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मनुष्य अंधाधुंध दौड में अपने स्वाभाविक जीवन को छोडकर या तो भविष्य में जी रहा है या भूतकाल में, वर्तमान में तो उसको रहना ही नहीं आता है : आर्ट आफ लिविंग शिक्षक अकक्षत जोशी

रिपोर्ट :- गौरव सिंघल/शशांक जैन, विशेष संवाददाता,दैनिक संवाद,सहारनपुर मंडल,उप्र:।।
 
देवबंद (दैनिक संवाद न्यूज )। विश्व विख्यात संस्था आर्ट ऑफ लिविंग जिसका संचालन विश्व के 180 देशो में चल रहा है। एक जीवन जीने की इस कार्यशाला का छह दिवसीय आयोजन देवबंद नगर में रेलवे रोड स्थित दल्लो की धर्मशाला में किया जा रहा है। आज कार्यशाला के चौथे दिन आर्ट आफ लिविंग के  बैंगलौर आश्रम के वरिष्ठ शिक्षक अकक्षत जोशी,जो एक विश्व विख्यात सुमेरू सिंगर भी है, ने बताया कि आज की इस अति भौतिकवादी जिंदगी में ज्यादातर मानव समाज अपने निजी जीवन में सुख, शांति और स्वास्थ्य खोता जा रहा है। जो कि यह उसका प्राकृतिक अधिकार है।
अभी व्यक्ति अंधाधुंध दौड में अपने स्वाभाविक जीवन को छोडकर या तो भविष्य में जी रहा है या भूतकाल में, वर्तमान में तो उसको रहना ही नहीं आता हैऔर चिंता तो आज के जीवन में प्रत्येक व्यक्ति का एक अभिन्न अंग बन गया है और चिंता मुक्त जीवन का उपाय है अपनी स्वासों की गति को कुछ विशेष रूप से नियंत्रित करना। इन स्वासों की गति को कुछ विशेष रूप से नियंत्रित करने की एक विशेष क्रिया को ही सुदर्शन क्रिया कहते है। आज यह सुदर्शन क्रिया विश्व के 180 देशों में अपना सफलतापूर्वक संचालन कर रही है।
विश्व के करोडो लोग इस सुदर्शन क्रिया का अभ्यास कर रहे है। आज शिक्षक अकक्षत जोशी ने योग प्रणायाम और सुदर्शन के अभ्यास के साथ जीवन उपयोगी सूत्र दिए। उन्होंने बताया कि जो भी जीवन में कार्य करे  सजगतापूर्वक करे। तभी जीवन में पूर्णता आती है। उन्होंने एक विशेष सूत्र भी दिया कि मेरी खुशी मेरा निर्णय है। अगर ये सूत्र सभी लोग अपने-अपने जीवन में अपना लेंगे तो उन्हें जीवन की कोई भी परिस्थिति विचलित नहीं कर सकती। इस कार्यशाला का समापन 13 नवंबर को हो रहा है। इस कार्यशाला के समापन पर शाम के समय आर्ट आफ लिविंग परिवार एक भजन संध्या का आयोजन कर रहा है। जिसमें सभी समाज के लोगों को नि:शुल्क रूप से आमंत्रित कर रहे है। कार्यशाला में प्रमुख रूप से अमनदीप कौर, शशांक जैन, देवेश सिंघल, वैभव जैन, सार्थक जैन, सौरभ बंसल, सतीश गिरधर, राजेश सिंघल, डा.कांता सिंह, दीपक कुमार, गौरव, अंकित अग्रवाल, अभिनव वर्मा, रानी, अंजू, ऋषभ जैन, आलोक, अनुज आदि मौजूद रहे।

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