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भीषण हो सकती है यूक्रेन में जंग, अमेरिका देगा एडवांस जहाज रोधी मिसाइलें, रूस के जहाजों को डुबाने में करेंगी मदद

अमेरिका युद्ध से जूझ रहे यूक्रेन (Ukraine War) को मदद देने की हर संभव कोशिश कर रहा है. इस बीच खबर आई है कि व्हाइट हाउस (अमेरिकी राष्ट्रपति का कार्यालय) यूक्रेनी सैनिकों के हाथों में एडवांस एंटी-शिप मिसाइल देने के लिए काम कर रहा है. अमेरिका ये कदम ऐसे वक्त पर उठा रहा है, जब इस बात की चिंता जताई जा रही है कि अधिक घातक हथियार (Ukraine Weapons by US) रूस के युद्धपोतों को डुबा सकते हैं, जिससे ये जंग और तेज हो जाएगी. वहीं यूक्रेन इस युद्ध में पहले से तोप, स्टिंगर मिसाइल जैसे अन्य हथियारों का इस्तेमाल कर रहा है. और उसने साफ कहा है कि वह और अधिक उन्नत हथियार चाहता है.


अमेरिका के वर्तमान और पूर्व अधिकारी, साथ ही कांग्रेस से जुड़े सूत्रों का कहना है कि उनका देश लंबी दूरी तक मार करने वाले हथियार यूक्रेन को भेज रहा है लेकिन सड़कें ब्लॉक होने की वजह से इन्हें पहुंचाने में दिक्कत आ रही है. इसके साथ ही ऐसी भी आशंका है कि रूसी सैनिक रास्ते में अमेरिकी हथियारों पर कब्जा कर सकते हैं. हालांकि दो अमेरिकी अधिकारी और दो कांग्रेस के सूत्रों ने कहा कि दो तरह की शक्तिशाली एंट-शिप मिसाइल को यूक्रेन भेजने की बात हो रही है.

जेलेंस्की ने पुर्तगाल से की थी अपील

यूक्रेन को दी जाने वाली मिसाइलों में एक हार्पून है, जिसे बोइंग ने बनाया है. जबकि दूसरी नेवल स्ट्राइक मिसाइल है, जिसे कॉन्सबर्ग और रेथियोन टेक्नोलॉजी ने बनाया है. इन्हें या तो सीधे यूक्रेन भेजा जा सकता है, या फिर यूरोपीय सहयोगी के जरिए इन्हें भेजा जाएगा, इसपर फिलहाल चर्चा हो रही है. इससे पहले अप्रैल में यूक्रेन के राष्ट्रपति व्लोदिमीर जेलेंस्की ने पुर्तगाल से अपील की थी कि वह यूक्रेनी सेना को हार्पून मिसाइल मुहैया कराए, जिसकी रेंज कम से कम 300 किलोमीटर तक है. लेकिन ऐसे कई मुद्दे हैं, जिनके कारण यूक्रेन इन मिसाइल को हासिल नहीं कर पा रहा है.

इसकी एक वजह ये है कि इन मिसाइल को लॉन्च करने के लिए जैसे प्लैटफॉर्म की जरूरत है, उनकी उपलब्धता कम है. अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि वह संभावित उपायों पर काम कर रहे हैं. अमेरिकी अधिकारियों और कांग्रेस के सूत्रों का कहना है कि कुछ मुट्ठीभर देश यूक्रेन को हार्पून मिसाइन भेजना चाहते हैं लेकिन कोई भी इस काम को करने वाला पहला या अकेला देश नहीं बनना चाहता. इन्हें डर है कि अगर ये ऐसा करते हैं कि रूस के गुस्से का शिकार हो सकते हैं. क्योंकि अगर इनकी हार्पून मिसाइल से रूस का जहाज डूब जाता है, तो रूस भी इसका जवाब दे सकता है.

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