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विधि-विधान के साथ केदारनाथ के कपाट बंद, अब 6 महीनों तक ऊखीमठ में होगी पूजा

उत्तराखंड की चारधाम यात्रा  खत्म हो गई है. आज भैया दूज के मौके पर श्री केदारनाथ धाम के कपाट शीतकाल के लिए बंद हो गए हैं. सुबह विधि-विधान के साथ कपाट बंद होने के बाद सेना के बैंड की भक्तिमय धुनों के साथ बाबा की पंचमुखी विग्रह मूर्ति शीतकालीन गद्दी स्थल श्री ओंकारेश्वर मंदिर ऊखीमठ के लिए प्रस्थान कर चुकी है. हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु बाबा केदार के जयकारों के साथ डोली के साथ चले. अब अगले 6 महीनों तक ऊखीमठ में पूजा होगी.

उत्तरकशी में विश्व प्रसिद्ध यमुनोत्री धाम के कपाट भी आज भैयादूज के अवसर पर शीतकाल के लिए अगले छ माह तक बंद होंगे. कपाट बंद होने को लेकर यमुनोत्री के तीर्थ पुरोहितो की तैयारी भी जोरों पर हैं. कपाट बंद होने के मुहूर्त में इस बार यमुना जी के कपाट आज दोपहर 12 बजकर 09 मिनट पर अभिजित मुहूर्त सरवान सिद्धि योग के तहत बंद किए जाएंगे. शनि महाराज की अगुवाई में मां यमुना आज यमुनोत्री धाम से प्रस्थान करेंगी औरअपने शीतकालीन प्रवास स्थल खरसाली गांव जाएंगी.

इसके साथ ही द्वितीय केदार मद्महेश्वर के कपाट शुक्रवार 18 नवंबर और तृतीय केदार तुंगनाथ के कपाट सात नवंबर को बंद होंगे. तीन मई 2022 को अक्षय तृतीया के मौके पर चारधाम यात्रा की शुरूआत हुई थी. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक चारधाम यात्रा में अब तक 42 लाख से ज्यादा तीर्थ यात्री पहुंच चुके हैं.

गंगोत्री धाम के कपाट भी बंद

उत्तराखंड के उच्च गढ़वाल हिमालयी क्षेत्र के चारधामों के रूप में प्रसिद्ध मंदिरों में से एक गंगोत्री धाम के कपाट बुधवार को अन्नकूट के मौके पर श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए गए. सर्दियों में छह माह मंदिर के बंद रहने के दौरान श्रद्धालु मां गंगा की पूजा अर्चना, उनके शीतकालीन प्रवास स्थल मुखबा गांव में कर सकेंगे.

बता दें कि बदरीनाथ के कपाट 19 नवंबर को बंद होंगे. सर्दियों में बर्फवारी और भीषण ठंड की चपेट में रहने के कारण चारधामों के कपाट हर साल अक्टूबर-नवंबर में श्रद्धालुओं के लिए बंद कर दिए जाते हैं, जो अगले साल अप्रैल-मई में फिर खोल दिए जाते हैं.

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