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चीन के लिए बड़ा खतरा साबित होगी ब्रह्मोस मिसाइल, ड्रैगन के दुश्मन ने जताई खरीदने की इच्‍छा

फिलीपींस ने भारत के साथ दुनिया की सबसे खतरनाक ब्रह्मोस सुपरसोनिक मिसाइल की खरीद के लिए डील साइन कर ली है. फिलीपींस के रक्षा विभाग में अंडर-सेक्रेटरी रेमुंडो एलफांते ने भारत के राजदूत शंभू कुमारन के साथ फिलीपींस की सेनाओं के हेडक्‍वार्टर कैंप एग्‍यूइनालडो में यह डील साइन की है. जो लोग यह समझ रहे हैं कि यह बस एक मिसाइल की मामूली सी दिखने वाली है डील है तो ऐसा नहीं है. आपको बता दें अभी थोड़े ही दिन पहले पाकिस्‍तान के राष्‍ट्रपति आरिफ अल्‍वी ने कहा था कि उन्‍हें भारत की इस मिसाइल से डर लगता है.

चीन के लिए साबित होगी बड़ा खतरा

फिलीपींस और चीन साउथ चाइना सी पर आमने-सामने हैं और ऐसे में भारत और रूस की तरफ से तैयार यह मिसाइल चीन के लिए सबसे बड़ा खतरा साबित हो सकती है. पिछले वर्ष रूस ने भारत सरकार के उस अनुरोध को मान लिया था जिसके तहत सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस को किसी तीसरे देश को सुरक्षा जरूरतों को ध्‍यान में रखते हुए निर्यात की मंजूरी मांगी गई थी. फिलीपींस और चीन पिछले वर्ष अगस्‍त में साउथ चाइना सी पर आमने-सामने थे. 24 अगस्‍त 2020 को फिलीपींस के रक्षा मंत्री डेफिल लॉरेन्‍जाना ने चीन पर आरोप लगाया था कि उसने साउथ चाइना सी पर फिलीपींस की सीमा पर गैर-कानूनी रूप से कब्‍जा कर लिया है.

फिलीपींस और चीन के बीच साउथ चाइना सी पर स्‍कारबोर्घ शोआल को लेकर कई दशकों से विवाद जारी है. विवाद इतना बढ़ गया था कि फिलीपींस के विदेश मंत्रालय की तरफ से इसे लेकर चीन के सामने विरोध प्रदर्शन तक दर्ज कराया गया था.

दुनिया के 70 देशों को चाहिए ब्रह्मोस

फिलीपींस से पहले वियतनाम ने भी इस मिसाइल को खरीदने की इच्‍छा जताई है. न सिर्फ फिलीपींस और वियतनाम बल्कि दुनिया के 70 देश इस मिसाइल को अपनी सेनाओं में शामिल करने के इच्‍छुक हैं. इनमें से ज्‍यादातर वो देश हैं जो चीन की बढ़ती आक्रामकता से परेशान हो चुके हैं.

वियतनाम और फिलीपींस के अलावा ब्राजील, चिली, साउथ कोरिया, अल्‍जीरिया, ग्रीस, साउथ अफ्रीका, मलेशिया, थाइलैंड, इजिप्‍ट, सिंगापुर और बुल्‍गारिया समेत दुनिया के कई देश इस मिसाइल को खरीदना चाहते हैं. चीन से परेशान तटीय देशों ने करीब एक दशक पहले ही भारत से आग्रह किया था कि वह उन्हें ब्रह्मोस मिसाइल दे.

सऊदी अरब और UAE ने भी जताई इच्‍छा

चीन से परेशान देशों के अलावा खाड़ी देश भी अब इस मिसाइल को हासिल करना चाहते हैं. दिसंबर 2020 में जब इंडियन आर्मी चीफ जनरल एमएम नरवाणे यूनाइटेड अरब अमीरात (यूएई) और सऊदी अरब के 4 दिनों के दौरे पर गए थे तो इस मिसाइल का जिक्र हुआ था.

यूएई, सऊदी अरब और कतर ने इस मिसाइल को खरीदने की इच्‍छा जताई है. फिलहाल इन देशों के साथ ब्रह्मोस की डील पर चर्चा जारी है और यह अभी शुरुआती दौर में है. ब्रह्मोस मिसाइल का जमीन से हवा में मार कर सकने वाले वर्जन को मई 2020 में चीन के साथ शुरू हुए टकराव के बाद लाइन ऑफ एक्‍चुअल कंट्रोल (एलएसी) पर तैनात किया गया था. 15 जून को जब गलवान घाटी में हिंसा हुई थी तो सेना को ब्रह्मोस मिसाइल तैनात करने की मंजूरी मिल गई थी.

लॉन्‍च होने के बाद रोकना मुश्किल

इसके बाद सुपरसोनिक मिसाइल को पूर्वी और पश्चिमी बॉर्डर पर तैनात किया गया था. दुनिया की सबसे तेज इस मिसाइल को लॉन्‍च होने के बाद रोक पाना किसी भी मिसाइल डिफेंस सिस्‍टम के लिए असंभव है. इस मिसाइल को इंडियन एयरफोर्स (आईएएफ) की तरफ से इसकी क्षमताओं के लिए तालियां मिल चुकी हैं. ब्रह्मोस को अब सुखोई से लेकर तेजस जैसे फाइटर जेट से भी लॉन्‍च किया जा सकता है. यह भारत की पहली स्‍वदेशी मिसाइल है. साल 2016 में केंद्र सरकार की तरफ से इस मिसाइल की एक नई रेजीमेंट को तैयार करने और फिर उसे चीन के नजदीक अरुणाचल प्रदेश में तैनात करने की मंजूरी दी गई थी.

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