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मोदी के रामराज्य में सुरसा बनी महंगाई!

रिपोर्ट : कृष्ण कुमार द्विवेदी बाराबंकी :

भाजपा एवं मोदी के रामराज्य में सुरसा की तरह बढ़ती जा रही महंगाई ने कोहराम मचा रखा है। गरीब आदमी की थाली में नमक रोटी बची है? सरसों का तेल दूर जा चुका है! सिलेंडर, पेट्रोल-डीजल की कीमतें उफान पर हैं। मध्यमवर्गीय वर्ग पर कड़ी मार है। कोरोना से जूझ रहे लोगों का महंगाई ने गरीबी में आटा गीला कर रखा है। लेकिन फिर भी देश में बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं। जाहिर है कि मोदी राज में भाइयों एवं बहनों का बुरा हाल है। फिलहाल सरकार मस्त है। विपक्ष पस्त है। जनता त्रस्त है! जबकि भाजपाई सुशाशन में महंगाई खाए जात है? जी हाँ चबाए जात है?

देश की मोदी सरकार देश में राष्ट्रवाद को मजबूती प्रदान कर रही है। यह सही बात है! विश्व स्तर पर देश का पक्ष मजबूती से रख रही है यह भी अच्छी बात है। लेकिन जिस तरह से देश में महंगाई बढ़ती जा रही है और सरकार इस पर अंकुश नहीं लगा पा रही है यह बुरी बात है? जी हां आज प्रधानमंत्री मोदी जी के भाइयों एवं बहनों का महंगाई के चलते देश में बुरा हाल है। घर की रसोइयों का बजट बिगड़ चुका है। गरीब की थाली से सरसों का तेल छिटक कर दूर खड़ा हुआ है।

दाल- रोटी की बात करें तो रोटी ही बची है दाले भी आंखें दिखा रही हैं। चाय की पत्ती ने भी अपना वजन बढ़ाते हुए मध्यम वर्ग एवं गरीब वर्ग को सताना जारी कर रखा है। डीजल हो या पेट्रोल अथवा सिलेंडर हो इसके बढ़ते दामों ने आम आदमी की कमर पर करारा प्रहार किया है। सरकार के समर्थक कितना भी राम भजन की बात करें लेकिन उन्हें यह समझना होगा कि भूखे पेट व्यक्ति भजन भी नहीं कर सकता! इसलिए जरूरी है कि महंगाई पर भाजपा सरकार एवं भाजपा के बड़े नेता चेते।

देश में महंगाई ने अपना आकार सुरसा की तरफ बढ़ाया है। यदि पेट्रोलियम पदार्थों में गैस सिलेंडर की बात करें तो घर की रसोई का यह प्रमुख संसाधन महंगाई की चपेट में है। रसोई गैस सिलेंडर के दाम लगातार बढ़ रहे हैं बीती 4 फरवरी को सिलेंडर में 25 बढ़ाए गए थे। लेकिन वर्तमान में 14.2 किलोग्राम के सिलेंडर में अब 50 बढ़ा दिए गए हैं। अर्थात अब 757 का गैस सिलेंडर 807 में मिलेगा ।वही छोटू सिलेंडर अब 279 रु 50 पैसे की जगह 297. 50 पैसे में मिलेगा ।जबकि व्यवसायिक सिलेंडर 9.5 सस्ता हुआ है।

यदि बात की जाए डीजल एवं पेट्रोल की तो इनकी कीमतें भी सौ की नोट को पूरी तरह चबा लेने की ओर अग्रसर है? जाहिर है कि लगातार महंगी होते गैस सिलेंडर ने रसोइयों के बजट का कबाड़ा कर दिया है। तो वहीं इसमें सब्सिडी भी काफी कम नाममात्र बची है। इसके अलावा जब भी देश में डीजल और पेट्रोल की कीमतें बढ़ती है तो इसकी आड़ में पूरे देश में महंगाई अपने साम्राज्य को और भी मजबूत कर लेती है।

देश की भाजपा सरकार पेट्रोलियम पदार्थों के बढ़ने के मुद्दे पर इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अथवा तेल उत्पादक देशों के द्वारा बढ़ाए गए दाम का उलाहना देती है। वह कहती है कि उत्पादक देश उपभोक्ता देशों के साथ अन्याय कर रहे हैं ?लेकिन केंद्र अथवा राज्य की सरकारों को यह भी बताना चाहिए कि उन्होंने डीजल व पेट्रोल पर कितना टैक्स लगा रखा है?उनका जनता पर कितना अन्याय है?

देश के कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर विश्व दलहन दिवस पर दावा करते हैं कि दलहन उत्पादन में हमारा अथवा देश का 24% योगदान है। कृषि मंत्री दुनिया को यह बताते हैं कि भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक व उपभोक्ता देश है। वह यह भी दावा करते हैं कि दालों के मामले में भारत आत्मनिर्भर हो चुका है। कृषि मंत्री कहते हैं कि पिछले पांच-छह वर्षों में दाल का उत्पादन 2.4 करोड टन हो गया है। वर्ष 2019 व 20 में भारत ने दो करोड़ 31.5 लाख टन दालों का उत्पादन किया। जो वैश्विक उत्पादन का 23 दशमलव 62% हिस्सा है। लेकिन इतने बड़े-बड़े दावे करने वाले कृषि मंत्री एवं भाजपा की सरकार को शायद इस बात का अंदाजा नहीं है कि देश में अरहर की दाल फिर से महंगी हो चली है।

अरहर की दाल 100 से 120 तक की कीमत में बिक रही है? हरी उड़द की दाल 150 से लगाकर 170 किलो तक बिक रही है! कहीं कहीं इसका रेट 175 से 180 तक है? इसके अलावा अन्य दालों के दामों में भी महंगाई का उछाल आया है। अर्थात देश के नागरिकों की थाली से दाल ने बिदक कर महंगाई का दामन थाम रखा है। सरकार दाल उत्पादक देश की सफलता का दावा करती है लेकिन दूसरी और उसके नागरिकों की दाल ने स्थिति बदहाल कर रखी है

महंगाई के इस बढ़ते दौर में यदि बात की जाए खाद्य तेलों की तो यहां भी आग लगी हुई है ।महंगा तेल महंगाई से खौल रहा है। 105 में बिकने वाले बैल कोल्हू तेल की कीमत आज 150 किलो तक जा पहुंची है। जबकि अन्य कंपनी के सरसों के तेल भी 135 से 140रुपए में आराम से बिक रहे हैं। रिफाइंड तेल की कीमतों में भी भारी इजाफा हुआ है! 90 से लगाकर 100 तक प्रति किलो बिकने वाला यह रिफाइंड अब 130 से 140 में बिक रहा है? आज आश्चर्य तो यह है कि 70 से 60 किलो बिकने वाला डालडा भी अब चमकदार हो चुका है। उसकी भी कीमत अब 120 प्रति किलो जा पहुंची है?चाय की पत्ती की कीमतों में भी प्रति किलो 100 से लगाकर 200 तक उछाल आया है! मात्र 20 में 100 ग्राम चायपत्ती के पैकेट को घर लेकर जाने वाला गरीब और इसके लिए 30 चुका रहा है। जाहिर है कि कई ऐसे मसाले भी हैं जो महंगाई के दौर में है। इसके अतिरिक्त उपभोग की तमाम उसमें चाहे वह निर्माण कार्य से जुड़ी हो अथवा किसी अन्य क्षेत्र की महंगाई की दस्तक हर जगह नजर आती है। जी हां रोडवेज बसों का किराया बढ़ चुका है। रेलवे विभाग ने भी बड़े ही होशियार सिस्टम से टिकटों की बिक्री महंगे आधार पर जारी कर रखी हैं?

सुरसा सी बढ़ती महंगाई ने मोदी व भाजपा के रामराज्य पर प्रश्न चिन्ह लगा दिए हैं। निजी स्कूलों में शिक्षा महंगी हो गई है । आश्चर्य की बात है कि पूर्ववर्ती अन्य दलों व कांग्रेस की सरकार में महंगे सिलेंडर एवं डीजल व पेट्रोल के बढ़े दामों पर सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने वाले भाजपा के बड़े नेताओं को अपनी ही सरकार में यह महंगाई क्यों नजर नहीं आ रही है?

भाजपा के बड़े नेता जो आज मंत्री हैं। जो कांग्रेस शासन अथवा अन्य सरकारों में सिलेंडर लेकर सड़क पर बैठते थे अथवा बैलगाड़ी पर चलके महंगाई का विरोध करते थे! वह आज महंगाई के बढ़ने पर चुप क्यों है? साफ है कि सत्ता में मदांध व्यक्ति आम जनता की करुण पुकार को शायद सुन नहीं पाते? मध्यमवर्गीय एवं गरीबों की रसोई में महंगाई ने कहर बरपा रखा है? 2 जून की रोटी खाने के लिए आम आदमी को जूझना पड़ रहा है। लेकिन सरकार मस्त है? काश हिंदू-मुसलमान व पाकिस्तान का जप करने से कहीं यदि दाल, पेट्रोलियम पदार्थ व खाद्य तेल सस्ते हो जाते तो सच में मजा आ जाता?

अब बात करें देश के विपक्ष की तो वह भी पस्त नजर आ रहा है। विपक्ष भी महंगाई जैसे बड़े मुद्दे पर देश में कोई बड़ा आंदोलन नहीं खड़ा कर पा रहा है। क्योंकि विपक्ष में सत्ता पाने की ललक इतनी ज्यादा बढ़ी हुई है कि वह मोदी सरकार के हर सही अथवा गलत कार्य का बस केवल और केवल विरोध ही करने में जुटा हुआ है? उसका सटीक आंदोलन जो जनता से जुड़ा हुआ है वह हो ही नहीं पा रहा है? विपक्ष को आंदोलन कर रहे किसानों से आशा है! जबकि दूसरी ओर महंगाई लगातार बढ़ रही है। आम वर्ग को चबा रही है। जनता इससे त्रस्त है। परेशान जनता बस यही कहती है मोदी जी आपके रामराज्य में भाइयों व बहनों का बुरा हाल है! महंगाई सुरसा की तरह बढ़ी है ।सच में मोदी जी महंगाई डायन खाए जात है!!! मोदी जी महंगाई डायन चबाय जात है!!

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