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महाविनाशक परमाणु मिसाइल से पल भर में तबाह हो सकता है पेइचिंग

दुनिया में मारक और घातक हथियारों की होड़ बढ़ती जा रही है। अमेरिका अपनी सुरक्षा और शक्तिशाली बने रहने की होड़ में एक महाविनाशक परमाणु मिसाइल को खरीदने वाला है। चीन और रूस से बढ़ते तनाव के बीच अमेरिका 100 बिलियन डॉलर का नया महाविनाशक हथियार खरीद रहा है। इस मिसाइल की ताकत जापान के हिरोशिमा पर गिराए गए परमाणु बम से लगभग 20 गुना ज्यादा होगी। यह महाविनाशक मिसाइल अमेरिका से लॉन्च होने के बाद चीन की राजधानी पेइचिंग को पल भर में बर्बाद कर देगी। अत्याधुनिक तकनीकी से बनी गाइडेड सिस्टम के कारण 10000 किलोमीटर दूर जा कर प्रहार करने में सक्षम है। यह मिसाइल पिन पॉइंट एक्यूरेसी के साथ अपने टॉरगेट को हिट करेगी।

अमेरिकी वायुसेना ने इस मिसाइल की 600 यूनिट के लिए ऑर्डर देने की योजना बनाई है। गत वर्ष 8 सितंबर को अमेरिकी वायुसेना ने हथियार निर्माता कंपनी कंपनी नॉर्थ्रॉप ग्रुम्मन को 13.3 बिलियन डॉलर का एक करार किया था।। इस मिसाइल की इंजिनियरिंग और मैन्यूफैक्चरिंग प्लांट बैठाने की प्रारंभिक लागत शामिल थी। ब्लूमबर्ग और आर्म्स कंट्रोल एसोसिएशन की रिपोर्ट में दावा किया है कि अमेरिका इस घातक हथियार को बनाने के लिए लगभग 100 बिलियन डॉलर का खर्च करने वाला है। इस हथियार का निर्माण साल 2029 तक होने की संभावना है। देश की सुरक्षा और अमेरिका के दुश्मनों की बढ़ती ताकत को देखते हुए पेंटागन ने इस डील को मंजूरी दी है। यह परमाणु मिसाइल पुरानी पड़ चुकी मिनटमैन तृतीय मिसाइलों के बेड़े से बदली जाएगी। अमेरिका के ग्राउंड-बेस्ड स्ट्रैटेजिक डिटरेंट के लिए इस मिसाइल का उपयोग किया जाएगा।

 

अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल श्रेणी की मिसाइल होने के कारण इसे जमीन के अंदर बने सुरक्षित मिसाइल ठिकानों में तैनात किया जाएगा। जहां से लॉन्चिंग के बाद यह दुनिया के किसी भी कोने में हमला करने में सक्षम होगी। इस मिसाइल का नामांकरण अभी तक नहीं हुआ है। संभावना जताई जा रही है कि एटलस, टाइटन और पीसकीपर जैसे अमेरिका के पुराने परमाणु मिसाइलों की तरह ही इसके नाम में भी शक्ति और शांति दोनों का समावेश होगा। अमेरिकी परमाणु मिसाइलों का उद्देश्य केवल हमले का जवाब देना नहीं होता है। अमेरिका की परमाणु नीति में यह भी लिखा हुआ है कि अगर दुश्मन उनके ऊपर परमाणु हमला करने की तैयारी कर रहा है तो वह पहले भी इस विध्वंसक मिसाइल को दाग सकते हैं। अमेरिका परमाणु हमले को रोकने के लिए अपनी परमाणु मिसाइल को दागने के लिए स्वतंत्र है।

बचाव के सिद्धांत के तहत अमेरिका के पास इस समय 3,800 से ज्यादा परमाणु बम और मिसाइलें हैं। परमाणु मिसाइलों की ताकत को बताना भी हर देश की एक सोची समझी रणनीति होती है। अमेरिका का साफ सिद्धांत है कि अगर हमारे ऊपर परमाणु हमला होता है तो हम इतनी जबरदस्त जवाबी कार्रवाई करेंगे कि वैसा पहले कभी नहीं हुआ होगा। कई लोग अमेरिका के इस सिद्धांत को सफल मानते हैं। यही कारण है कि अमेरिका के ऊपर आज से पहले किसी भी दुश्मन ने परमाणु मिसाइल नहीं दागी है। दुनिया की महाशक्ति अमेरिका के पास 3800 परमाणु हथियार हैं। ये परमाणु बम पूरी दुनिया को कई बार नष्ट कर सकते हैं। इन परमाणु हथियारों को ले जाने के लिए अमेरिका के पास 800 मिसाइले हैं। यह मिसाइलें दुनिया के किसी भी शहर को पलक झपकते ही तबाह कर सकती हैं।

दुनियाभर के देशों के पास मौजूद परमाणु हथियारों पर नजर रखने वाली संस्था सिपरी के मुताबिक अमेरिका ने 1750 परमाणु बमों को मिसाइलों और बमवर्षक विमानों में तैनात कर रखा है। इसमें से 150 परमाणु बम अमेरिका ने यूरोप में तैनात कर रखे हैं ताकि रूस पर नजर रखी जा सके। सिपरी का दावा है कि रूस और अमेरिका, दोनों ही अपने परमाणु हथियारों, मिसाइलों और डिलीवरी सिस्टम को आधुनिक बनाने के लिए व्यापक योजना चला रहे हैं। दक्षिण एशिया में चीन, भारत और पाकिस्तान अपनी रक्षा जरूरतों का ख्याल रखते हुए परमाणु परीक्षण कर चुके हैं। एशिया के रणनीतिक हालात के कारण केवल भारत ही नहीं, पाकिस्तान और चीन भी अपनी परमाणु क्षमता को बढ़ा रहे हैं। अनुमान है कि भारत के पास 130 से 140 और पाकिस्तान के पास 150 से 160 परमाणु हथियार हैं।

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