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AAP की ‘भंग’ राजनीति, 3 महीने में खत्म कर दी 5 राज्यों की इकाइयां

चुनावी दौर से गुजरने जा रहे गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) ने बड़ा कदम उठाया है। बुधवार को पार्टी ने प्रदेश इकाई और सभी मोर्चों को भंग कर दिया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है, जब आप ने चुनाव से पहले इकाई भंग करने का फैसला लिया है। अप्रैल में हिमाचल प्रदेश में भी पार्टी ने इसी तरह का ऐक्शन लिया था। दोनों राज्यों में इस साल के अंत तक चुनाव हो सकते हैं।

खबर है कि पार्टी जल्दी गुजरात की नई इकाई का ऐलान कर सकती है। खास बात है कि सोमवार को ही गुजरात दौरे पर गए पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मेहसाणा में बड़ा रोड शो किया था। उस दौरान उन्होंने भारतीय जनता पार्टी को सत्ता से बाहर करने का वादा किया था। साथ ही गुजरात भाजपा के अध्यक्ष सीआर पाटिल पर डमी सरकार चलाने के आरोप लगाए थे।

हिमाचल प्रदेश के प्रभारी सत्येंद्र जैन ने आप की हिमाचल प्रदेश इकाई भंग करने की घोषणा की थी। खास बात है कि उस दौरान पार्टी नेताओं के बड़े स्तर पर दल बदलने का सामना कर रही थी। इस घोषणा से तीन दिन पहले ही आप के प्रदेश प्रमुख रहे अनूप केसरी और संगठन महासचि सतीश ठाकुर और ऊना जिला अध्यक्ष इकबाल सिंह भाजपा में शामिल हो गए थे। पार्टी ने मंगलवार को सुरजीत ठाकुर को नया प्रदेश अध्यक्ष घोषित किया। साथ ही राकेश मंडोतरा को प्रदेश सचिव बनाया गया।

उत्तराखंड विधानसभा चुनाव के परिणामों की घोषणा के करीब डेढ़ महीने बाद ही पार्टी उत्तराखंड में भी अपनी सभी इकाइयों को भंग कर दिया था। उस दौरान प्रदेश प्रभारी दिनेश मोहानिया ने कहा था, ‘अब हम उत्तराखंड में दोबारा संगठन बनाने पर ध्यान लगाएंगे।’ उत्तराखंड में सभी 70 सीटों पर उतरने वाली आप का खाता भी नहीं खुल सका था। इतना ही नहीं 33 उम्मीदवार ऐसे थे, जो 1 हजार वोट भी हासिल नहीं कर सके थे।

चुनावी मोड मे चल रही आप ने मार्च में संगठन दोबारा तैयार करने की बात कहकर राजस्थान में सभी इकाइयों को भंग कर दिया था। उस दौरान नए पार्टी के राजस्थान के नए चुनाव प्रभारी रहे विनय मिश्रा ने प्रदेश कार्यकारिणी समेत सभी इकाइयों के भंग का ऐलान किया था। उन्होंने राज्य में सदस्यता अभियान शुरू करने की बात कही थी। साथ ही कहा था, ‘हम लोगों को गांव-गांव, घर-घर जाकर नए लोगों को जोड़ेंगे और राज्य में मजबूत संगठन बनाएंगे।’

आप ने मई में गोवा कार्यसमिति को भंग कर दिया था। पार्टी का कहना था कि विस्तार के चलते यह फैसला लिया गया है। खास बात है कि गोवा विधानसभा चुनाव में दो सीटों पर जीत के साथ ही तटीय राज्य में आप का पदार्पण हो गया था। चुनाव नतीजे घोषित होने के कुछ दिन बाद ही प्रदेश संयोजक राहुल म्हाम्ब्रे ने ‘निजी कारणों’ का हवाला देकर पार्टी छोड़ दी थी। खास बात है कि इस्तीफे के दिन ही आप ने उन्हें राष्ट्रीय प्रवक्ता घोषित किया था। 2017 चुनाव में पार्टी का खाता भी नहीं खुल सका था।

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