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रूस के लिए अब भारत ने किया ये काम, ले ली चीन की जगह

इस साल भारत आजादी का अमृत महोत्सव मना रहा है. स्वतंत्र भारत के 75 साल का जश्न. इन 75 बरस में ये भी खास है कि जहां 15 अगस्त को आजाद भारत 75 साल को हो जाएगा. वहीं 21 दिसंबर को भारत और रूस की अटूट दोस्ती भी 75 साल पूरे कर लेगी. इन 75 साल में भारत और रूस ने दोस्ती की अनेको मिसाल कायम की हैं. 1971 में तो भारत के समर्थन में रूस आधी दुनिया से लड़ गया था.

भारत-पाक युद्ध में जब अमेरिका, यूरोपीय देशों के साथ ही चीन भी भारत के खिलाफ हो गया था तो इन देशों के पोतों को भारत पर हमला करने से रोकने के लिए रूस ने समुद्री मार्ग ही रोक दिया था. अब जब रूस ने इस साल यूक्रेन पर हमला किया और तमाम वैश्विक प्रतिबंधों को लगाकर पश्चिमी देशों ने रूस की आर्थिक कमर तोड़ने की कोशिश की तो भारत भी सबकी परवाह किए बिना रूस के साथ कारोबारी रिश्तों को लगातार निभा रहा है.

रूस से कच्चा तेल खरीदने में चीन से आगे निकला भारत
रूस के जिस कच्चे तेल की खरीद पर प्रतिबंध लगा दिया गया था, भारत उसकी खरीद लगातार बढ़ा रहा है. जुलाई में तो भारत ने चीन को पीछे छोड़ने का दम दिखाया है. अनुमान है कि भारत इस महीने रूस से समुद्र के रास्ते तेल के सबसे बड़े आयातक के तौर पर चीन को पीछे छोड़ देगा.

दरअसल, रूस से छूट पर मिल रहे यूराल ग्रेड के कच्चे तेल की मांग भारत में लगातार बढ़ रही है. ऐसे में लंदन की ऊर्जा विश्लेषक फर्म वॉर्टेक्सा ने दावा किया है कि भारत में रूस से कच्चे तेल का आयात जुलाई में 10 लाख बैरल प्रतिदिन से भी ज्यादा रह सकता है. इसमें यूराल क्रूड की हिस्सेदारी 25 जुलाई तक करीब 8.80 लाख बैरल प्रतिदिन रही है जबकि चीन ने रूस से समुद्र के रास्ते जुलाई में कच्चे तेल का आयात भारत के मुकाबले कम किया है.

ये अनुमान चीन के सटीक आंकड़े उपलब्ध नहीं होने की वजह से पुख्ता तो नहीं है लेकिन वॉर्टेक्सा में चीन की एनालिस्ट एमा ली के मुताबिक, चीन और भारत लगातार समुद्री रूट से रूस का क्रूड ऑयल खरीद रहे हैं और भारत के जुलाई में सबसे बड़े आयातक के तौर पर चीन से आगे निकलने के आसार हैं.

रूस से भारी छूट पर मिल रहा कच्चा तेल
ये पहली बार है कि भारत समुद्री रास्ते से रूस से आने वाले कच्चे तेल के आयात में चीन से आगे निकल गया है. जुलाई में जहाजों से हर दिन तीन लाख बैरल रूसी यूराल क्रूड चीन पहुंचा है.

चीन, रूसी ईएसपीओ ब्लेंड कच्चे तेल का आयात करता है, जिसे उसके स्वतंत्र रिफाइनर उसमें भी शानदोंग के रिफाइनर इसे सबसे ज्यादा पसंद करते हैं. चीन लॉन्ग टर्म कॉन्ट्रैक्ट के तहत पाइपलाइन से भी ईएसपीओ ब्लेंड मंगाता है लेकिन वॉर्टेक्सा की स्टडी में रूस से पाइपलाइन के जरिये भेजे जाने वाले कच्चे तेल को शामिल नहीं किया गया है.

अनुमान है कि इसका हिस्सा रूस से एक्सपोर्ट होने वाले कुल कच्चे तेल का केवल 10 फीसदी हो सकता है. बाकी 90 फीसदी तेल समुद्री जहाजों के जरिये ही सप्लाई किया जाता है. जहाजों से की जाने वाली इसी सप्लाई को वॉर्टेक्सा अपनी स्टडी में शामिल करता है.

रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने से पहले रूस से पाइपलाइन के जरिये भेजे जाने वाले कच्चे तेल की हिस्सेदारी 30 फीसदी थी. इसमें से ज्यादातर यूरोप को जाता था जो अब घटकर ना के बराबर रह गया है. भारत मुख्य रूप से यूराल ग्रेड की खरीदारी करता है, जो ब्लैक सी के पोर्ट्स और भूमध्यसागर से भेजा जाता है.

अप्रैल-मई के दौरान भी रूस से तेल का आयात बढ़ा
रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंधों के बीच इस साल अप्रैल और मई के दौरान रूस से भारत में आयात 3.7 गुना बढ़ा है. इस दौरान भारत में रूस से आयात बढ़कर पांच अरब डॉलर हो गया, जिसमें कच्चे तेल की सबसे बड़ी हिस्सेदारी है. यह आयात 2021-2022 में रूस से किए गए कुल आयात का लगभग आधा है.

फरवरी में यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद से रूस से भारत में आयात साढ़े तीन गुना बढ़कर 8.6 अरब डॉलर हो गया. इस दौरान 2021 में रूस से भारत में आयात 2.5 अरब डॉलर था. वाणिज्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक, पेट्रोलियम के अलावा फर्टिलाइजर, खाद्य तेल जैसे अन्य उत्पादों का भी आयात बढ़ा है. कोकिंग कोयला और थर्मल कोयला के आयात में भी भारी वृद्धि देखी गई. बेशकीमती पत्थरों और हीरों का आयात घटा है.

जून में भी रूस से कच्चे तेल का आयात रिकॉर्ड स्तर पर
भारत में रूस से तेल का आयात जून महीने में रिकॉर्ड स्तर पर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जून में भारत ने रूस से प्रतिदिन लगभग 950,000 बैरल तेल का आयात किया.

ट्रेड सूत्रों की ओर से मुहैया कराए गए आंकड़ों के मुताबिक, भारत के कुल आयात में रूस के तेल की हिस्सेदारी बहुत अधिक हो गई है.

बीते 24 फरवरी को यूक्रेन पर हमले के बाद से अमेरिका और पश्चिमी देशों ने रूस पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगाए हुए हैं लेकिन भारत की तेल कंपनियां भारी छूट पर रूस का कच्चा तेल तेजी से खरीद रही हैं.

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