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CRPF जवान राकेश्वर सिंह को रिहा करने के पीछे नक्सलियों ने लगाया दिमाग, जानें दो बड़ी वजह

बीते दिन जम्मू के CRPF  जवान राकेश्वर सिंह मन्हास(Rakeshwar Singh Manhas) को नक्सलियों ने अपनी कैद से रिहा कर दिया है. बता दें कि नक्सलियों ने मुठभेड़ के दौरान जवान को अगवा कर लिया था. नक्सलियों से मुक्त होने के बाद जवान के घरवालों में खुशी की लहर दौड़ गयी. उनके परिवार की पहली प्रतिक्रिया सामने आई है. उनकी पत्नी ने कहा कि आज उनके लिए बहुत खुशी का दिन है. मीडिया का इसमें काफी सहयोग मिला है। राकेश्वर सिंह को जंगल के रास्ते वापस लाया जा रहा है. सबसे पहले राकेश्वर सिंह की जांच होगी, जिसके बाद उन्हें घर तक पहुंचाया जाएगा. बीते दिनों कोबरा कमांडो राकेश्वर सिंह मन्हास की सोशल मीडिया पर फोटो जारी की गयी थी. इसमें नक्सलियों ने एक बयान जारी कर यह कहा था कि तीन अप्रैल से लापता कोबरा जवान उनकी गिरफ्त में है.

आज वो नक्सलियों की गिरफ्त से छूट तो गये हैं, लेकिन जिस तरह से नक्सलवादियों उनको रस्सियों से बांध कर लेकर आए. उन्हें बेइज्जत किया गया और पूरे गांव में उनकी परेड भी कराई गई, ये देख के ऐसा लग रहा है कि राकेश्वर सिंह मन्हास को भारत देश में नहीं, बल्कि किसी दूसरे दुश्मन देश में बंधक बना कर रखा गया हो.

नक्सलियों का इवेंट मैनेजमेंट

जवान को रस्सी से बांधकर नक्सलवादी उनको बीजापुर के आदिवासी इलाकों में ले आए, जो नक्सल प्रभावित इलाका माना जाता  है. जब वहां उस जगह पर लोग एकत्र हो गये तो हथियारबंद नक्सलवादी राकेश्वर सिंह मन्हास को वहां लाया गया. सबके सामने ही उनके हाथों की रस्सियों को खोला गया और फिर उन्हें रिहाई दी गयी.

नक्सलियों के इस कृत्य ने दी पूरे देश को चुनौती

इस समय मन्हास सुरक्षित हैं. नक्सलवादियों ने देश को जवान को बंधक बना कर जो काम किया है, उससे पता चलता है कि ये पूरे देश को एक चुनौती है. इन तस्वीरों को दिखा कर हम इस गलत काम के लिए कड़ी कार्रवाई की मांग करते हैं.

क्यों हुए मन्हास की रिहाई के लिए नक्सली तैयार   

नक्सलवादियों को बहुत क्रूर कहा जाता है, ऐसे में नक्सिलयों का जवान को छोड़ देना दिमाग में एक सवाल पैदा कर देता है, कि आखिर क्यों उन्होंने ये कदम उठाया. कहीं इसके पीछे कोई बड़ी वजह तो नहीं. तो हम आपको बतातें है कि इसके पीछे की बड़ी वजह क्या है. मूल रूप से इसके पीछे दो मुख्य वजहें हैं.

पहले सबसे बड़ी वजहये है कि  सरकार का नक्सियों को डर. 22 जवानों की शहीद होने के बाद पूरे देश में आक्रोश फैला हुआ है, इन सब बातों के बारे में नक्सलियों को पता चल गया था कि केंद्रीय रिजर्व सुरक्षा बल के 22 जवानों की जान लेने के बाद मोदी सरकार उनको ऐसे ही नहीं जाने देगी. हर जवान के शहीद होने का हिसाब मोदी सरकार नक्सलियों से लेकर रहेगी. इसी के कारण नक्सलियों ने योजना का निर्माण किया और हर दिन एक संदेश पहुंचाया जिसमें बताते रहें कि मन्हास सुरक्षित हैं. उन्होनें पहले चिट्ठी दी , उसके बाद राकेश्वर सिंह मन्हास की एक फोटो जारी हुई. जिसमें बताया गया कि नक्सलियों द्वारा राकेश्वर सिंह मन्हास  का इलाज हो रहा हैं. फिर मध्यस्थता को सामने लाया गया और फिर स्थानीय पत्रकारों के जरिए संपर्क स्थापित किया गया. फिर एक इवेंट करके राकेश्वर सिंह मन्हास को रिहा कर दिया गया.

दूसरी वजह

राकेश्वर सिंह मन्हास को छोड़ने के पीछे की दूसरी बड़ी वजह ये थी कि नक्सलवादियों को इस बात का अच्छे से पता था कि अगर ज्यादा दिन तक सीआरपीएफ जवान राकेश्वर सिंह मन्हास को बंधक बना कर अपने पास रखा तो सरकार उनके खिलाफ जरूर कोई ना कोई बड़ी कार्रवाई कर देगी. ऐसा होने से वो स्थानीय लोगों के साथ साथ अपने कैडर के भरोसे को भी खो देंगे.

परिवार ने सरकार को शुक्रिया

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राकेश्वर सिंह मन्हास की रिहाई की खबर सुनते ही पूरे घर में खुशी की लहर दौड़ गयी. अब पूरे परिवार ने चैन की सांस ली है. जवान की पत्नी और चार साल की बेटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मदद के धन्यवाद दिया है.

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