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कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव की ‘निष्पक्षता’ पर पार्टी के सांसदों को ही भरोसा नहीं !

कांग्रेस में अगले महीने राष्रीय अध्यक्ष पद का चुनाव प्रस्तावित है, मगर इस बीच पार्टी के ही सांसद इसकी प्रक्रिया पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कांग्रेस के पांच सांसदों ने अध्यक्ष पद के चुनाव में पारदर्शिता, निष्पक्षता को लेकर चिंता प्रकट की है। चिंता जाहिर करने वालों में मनीष तिवारी, शशि थरूर, कार्ति चिदंबरम, प्रद्युत बोरदोलोई, अब्दुल खलीक का नाम शामिल है। इन सांसदों ने पार्टी के केंद्रीय निर्वाचन प्राधिकरण के अध्यक्ष मधुसूदन मिस्त्री को चिट्ठी भी लिखी है। मधुसूदन मिस्त्री को शशि थरूर पहले भी ऐसा खत लिख चुके हैं।

गौरतलब है कि मनीष तिवारी ने भी कांग्रेस संगठन चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल खड़े किए थे। उन्होंने कहा था कि मतदाता सूची के बगैर कांग्रेस अध्यक्ष पद के निष्पक्ष चुनाव कैसे होंगे? उन्होंने मांग करते हुए कहा कि निष्पक्ष चुनाव के लिए पार्टी के मतदाता का नाम-पता छापा जाना चाहिए।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस के पांच सांसदों ने अब खत में लिखा है कि अध्यक्ष पद के चुनाव में वोटर, प्रत्याशी, सभी 28 कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष (PCC), 9 केंद्र शासित के पास जाकर इलेक्टोरल रोल (मतलब कौन वोट डालेगा) को वेरिफाई नहीं कर सकते। आगे लिखा गया है कि ऐसी लिस्ट वोटर और प्रत्याशी को उपलब्ध कराई जानी चाहिए जिसमें PCC के डिलिगेट्स और इलेक्टोरल कोलाज (वोट डालने वाले लोगों की लिस्ट) के नाम हों। पत्र में कहा गया है कि इससे अनुचित मनमानी नहीं हो पाएगी।

 

 

मिस्त्री को 6 सितंबर को लिखे संयुक्त पत्र में कांग्रेस के लोकसभा सांसद शशि थरूर, कार्ति चिदंबरम, प्रद्युत बोरदोलोई और अब्दुल खलीक ने कहा है कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि वोटर लिस्ट जारी करने की उनकी मांग को गलत तरीके से पेश किया जा रहा है। सांसदों ने अपने पत्र में लिखा कि, ‘हम यह सुझाव नहीं दे रहे हैं कि पार्टी के किसी भी आंतरिक दस्तावेज को इस प्रकार से जारी किया जाना चाहिए, जिससे उन लोगों को मौका मिल सके जो इस जानकारी का दुरूपयोग करना चाहते हैं।’

मिस्त्री को लिखे कांग्रेस सांसदों के पत्र में कहा गया है कि, ‘हमारा दृढ़ मत है कि नामांकन प्रक्रिया आरंभ होने से पहले पार्टी के केंद्रीय निर्वाचन प्राधिकरण (CEA) को प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) के प्रतिनिधियों की एक लिस्ट प्रदान करनी चाहिए जो निर्वाचक मंडल बनाते हैं।’  सांसदों ने कहा कि यह सूची मुहैया कराई जानी चाहिए, ताकि यह सत्यापित किया जा सके कि कौन प्रत्याशी नामित करने और कौन वोट देने का हकदार है। उन्होंने कहा कि, ‘अगर CEA को सार्वजनिक रूप से वोटर लिस्ट जारी करने के संबंध में कोई समस्या है, तो उसे सभी मतदाताओं और संभावित उम्मीदवारों के साथ इस जानकारी को सुरक्षित तौर पर साझा करने के लिए एक तंत्र स्थापित करना चाहिए।

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