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सेना को बहुत पसंद आया छलावरण जाल, अब दुश्मन को दिखाई नहीं देंगे भारतीय जवान

जंगल, रेगिस्तान, बर्फीले क्षेत्रों में सेना की ओर से चलाए जाने वाले स्पेशल आपरेशन के दौरान अब जवान दुश्मनों को आसानी से चकमा देने में सक्षम होंगे। दुश्मन का रडार भी जवानों की मौजूदगी को नहीं भांप पाएगा। यह संभव हो पाया है छलावरण जाल प्रणाली (सिंथेटिक नेट कामा फ्लैग) से। ट्रूप कंफट्स लिमिटेड कानपुर की इकाई आयुध उपस्कर निर्माणी (ओईएफ) में तैयार हो रहे इस आधुनिक उत्पाद की मांग बढ़ी है। इससे फैक्ट्री में उत्पादन में इजाफा हुआ है।

उत्पादन से जुड़े जानकारों के मुताबिक, यह जाल आर्मी टेंट के ऊपर डाल दिया जाता है। जाल में लगा ङ्क्षसथेटिक फैब्रिक रडार से निकलने वाली तरंगों को बिखरा देता है। इससे दुश्मनों की नजर से आसानी से बचाने में सक्षम है। ओईएफ कानपुर में टेंट के साइज का जाल आठ घंटे में तैयार किया जाता है। एक जाल के अंदर 12 जवान और आधुनिक हथियार सुरक्षित रह सकते हैं।

छलावरण जाल की खासियत : छलावरण जाल सर्विलांस के लिए निकलने वाली इंफ्रारेड किरणों को परिवर्तित कर देता है, जिससे जाल से ढकी चीजें काली दिखने लगती हैं। इससे दुश्मन उस स्थान पर सेना के जवानों व हथियारों का पता नहीं लगा पाता।

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जवानों को गर्माहट देगा बुखारी : सियाचिन, चीन के बार्डर में माइनस 30 से माइनस 50 डिग्री तापमान पर देश की रक्षा कर रहे जवानों को बुखारी उपकरण गर्माहट देगा। सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, पैरामिलिट्री फोर्स में इसकी मांग बढ़ी है। ओईएफ में हर माह तीन से चार हजार उपकरण बन रहे हैं। स्पेस हीटिंग डिवाइस बुखारी को अग्निरोधी टेंट के अंदर लगाया जाता है। सौर ऊर्जा से इसकी बैटरी चार्ज होती है, जो आठ घंटे तक अग्निरोधी टेंट को गरम रख सकती है।

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वायुसेना को भाए फिसलन रोधक जूते : ओईएफ में तैयार फिसलन रोधक जूतों की गुणवत्ता भा जाने से वायुसेना नेे 10 हजार से अधिक जूतों का आर्डर दिया है। अधिकारियों के मुताबिक, महज 610 ग्राम का जूता हवाई जहाज में चढ़ते-उतरते समय फिसलने से बचाता है। चार से 50 डिग्री तक के तापमान पर वायु सैनिकों को आराम देते हैं।

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द्वितीय विश्वयुद्ध के टैंक का जाना इतिहास : आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत ग्लाइडर्स इंडिया कंपनी की इकाई आर्डनेंस पैराशूट फैक्ट्री, स्माल आम्र्स फैक्ट्री, आर्डनेंस फैक्ट्री, फील्ड गन फैक्ट्री, ट्रूप कंफट्र्स लिमिटेड की इकाई ओईएफ व हिंदुस्तान एयरोनाटिक्स लिमिटेड की ओर से लगाई गई प्रदर्शनी के चौथे दिन गुरुवार को बड़ी संख्या में लोग जुटे।

अर्मापुर स्टेट के आरमारीना स्टेडियम में विद्यार्थियों ने द्वितीय विश्वयुद्ध की तोप से लेकर आधुनिक सारंग एवं धनुष, टी72 टैंक, अर्जुन टैंक, एलएफजी, पिनाका राकेट व छोटे हथियारों को देखा। यहां पर संयुक्त महाप्रबंधक जितेंद्र त्रिवेदी, ज्योति त्रिवेदी, उप निदेशक अरुण कस्तवार, उप महाप्रबंधक सुधीर यादव, कार्य प्रबंधक अवनीत श्रीवास्तव, अमित यादव, अनुज तिवारी, विनय अवस्थी, जेके पांडेय, अमर सिंह उपस्थित रहे।

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