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‘चिराग’ तले बगावत : चाचा बनाम भतीजे में टूट गयी लोक जनशक्ति पार्टी, पांच सांसदों के साथ एनडीए में गये पारस

दिवंगत नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी में रार बढ़ने के साथ ही दो-फाड़ हो गई है। रामविलास पासवान के भाई पशुपति पारस ने पांच सांसदों को साथ लेकर अब पार्टी पर अपना अधिकार घोषित कर दिया है। पांच सांसदों के अलग होने पर चिराग पासवान अब अलग-थलग हो गए हैं। बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव हुआ है। लोक जनशक्ति पार्टी टूट चुकी है। सोमवार सुबह पशुपति पारस ने प्रेसवार्ता के दोरान कहा कि हमारे भाई चले गए, हम अकेला महसूस कर रहे हैं। पार्टी की बागडोर जिनके हाथ में गया, तब सभी लोगों की इच्छा थी 2014 में और इस बार भी हम एनडीए के साथ बने रहें। लोक जनशक्ति पार्टी बिखर रही थी और असमाजिक तत्व चले आ रहे थे। एनडीए से गठबंधन को तोड़ दिया और कार्यकर्ताओं की नहीं सुनी गई। ऐसे में लोक जनशक्ति पार्टी का नुकसान हुआ।

 

उन्होंने कहा कि हमारी पार्टी के पांच सांसदों की इच्छा थी कि पार्टी को बचाना जरूरी है। पारस ने कहा कि मैंने पार्टी तोड़ी नहीं है, पार्टी को बचाया हैं। जब तक मैं जिंदा हूं, पार्टी को जिंदा रखेंगे। उन्होंने कहा कि मुझे चिराग पासवान से कोई दिक्कत नहीं है। अभी भी वास्तविक पार्टी लोक जनशक्ति पार्टी ही है। चिराग अभी तक पार्टी के अध्यक्ष हैं लेकिन अब वह हमारे साथ आना चाहें तो आ सकते हैं। जनता दल (यू) के साथ जाने की बातों पर पशुपति पारस ने कहा कि मैं शुरुआत से एनडीए के साथ रहा हूं और एनडीए के साथ ही रहेंगे।

पशुपति पारस ने कहा कि वह नीतीश कुमार को एक अच्छा नेतृत्वकर्ता मानते हैं। नीतीश विकास पुरुष हैं। पशुपति पारस द्वारा बीते दिन लोकसभा स्पीकर ओम बिड़ला को चिट्ठी लिख पांचों सांसदों को अलग मान्यता देने की मांग किये थे। साथ ही खुद को पार्टी लीडर बताया था। पशुपति पारस का कहना है कि वह स्पीकर के जवाब का इंतजार कर रहे हैं। लोक जनशक्ति पार्टी ने बिहार के विधानसभा चुनाव से पहले एनडीए से खुद को अलग कर लिया था। ज्ञात हो कि विधानसभा चुनाव में पार्टी ने कोई खास प्रदर्शन नहीं किया। अब पशुपति पारस बड़ी भूमिका में नजर आ रहे हैं।

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