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अलविदा 2022: भारत बना दुनिया की 5वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था बाला देश

वर्ष 2022 का आज आखिरी दिन है और कुछ ही घंटे में दुनिया (World) नए साल यानी 2023 का स्वागत (Welcome) करती नजा आएगी । नए साल (New year) में दुनिया कई लक्ष्यों को हासिल (world achieve many goals) करने की दिशा में कदम बढ़ाएगी तो कई नए कीर्तिमान रचे जाएंगे।

भारत अर्थव्यवस्था (India economy) के मामले में ब्रिटेन और फ्रांस को पीछे छोड़ दुनिया में 5वें नंबर पर आ गया है। अमेरिकी थिंक टैंक वर्ल्ड पॉपुलेशन रिव्यू ने 2019 की रिपोर्ट जारी की है। इसके मुताबिक भारत की जीडीपी (GDP) पिछले साल 2.94 लाख करोड़ डॉलर (209 लाख करोड़ रुपए) के स्तर पर पहुंच गई। ब्रिटेन 2.83 लाख करोड़ डॉलर की इकोनॉमी के साथ छठे और फ्रांस 2.71 लाख करोड़ डॉलर के साथ 7वें नंबर पर रहा। 2018 में भारत 7वें नंबर पर था। ब्रिटेन की 5वीं और फ्रांस की छठी रैंक थी।

वहीं साल 2022 में भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) ने कोरोना महामारी (Covid-19) के बाद अच्छी वापसी की है और अभी भी सबसे तेजी से ग्रोथ करने वाली इकोनॉमी (Fastest Growing Economy) है। वैश्विक आर्थिक मंदी (Global Recession) जैसी चुनौतियों का भी अच्छे से सामना करने के लिए भारत की अर्थव्यवस्था तैयार है, हालांकि इसके बाद भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (PM Modi) के 5 ट्रिलियन डॉलर वाली इकोनॉमी (5 Trllion Dollar Economy) के सपने को सच बनाने की राह में कई चुनौतियां हैं।

साल 2022 को अलविदा कहने से पहले उन ऐतिहासिक मील के पत्थरों पर एक नजर डाल लेते हैं, जिन्हें दुनिया ने मिलकर इस साल हासिल किया। आर्थिक मोर्चे पर मुश्किल हालात से गुजरते हुए वैश्विक अर्थव्यवस्था (Global Economy) ऐतिहासिक आंकड़े के पार पहुंची। पृथ्वी पर मानव की आबादी भी एक बड़े नंबर के पार पहुंची. भारतीय अर्थव्यवस्था (Indian Economy) ने भी छलांग लगाई।

दुनिया की टॉप-10 अर्थव्यवस्था
रैंक देश जीडीपी (बिलियन डॉलर में)
1 अमेरिका $25,035.2
2 चीन $18,321.2
3 जापान $4,300.6
4 जर्मनी $4,031.1
5 भारत $3,468.6
6 ब्रिटेन $3,198.5
7 फ्रांस $2,778.1
8 कनाडा $2,200.4
9 रूस $2,133.1
10 इटली $1,997.0

पांच देशों की हिस्सेदारी आधे से अधिक

आंकड़े के अनुसार, 2022 में पूरी दुनिया की ग्रॉस डोमेस्टिक प्रोडक्ट (GDP) में आधे से अधिक हिस्सा सिर्फ पांच देशों- अमेरिका, चीन, जापान, जर्मनी और भारत का है. दिलचस्प बात ये है कि भारत ने इस साल ब्रिटेन को पीछे छोड़ते हुए दुनिया की टॉप पांच अर्थव्यस्थाओं में अपनी जगह बनाई है। अगर दुनिया की टॉप पांच अर्थव्यवस्थाओं की जीडीपी को जोड़ दें, तो ये 55,156.7 बिलियन डॉलर होगी और दुनिया की कुल जीडीपी 101,559.3 ट्रिलियन डॉलर है। ऐसे में ग्लोबल जीडीपी में इन पांचों देशों की हिस्सेदारी आधे से भी अधिक है।

ग्लोबल जीडीपी में टॉप-10 देशों की हिस्सेदारी
टॉप-10 में शामिल अन्य पांच देशों- ब्रिटेन, फ्रांस, कनाडा, रूस और इटली की जीडीपी को जोड़ दें, तो ग्लोबल जीडीपी में शीर्ष-10 अर्थव्यवस्थाओं की हिस्सेदारी 66 फीसदी बनती है. वहीं, टॉप-25 अर्थव्यवस्थाओं की ग्लोबल जीडीपी में हिस्सेदारी 84 फीसदी तक पहुंचती है.

सबसे छोटी जीडीपी
तुवालु (Tuvalu) के जीडीपी का आकार 64 मिलियन डॉलर है और ये दुनिया की सबसे छोटी जीडीपी है. तुवालू उन एक दर्जन देशों में से एक है, जिसकी जीडीपी एक अरब डॉलर से कम है.

2023 में वैश्विक अर्थव्यवस्था
2023 की ओर बढ़ते हुए वैश्विक आर्थिक मोर्चे पर बहुत अधिक अनिश्चितता नजर आ रही है। एक्सपर्ट्स ग्लोबल आर्थिक मंदी की आशंका जता रहे हैं। अमेरिकी फेडरल रिजर्व का ब्याज दरों को लेकर आक्रामक रुख और चीन में कोविड की वजह से खराब होते हालात दुनिया को आर्थिक मंदी की तरफ धकेल सकते हैं। हालांकि, अभी पूरी तरह कुछ भी साफ नहीं, लेकिन ये सच जरूर है कि 2023 वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए अहम साल साबित होने वाला है।

ये चुनौतियां हैं-
निवेश में तेजी लाना, उत्पादकता में बढ़ोतरी, शिक्षा व स्वास्थ्य के मोर्चे पर बेहतर परिणाम, रोजगार सृजन, कृषि की उत्पादकता बढ़ाना, मैक्रोइकोनॉमिक स्टेबिलिटी को बनाए रखना, ग्लोबल मेगा ट्रेंड को अच्छे से मैनेज करना और गवर्नेंस में सुधार लाना।

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