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BJP अध्यक्ष ने प्रियंका की यात्रा का ऐसे दिया जवाब, शून्य पर लाने की प्रतिज्ञा कर चुकी है जनता

विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक दलों में वादे और बयानबाजी की झड़ी लग चुकी है। उत्तर प्रदेश की सत्ता में वापसी के लिए कांग्रेस की राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी बाराबंकी पहुंचकर पार्टी की प्रतिज्ञा यात्रा को हरी झंडी दिखाई। कांग्रेस के की यात्रा पर बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष ने करारा प्रहार किया है। उन्होंने प्रतिज्ञा यात्रा को ढोंग करार दिया है। प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि कांग्रेस चाहे जिस प्रतिज्ञा का ढोंग करे, जनता उसके कुकर्मों के चलते चार दशक पहले ही उसे सत्ता से बाहर रखने का संकल्प ले चुकी है। यही वजह है कि 2017 में समाजवादी पार्टी के साथ लड़ने के बाद भी जनता ने कांग्रेस को इकाई पर ला दिया था और जन सरोकारों से शून्य कांग्रेस को जनता इस बार शून्य पर लाने की प्रतिज्ञा कर चुकी है।

प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह ने कहा कि जनता जानती है कि झूठ, वादाखिलाफी, भ्रष्टाचार और परिवारवाद कांग्रेस के डीएनए का हिस्सा बन चुका है। लोग अब झूठे वादों से उब चुके हैं। गरीबी हटाने का वादा करने वाली कांग्रेस ने करीब पांच दशक तक राज किया लेकिन आवास, शौचालय, सड़क, रसोई गैस, बिजली कनेक्शन जैसी बुनियादी सुविधाएं तक नहीं दे सकी। उन्होंने कहा कि गरीबी को नहीं हटा सके। इस अवधि में भ्रष्टाचार और लूट के नए रिकॉर्ड जरूर कायम किया है। प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि इससे अधिक हास्यास्पद क्या हो सकता है कि जिस पार्टी की मुखिया की कुर्सी मां-बेटा, बेटी के लिए आजीवन आरक्षित हो वह महिलाओं के लिए आरक्षण का झूठ और भ्रम फैला रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने महिलाओं के लिए क्या किया है सब जानते हैं।

महिला आरक्षण को लेकर कही ये बात

स्वतंत्र देव ने कहा कि जिनके पिता ने प्रधानमंत्री रहते हुए तुष्टिकरण की राजनीति के चलते देश की करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के हित में लिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले को पलट डाला, जिनकी पार्टी के शासित राजस्थान, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में महिलाओं के खिलाफ अपराध के नए रिकॉर्ड बन रहे हैं, उनके सुरक्षा व संरक्षा के वादों पर जनता कैसे विश्वास करेगी। उन्होंने कहा कि महिलाओं से प्रियंका झूठे वादे कर रही हैं। आज संसद से लेकर विधानसभा तक सबसे अधिक महिला विधायक बीजेपी की हैं। यूपी में पंचायत चुनाव में 33ः आरक्षण है लेकिन करीब 50 फीसदी महिलाएं पंचायत में चुनी गई हैं।

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