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नहीं रहे रामायण में रावण का किरदार निभाने वाले अरविंद त्रिवेदी, इस वजह से हुई मौत

रामानंद सागर (Ramanand Sagar) की ‘रामायण’ (Ramayan) में रावण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता अरविंद त्रिवेदी (Arvind Trivedi) का निधन हो गया है. अरविंद 82 साल के थे. अरविंद त्रिवेदी ने मंगलवार रात को मुंबई में आखिरी सांस ली. अरविंद काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे. मंगलवार देर रात उन्हें हार्ट अटैक आया, जिसके बाद उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था. ईटाइम्स के मुताबिक, ये जानकारी अरविंद त्रिवेदी के भतीजे कौशतुभ त्रिवेदी द्वारा दी गई.

रिपोर्ट के मुताबिक, कौशतुभ ने अरविंद त्रिवेदी के निधन की दुखद खबर की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि काफी समय से उनकी तबीयत ठीक नहीं चल रही थी, लेकिन आज यानी मंगलवार को उन्हें दिल का दौरा पड़ा और इससे उनके कई अंगों ने काम करना बंद कर दिया. अरविंद त्रिवेदी का अंतिम संस्कार आज मुंबई के कांदिवली वेस्ट में स्थित दहानुकरवादी शमशान में होगा.

रावण की दमदार भूमिका से हुए अरविंद हुए थे लोकप्रिय

अरविंद त्रिवेदी को सबसे ज्यादा उनके द्वारा रामायण में निभाई गई रावण की भूमिका के लिए जाना जाता है. अरविंद त्रिवेदी ने रावण का इतना दमदार किरदार निभाया था कि उनके आगे बाकी सारे कलाकार टीवी पर आज भी फीके नजर आते हैं. वो कड़क आवाज और वो अकड़कर चलने का अंदाज आज भी लोगों को खूब पसंद है. रामायण जब भी टीवी पर आती है, तो दर्शक टक-टकी लगाए अपने चहेते रावण को देखने के लिए टीवी के सामने बैठ जाते हैं. अरविंद त्रिवेदी का रावण वाला किरदार इतना लोकप्रिय था कि हर कोई अभिनेता की तरह इस किरदार को जीने की कोशिश करता नजर आज भी राम लीला में नजर आता है.

भारतीय टेलीविजन के इस आइकॉनिक किरदार को निभाने के अलावा अरविंद त्रिवेदी ने कल्ट टीवी शो विक्रम और बेताल में भी अहम भूमिका निभाई थी. यही नहीं, अरविंद त्रिवेदी ने अपने एक्टिंग करियर के तीन दशक गुजराती सिनेमा को भी दिए. देश रे जोया दादा परदेश जोया, अरविंदा की सबसे लोकप्रिय गुजराती फिल्मों से एक है. अरविंद त्रिवेदी के भाई उपेंद्र भी गुजराती सिनेमा का एक जाना माना नाम हैं.

त्रिमूर्ति जैसी फिल्मों में नेगेटिव किरदार निभाकर बॉलीवुड में फेमस होने वाले अरविंद त्रिवेदी राजनीति से भी जुड़े थे. अरविंद, गुजरात के साबरकाठा से 1991 में भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सांसद बने थे. 1991 से लेकर 1996 तक वह सासंद रहे. 2002 और 2002 में वह केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष के रूप में भी नियुक्त हुए थे.

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