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पुरुषों की बढ़ती संख्या को देख इस देश की महिलाओं को मिल सकता है 2 से ज्यादा पति रखने का हक

हाल ही में कोरोना वायरस की भयंकर त्रासदी झेलने के बाद अब चीन में एक और नए संकट की खबर सामने आ रही है। क्योंकि चीन में अब अविवीहित पुरुषों की बढ़ती तादाद संकट का सबब बनती जा रही है। चीन में लैंग‍िक असमानता के चलते वहां के हालात बहुत खराब होते जा रहे है। रिपोर्ट्स के मुताबकि 2050 तक चीन में 3 करोड़ पुरुष अविवाहित रह जाएंगे। हालांकि चीन ने इस संकट का समाधान भी निकाल लिया है।

इस अधिकार से निकलेगा सामाजिक समस्या का हल

दरअसल चीन के एक प्रोफेसर ने अधिकारियों को एक क्रांतिकारी बदलाव करने का सुझाव दिया है जिसके मुताबिक सरकार को महिलाओं को दो या दो से ज्यादा पति रखने का अधिकार देना चाहिए। वहीं चीनी अर्थशास्त्री यी कांग एनजी ने बताया है कि महिलाओं को कुछ समय के लिए एक से ज्यादा पति रखने का अधिकार दे दिया जाए तो इस से सामाजिक समस्या का हल निकल सकता है। इसके साथ ही अर्थशास्त्री ने यह भी बताया कि अगर उनके इस सुझाव को अगल मान लिया जाता है तो देश में अविवाहित लोगों की बढ़ती तादाद को पत्नी और खुशी मिल सकती है। जानकारी के लिए आपको बता दें कि प्रोफेसर एनजी फूदान यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर हैं।

दुल्हन ढूंढना हो सकता है मुश्किल काम

चीन में बढ़ती अविवाहित पुरुषों की तादाद को देखते हुए प्रोफेसर एनजी ने बताया कि ऐसे संकट काल में बढ़ती प्रतिस्‍पर्धा की वजह से अविवाहित दूल्‍हों के लिए आने वाले समय में योग्‍य दुल्हन की तलाश करना काफी मुश्किल हो सकता है। जिसके तहत अधेड़ उम्र के अविवाहित व्‍यक्ति के लिए दुल्हन के दिल जीतने के लिए युवाओं से प्रतियोगिता करनी होगी। वह भी तब जब दुलहनों की तादाद बहुत कम है। एनजी ने बताया कि अगर पुरुष की स्‍वाभाविक जैविक और मनोवैज्ञानिक आवश्‍यकता ठीक ढंग से पूरी नहीं होगी तो इसका निश्चित रूप से इसका उनकी खुशी पर बुरा असर पड़ सकता है।

वेश्यावृति को कानूनी रूप दिए जाने की मांग

वहीं इस संकट से ऊभरने के लिए चीनी अर्थशास्त्री ने दो सुझाव दिए हैं। पहले सुझाव में चीनी अर्थशास्त्री ने बताया कि वेश्‍यावृत्ति को कानूनी रूप दिया जाए और दूसरा बहुविवाह प्रथा को मंजूरी मिले। जिसके तहत किसी भी महिला को कानूनी तरीके से दो या दो से ज्यादा पति रखने का हक दिया जा सके। वहीं चीन के कानून के मुताबिक अब तक सिर्फ एक शादी को ही मंजूरी दी गई है। हालांकि ये प्रथा तिब्बत में पहले से ही चली आ रही है।

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