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काशी विश्वनाथ-ज्ञानवापी मस्जिद मामला : सर्वे टीम का काम रुका, भड़काऊ नारेबाजी में 1 अरेस्‍ट

वाराणसी (Varanasi) के काशी विश्वनाथ (Kashi Vishwanath) और ज्ञानवापी मस्जिद (Gyanvapi Mosque) परिसर में स्थित श्रृंगार गौरी समेत कई विग्रहों के सर्वे (survey) को लेकर हंगामा मचा हुआ है. जब से सर्वे की कार्रवाई शुरू हुई है, तब से विरोध प्रदर्शन जारी है. इस कार्रवाई को जहां AIMIM के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कानून का उल्लंघन करने वाला बताया. वहीं, मुस्लिम पक्ष ने कोर्ट कमिश्नर पर पक्षपात का आरोप लगाते हुए उन्हें हटाने की मांग की है.

दूसरी तरफ, ज्ञानवापी मस्जिद में आज दूसरे दिन सर्वे नहीं हो सका. हिंदू पक्ष के वकीलों का दल सर्वे के लिए मौके पर पहुंचा था लेकिन उसे अंदर जाने से रोक दिया गया. इसके बाद हिंदू पक्ष के वकील काशी विश्वनाथ धाम परिसर से ही वापस लौट गए. इससे पहले ये जानकारी सामने आई थी कि सर्वे शुरू हो गया है. कहा ये भी जा रहा था कि हरिशंकर जैन और विष्णु जैन ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में दाखिल हो गए हैं. इनके साथ वीडियोग्राफर और फोटोग्राफर भी मस्जिद परिसर में गए हुए हैं. अब ये जानकारी सामने आई है कि सर्वे के लिए टीम को मस्जिद में प्रवेश करने से रोक दिया गया.

हिंदू पक्ष के वकीलों का दावा है कि सर्वे के लिए जब टीम ज्ञानवापी मस्जिद पहुंची, वहां बड़ी संख्या में जुटे मुस्लिम समुदाय के लोगों ने टीम को अंदर जाने से रोक दिया. वकीलों ने कहा है कि वे अब अपना पक्ष 9 मई को होने वाली सुनवाई के दौरान कोर्ट में रखेंगे. दूसरी तरफ, पुलिस ने हंगामा करने के मामले में एक आरोपी को गिरफ्तार भी किया है. गिरफ्तार आरोपी का नाम अब्दुल सलाम बताया जा रहा है. वह चंदौली जिले के मुगलसराय थाना क्षेत्र के दुलहीपुर का निवासी है.

बताया जाता है कि बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की भीड़ थी कि अचानक पांच से छह लोग भीड़ में आकर नारेबाजी करने लगे. इससे मौके पर भगदड़ की स्थिति बन गई. पुलिसकर्मियों ने इनमें से अब्दुल सलाम को पकड़ लिया जबकि अन्य भीड़ का फायदा उठाकर भाग निकलने में सफल रहे. गौरतलब है कि प्रतिवादी अंजुमन इंतजामियां मस्जिद कमेटी की ओर से कोर्ट कमिश्नर को हटाने की मांग वाला प्रार्थना पत्र सिविल जज सीनियर डिविजन के कोर्ट में पेश किया गया. मुस्लिम पक्ष का आरोप है कि कोर्ट कमिश्नर की ओर से पक्षपात किया जा रहा है.

 

 

 

प्रार्थना पत्र में मांग की गई कि कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को हटाकर माननीय न्यायालय स्वयं या उनकी जगह किसी दूसरे वरिष्ठ वकील को वकील कमिश्नर नियुक्त करे, ताकि निष्पक्ष न्याय हो. इस मामले में कोर्ट ने सुनवाई का समय 2 बजे तय किया है.

9 मई को होगी अगली सुनवाई
बता दें कि मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर सुनवाई करने के बाद कोर्ट ने फैसला सुरक्षित रख लिया है. मामले की अगली सुनवाई 9 मई को होगी. कोर्ट ने सर्वे रोकने को लेकर कोई आदेश नहीं दिया है. दरअसल, कोर्ट कमिश्नर को हटाने की मुस्लिम पक्ष की अर्जी पर सुनवाई के बाद फिलहाल सर्वे का काम जारी रहेगा. अभी अजय मिश्रा ही सर्वे करेंगे.

ये भी कहा गया था प्रार्थना पत्र में
प्रार्थना पत्र में ये भी कहा गया है कि सूर्यास्त के बाद वकील कमिश्नर मस्जिद के अंदर जाने की जिद कर रहे थे, जबकि ऐसा कोई आदेश माननीय न्यायालय ने नहीं दिया है.

दोनों पक्षों ने की थी जमकर नारेबाजी
बता दें कि सर्वे वाराणसी के सीनियर जज डिविजन के आदेश पर हो रहा है. शुक्रवार को जब सर्वे करने के लिए टीम यहां पहुंची तो दोनों पक्षों की ओर से जमकर नारेबाजी की गई थी. काशी विश्वनाथ मंदिर और ज्ञानवापी मस्जिद के परिसर में आज भी वीडियोग्राफी होनी है.

सर्वे को लेकर क्या बोले केंद्रीय मंत्री?
वहीं केंद्रीय मंत्री कौशल किशोर ने कहा कि मस्जिद परिसर में भी सर्वे होना चाहिए. किसी को उस पर शक नहीं करना चाहिए. साथ ही कहा कि जब सर्वे किया जा रहा है, तो परिसर में सर्वे क्यों नहीं होगा. वैसे भी ज्ञानवापी शब्द कोई उर्दू का शब्द नहीं है. यह मंदिर है या मस्जिद के फैसला अदालत करेगी.

क्या है पूरा मामला
काशी विश्वनाथ मंदिर और उसी परिक्षेत्र में स्थित ज्ञानवापी मस्जिद का केस भले ही वर्ष 1991 से वाराणसी के स्थानीय अदालत में चल रहा हो और फिर हाईकोर्ट के आदेश के बाद मामले की सुनवाई इलाहाबाद हाईकोर्ट में चल रही हो, लेकिन मां श्रृंगार गौरी का केस महज साढ़े 7 महीने ही पुराना है. 18 अगस्त 2021 को वाराणसी की पांच महिलाओं ने बतौर वादी वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन की अदालत में श्रृंगार गौरी मंदिर में रोजाना दर्शन-पूजन की मांग सहित अन्य मांगों के साथ एक वाद दर्ज कराया था, जिसको कोर्ट ने स्वीकार करते हुए न केवल मौके की स्थिति को जानने के लिए वकीलों का एक कमीशन गठित करने अधिवक्ता कमिश्नर नियुक्त करने और तीन दिन के अंदर पैरवी का आदेश दिया था. विपक्षियों को नोटिस जारी करने के साथ ही सुनवाई की अगली भी तय कर दी थी, लेकिन दो-दो बार कोर्ट कमिश्नर के बैकफुट पर चले जाने के चलते विवादित स्थल का मौका मुआयना नहीं हो सका था.

अगली सुनवाई 10 मई को होगी
वाराणसी के सिविल जज सीनियर डिवीजन फास्ट ट्रैक के जज रवि कुमार दिवाकर ने अपने पुराने 18 अगस्त के ही आदेश को दोहराते हुए बीते 8 अप्रैल को कोर्ट कमिश्नर अजय कुमार मिश्रा को नियुक्त करते हुए कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई करने की फिर से अनुमति दे दी थी. इसके बाद प्रतिवादियों में से वाराणसी जिला प्रशासन और कमिश्नरेट पुलिस ने आपत्ति दर्ज कराते हुए कार्रवाई को रोकने के लिए सुरक्षा व्यवस्था और मस्जिद में मुस्लिमों और सुरक्षाकर्मियों के ही जाने की दलील दी थी, जिसपर कोर्ट ने सुनवाई के बाद दलील को खारिज करते हुए अपने पुराने आदेश के जारी रखते हुए ईद के बाद कमीशन और वीडियोग्राफी की कार्रवाई करके 10 मई के पहले तक रिपोर्ट मांगी है और सुनवाई की तारीख भी 10 मई नियत कर दी है.

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