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शहादत के 90 साल! लाहौर में याद किए गए भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव

भारत में कई जगहों पर मंगलवार को स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की पुण्यतिथि के मौके पर कार्यक्रम का आयोजन किया गया. वहीं शहीदी दिवस के खास मौके पर भारत के पड़ोसी देश पाकिस्तान में भी भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को याद किया गया.

कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया

शहीदी दिवस के खास मौके पर पाकिस्तान के लाहौर में कई कार्यक्रमों का आयोजन किया गया. इन कार्यक्रम में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया. भारतीय स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव को 90 साल पहले अंग्रेजों ने लाहौर में फांसी दी थी.

अंग्रेजों ने लाहौर में 23 साल की उम्र में 23 मार्च, 1931 को भगत सिंह को उनके साथियों राजगुरु और सुखदेव के साथ फांसी के फंदे पर चढ़ाया था. उन पर ब्रितानी सरकार के खिलाफ षड्यंत्र करने और अंग्रेज पुलिस अधिकारी जॉन पी सांडर्स की कथित तौर पर हत्या करने का मुकदमा चलने के बाद यह सजा दी गई थी.

बड़ी संख्या में लोगों ने लिया हिस्सा

भगत सिंह मेमोरियल फाउंडेशन ने स्वतंत्रा सेनानियों की कुर्बानी की याद में यह कार्यक्रम आयोजित किया. लाहौर उच्च न्यायालय की ओर से लाहौर पुलिस प्रमुख को इस कार्यक्रम को पूरी सुरक्षा मुहैया कराने के आदेश दिए जाने के बाद यह कार्यक्रम आयोजित हुआ. कार्यक्रम स्थल पर भगत सिंह की एक तस्वीर लगाई गई थी और बड़ी संख्या में लोगों ने इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया और शहीद स्वंतत्रा सेनानी को श्रद्धांजलि दी.

बता दें कि देश की आजादी के लिए भारत मां के कई वीर सपूतों ने अपने प्राणों की आहुती दी थी. जिसमें से भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु भी एक हैं. अंग्रेजी शासन की हुकूमत के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए उन्होंने ‘पब्लिक सेफ्टी और ट्रेड डिस्ट्रीब्यूट बिल’ के विरोध में सेंट्रल असेंबली में बम फेंके थे. जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया और फांसी की सजा दे दी गई थी.

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