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अखिलेश ने साधा बसपा के वोट बैंक पर निशाना, समाजवादी बाबा साहेब वाहिनी गठन कर सौंपी जिम्मेदारी

विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल एक-दूसरे के वोट बैंक को अपना बनाने में लगे हुए हैं। उत्तर प्रदेश में जाति और धर्म की राजनीति से वोट लेने की तैयारी शुरू हो चुकी है। दलित वोट बैंक को साधने के लिए अखिलेश यादव ने समाजवादी बाबा साहेब वाहिनी का गठन कर दिया है। अखिलेश यादव ने हाल ही में बहुजन समाज पार्टी छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल होने वाले मिठाई लाल भारती को इसका राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाया है। उन्होंने मिठाई लाल भारती से जल्द से जल्द वाहिनी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी का गठन करने को कहा है। माना जा रहा है कि समाजवादी बाबा साहेब वाहिनी की मदद से अखिलेश यादव दलित वोटरों में अपनी पैठ बनाना चाहते हैं। समाजवादी बाबा साहेब वाहिनी से बसपा के वोट बैंक पर करारा प्रहार माना जा रहा है।

 

ज्ञात हो कि इसी साल अप्रैल में अखिलेश यादव ने ट्वीट कर बाबा साहेब वाहिनी के गठन का ऐलान किया था। कर बाबा साहेब वाहिनी के गठन में कुछ देरी हुई। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि ‘अखिलेश यादव ने इस साल अप्रैल में ट्वीट कर कहा था कि संविधान निर्माता आदरणीय बाबा साहेब डॉ. भीमराव अम्बेडकर जी के विचारों को सक्रिय कर असमानता व अन्याय को दूर करने और सामाजिक न्याय के समतामूलक लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, हम उनकी जयंती पर जिला, प्रदेश व देश के स्तर पर सपा की बाबा साहेब वाहिनी के गठन का संकल्प लेते हैं।

बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी की तैयारी

अखिलेश यादव की मंशा अब पिछड़ों के साथ दलित वोटरों को भी साधने की है। 2019 के लोक सभा चुनाव में बसपा से गठबंधन के बावजूद जैसी उम्मीद थी कि दलित वोट सपा प्रत्याशियों के पाले में जाएगा वैसा हुआ नहीं। यह बात कई सपा नेता भी कह चुके हैं. लिहाजा अब इस नई वाहिनी से समाजवादी पार्टी बसपा के वोट बैंक में सेंधमारी करने की कोशिश में है। अखिलेश के इस नये निशाने मतदाताओं पर और वोट बैंक पर बड़ा असर पड़ने वाला है।