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18 हजार साल पुराने शंख की तस्वीर आई सामने, उस समय के संगीत पर किया जा रहा है शोध

तकरीबन 90 वर्षों से लोग इस शंख के बारे में भूल चुके थे. 18 हजार साल पुराना एक शंख फ्रांस के नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में रखा गया था. इतने साल के बाद वैज्ञानिकों ने ये जाना कि ये कोई आम शंख नहीं बल्कि एक ऐसा वाद्य यंत्र है, जिसे बजाया भी जा सकता है. आपको बता दें कि, साल 1930 में इस शंख को पाइरेनीस पर्वत की तलहटी की मार्सौलस गुफा में पाया गया था. जिसके बाद इसे वहां से लाकर नेचुरल हिस्ट्री म्यूजियम में रख दिया गया.

काफी समय से रखे हुए इस शंख पर एक वैज्ञानिक की नजर पड़ी तो उन्होंने इसे बजाकर देखा. शंख से जो आवाज निकली उसके जरिए अब वैज्ञानिक ये पता लगाने की कोशिश करने वाले हैं कि 18 हजार साल पहले संगीत की सभ्यता कैसी थी. अगर आप इसे देखेंगे तो ऐसा लगेगा कि ये एक मानव की खोपड़ी है. क्यूंकि इस शंख का आकार आम शंखों से बिल्कुल अलग है. वैज्ञानिक ऐसा बता रहे हैं कि इस शंख का प्रयोग प्राचीन काल में धार्मिक गतिविधियों और खुशी के मौकों पर किया जाता रहा होगा.

वैज्ञानिकों का कहना है कि साल 1931 में जब इसे पहली बार देखा गया था तो इसकी केवल एक लव कप के रूप में व्याख्या की गई थी, जिसे खुशी के मौकों पर वाद्य यंत्र के तौर पर इस्तेमाल किया जाता था. उस समय लोग लविंग कप का प्रयोग किया करते थे. इस कप में लोग पेय डालकर पीते थे. इस शंख पर पर अलग तरह की आकृति बनी हुई है, जो इसे और शंखों से बेहद अलग करता है.

वैज्ञानिकों का ये अंदाजा है कि ये अब तक का सबसे पुराना वाद्य यंत्र भी हो सकता है. काफी वर्षों तक इस शंख को संभाल कर रखा गया लेकिन जब इसे बजाया गया तो इससे बहुत ही अच्छी ध्वनि निकली. इसकी आवाज की एक रिकॉर्डिंग भी की गई है. इसके शेल की टिप टूटी हुई है, जिसके बारे में ये कहा जा रहा है कि ये गलती से नहीं टूटा है.

वैज्ञानिक ऐसा मानते हैं कि इसका मुंह एक तरह का नहीं है और इस पर एक ऑर्गैनिक कोटिंग भी है, जिससे ये अंदाजा लगाया जा सकता है कि इसके आगे एक माउथ पीस भी लगा होगा. कार्बन डेटिंग के आधार पर ये माना जा रहा है कि ये शंख करीब 18 हजार साल पुराना है.

कुछ ऐसी भी चीजें मिली हैं, जिनसे ये अंदाजा लगाया जा रहा है कि इन्हें इस्तेमाल करने वाले घुमंतु शिकारी रहे होंगे, जो अटलांटिक के तट और पाइरेनीस के बीच रहते होंगे. वैज्ञानिक अब ये देखना चाहते हैं कि इस शंख की आवाज कितनी दूर जा सकती है और इसके 3डी रेप्लिका के आधार पर इसके असली आकार को ढूंढने की भी कोशिश की जाएगी.

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