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अगर आप भी चाहती हैं नॉर्मल डिलीवरी तो प्रेगनेंसी के समय करें बद्ध कोणासन, मां और बच्‍चा दोनों होंगे स्‍वस्‍थ

 अक्‍सर महिलाओं के मन में प्रेगनेंसी के आखिरी महीने या हफ्तों में शरीर को लेबर के लिए तैयार करने के तरीकों के बारे में जानने का ख्‍याल जरूर आता है। इस समय एक्टिव रहने और लो इंटेंसिटी एक्‍सरसाइज से आप काफी हद तक नॉर्मल डिलीवरी की संभावना को बढ़ा सकती हैं। लेकिन कुछ योगासन ऐसे हैं जो नॉर्मल डिलीवरी के चांसेस को काफी हद तक बढ़ा देते हैं, इनमें से एक है बद्ध कोणासन।

बद्ध कोणासन को कॉब्‍लर पोज भी कहते हैं। इस योगासन से पेल्विस को खोलने में मदद मिलती है और डिलीवरी के लिए कूल्‍हों के जोड़ ढीले होते हैं। आइए जानते हैं प्रेगनेंसी में बद्ध कोणासन करने के फायदों और इस आसन को करने के तरीके के बारे में।

बद्ध कोणासन के लाभ
इस आसन को करने से शरीर में रक्‍त प्रवाह में सुधार आता है। किडनी, प्रोस्‍टेट ग्‍लैंड, मूत्राशय, गर्भाशय और पेट के अंदरूनी अंग इस आसन से एक्टिव होते हैं। यह आसन जांघों और कूल्‍हों की मांसपेशियों में लचीलापन लाता है। इस आसन की मदद से साइटिका के दर्द से भी राहत पाई जा सकती है।
बद्ध कोणासन प्रेगनेंट महिला के शरीर में लचीलापन लाता है जिससे डिलीवरी के समय मदद मिलती है। यह शरीर को एक्टिव रखता है जिससे नॉर्मल डिलीवरी की संभावना बढ़ती है। डिलीवरी के समय पेल्विस और इससे जुड़ी मांसपेशियों और लिगामेंट पर बहुत दबाव पड़ता है इसलिए बद्ध कोणासन इन हिस्‍सों को लचीला बनाता है। इससे डिलीवरी के बाद होने वाली समस्‍याओं को भी कम किया जा सकता है।

काब्‍लर पोज कमर को सीधी रखता है और पोस्‍चर में सुधार लाने में मदद कर सकता है जिससे कमर दर्द में आराम मिल सकता है। प्रेगनेंसी की तीसरी तिमाही में कमर दर्द बहुत परेशान करता है और बद्ध कोणासन इस दर्द से छुटकारा दिला सकता है।

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बद्ध कोणासन करने का तरीका

  • इस आसन को करने के लिए सबसे पहले दंडासन की स्थिति में बैठ जाएं।
  • दोनों पैरों को घुटनों से मोड़कर जमीन पर रखें, इस समय आपके दोनों पैरों के तलवे आपस में मिले होने चाहिए।
  • हाथों की उंगलियों को एक-दूसरे में फंसाकर पैरों के नीचे रखें।
  • कमर को सीधा रखें और छाती बाहर की ओर होनी चाहिए।
  • कुछ देर इसी अवस्‍था में रहकर गहरी सांस लेने का अभ्‍यास करें।
  • धीरे-धीरे सांस अंदर लें और फिर बाहर छोड़ें।
  • प्रेगनेंट महिलाएं बीच-बीच में पैरों को ऊपर डइाकर रिलैक्‍स कर सकती हैं।
  • इसके बाद दोनों पैरों को ऊपर हवा में उठाएं और फिर नीचे लाएं। इसमें आपके पैर तितली के पंखों की तरह ऊपर नीचे होते हैं।

सावधानियां
इस आसन को एक बार में दो से तीन मिनट से ज्‍यादा न करें।
घुटनों या पैरों में तेज दर्द होने पर यह आसन करने से बचें।
अगर आपका वजन ज्‍यादा है तो पहले एक पैर से प्रैक्टिस करें और फिर दूसरे से।
प्रेगनेंट महिलाएं बद्ध कोणासन करने से पहले एक बार डॉक्‍टर से सलाह जरूर लें।जिनके घुटनों में दर्द या चोट हो उन्हे बद्ध कोणासन नहीं करना चाहिए।
जिन लोगों को ग्राय्न में, या साइटिका की परेशानी हो, या कमर में चोट हो तो उन्हे बद्ध कोणासन नहीं करना चाहिए।

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