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सलमान खुर्शीद के राहुल गांधी की भगवान राम से तुलना करने पर विहिप का हमला, कहा विनाश काले विपरीत बुद्धि

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद द्वारा राहुल गांधी की तुलना भगवान राम से करने पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए विश्व हिंदू परिषद ने इसे विनाश काले विपरीत बुद्धि की संज्ञा दी है। विहिप ने इस बयान के लिए कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी मांगने की भी मांग की है। विश्व हिंदू परिषद के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने सलमान खुर्शीद के बयान पर कड़ी प्रतिक्रिया देते हुए कहा जिस कांग्रेस ने भगवान राम के अस्तित्व को सिरे से नकार दिया था, यहां तक कि देश की सर्वोच्च अदालत में यूपीए सरकार के कार्यकाल में हलफनामा तक दायर कर कह दिया था कि राम तो इस देश में हुए ही नहीं, उस कांग्रेस को आज भगवान राम और उनके खड़ाऊं की याद आ रही है।

 

भगवान राम की तुलना राहुल गांधी से करने को निंदनीय करार देते हुए विहिप ने कहा कि देश का हिंदू समाज इसे कतई स्वीकार नहीं करेगा। कांग्रेस समाप्ति की ओर है और यह बयान विनाश काले विपरीत बुध्दि का परिचायक है। बंसल ने कांग्रेस नेता द्वारा दिए गए इस तरह के बयान के लिए कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे से माफी मांगने की भी मांग की।

एफआईआर के लिए कहा तो कागज अवतरित हो गए
सिंह ने आदेश में लिखा कि कई मामलों में जब सूचना आयोग संबंधित लोक प्राधिकारी को पुलिस रिपोर्ट दर्ज करने के लिए कहता है तो यह गायब कागज वापस अवतरित हो जाते हैं. ऐसा नहीं है कि सिर्फ आम नागरिक गुम कागजों की वजह से परेशान होते हैं, बल्कि राजकीय अधिकारियों कर्मचारी भी इसका शिकार हो जाते हैं. शासकीय कर्मचारी अधिकारियों के विभागीय रिकॉर्ड गुम हो जाने से उनके सेवाकाल एवं सेवानिवृत्ति के समय अधिकारी कर्मचारियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है.

दस्तावेजों के गायब और चोरी होने पर पुलिस में दर्ज हो रिपोर्ट
सिंह ने कहा कि गायब या गुम कागजों को लेकर संबंधित दोषी अधिकारी कर्मचारी की जवाबदेही तय की जानी चाहिए. साथ ही उनके खिलाफ विभागीय स्तर पर समयबद्ध तरीके से कार्रवाई सुनिश्चित होनी चाहिए. अगर जानबूझकर किसी के द्वारा कागज गायब करवाया गया है तो पुलिस में उक्त अधिकारी कर्मचारी के विरुद्ध FIR दर्ज कर कार्रवाई होनी चाहिए.

66 सालो में पहली बार गायब होते दस्तावेजों के लिए चिंता
सूचना आयुक्त ने कहा कि मध्य प्रदेश राज्य के गठन से लेकर अब 66 साल बीत जाने के बाद पहली बार पता चल रहा है कि मध्यप्रदेश में दस्तावेजों के रखरखाव, प्रबंधन के लिए पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट ही नहीं है. जाहिर है कि राज्य के अधिकारियों ने गायब होते दस्तावेजों को कभी गंभीरता से नहीं लिया.

केंद्र एवं अन्य राज्यों में होती है फाइल गायब होने पर होती है यह कार्रवाई
सूचना आयुक्त राहुल सिंह ने कहा कि मध्यप्रदेश में सरकारी दफ्तरों में रिकॉर्ड गुम या चोरी होने, गलत तरीके से नष्ट करने पर दोषी अधिकारी या कर्मचारी पर कार्रवाई के लिए पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट ही नहीं है. कागजों के गायब होने पर अधिकारियों के उदासीन रवैए के पीछे एक बड़ी वजह यह एक्ट न होना है. जबकि केंद्र एवं अन्य राज्यों में यह उपलब्ध है. केंद्र के पब्लिक रिकॉर्ड एक्ट के तहत रिकॉर्ड गायब होने होने पर दोषी अधिकारी कर्मचारी के खिलाफ 5 साल तक के कारावास और 10000 रुपए जुर्माने का प्रावधान है.

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