद

कई भारतीय स्टार्टअप ने कृषि टेक्नोलॉजी क्षेत्र में निवेश किया है, और इन कंपनियों की वृद्धि के हिसाब से नीतियां तैयार हो रही हैं. नए स्टार्टअप को और गति देने और कृषि सेक्टर में बढ़ावा देने के लिए सरकार कुछ घोषणाएं कर सकती है. खाद्य तेलों के आयात को कम करने के लिए तिलहन के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना जरूरी है और इसके लिए अधिक फंड की जरूरत होगी. जानकार मानते हैं कि सरकार को किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए. इस सेक्टर में कोल्ड स्टोरेज के निर्माण और भंडारण क्षमताओं को बढ़ाने के लिए निवेश की जरूरत है जिस पर सरकार कुछ अहम घोषणा कर सकती है.

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