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पंजशीर के शेरों से डरा तालिबान, बातचीत के लिए भेजा प्रतिनिधिमंडल

अहमद मसूद और अमरुल्ला सालेह को पंजशीर का शेर ऐसे ही नहीं कहा जाता। तालिबान के लड़ाके अच्छी तरह से जानते हैं कि अगर उन्होंने पंजशीर पर कब्जा करने की कोशिश भी की तो उनको मौत से कोई नहीं बचा सकता। अब तालिबान बातचीत के जरिए मामले को सुलझाने में लगी हुई है।

तालिबान सांस्कृतिक आयोग के सदस्य ने इस बात की पुष्टि की है कि उनका एक प्रतिनिधिमंडल अहमद मसूद और कई अन्य राजनीतिक हस्तियों के साथ बातचीत करने के लिए पंजशीर गया है। उन्होंने दोनों पक्षों के बीच वार्ता की गंभीरता पर जोर दिया और कहा कि पंजशीर मुद्दे को शांति से सुलझाया जाएगा।

तालिबान सांस्कृतिक आयोग के एक सदस्य मुफ्ती अनामुल्ला समांगानी ने कहा, “वे खुद अहमद मसूद और कई अन्य लोगों से मिलने जा रहे हैं, जो पंजशीर मामले में शामिल हैं और बहुत गहन प्रयास किए जा रहे हैं।”

तालिबान और पंजशीर बलों ने भी एक दूसरे के खिलाफ सैन्य विकल्पों का उपयोग करने के बारे में बात करते ही दोनों पक्षों के बीच बातचीत शुरू हो गई।

अशरफ गनी के डिप्टी अमरुल्ला सालेह ने ट्वीट किया कि तालिबान भोजन को गांव में प्रवेश नहीं करने दे रहा है। उन्होंने अंदराब में मानवीय स्थिति को भयानक बताया, लेकिन तालिबान ने सालेह के दावे का खंडन करते हुए कहा कि अंदराब के लिए सभी रास्ते खुले हैं।

हालांकि, पाकिस्तानी विदेश मंत्री ने तालिबान और राजनीतिक नेताओं के बीच राजनीतिक समझौते का आह्वान किया है, लेकिन रूस ने कहा है कि वह तालिबान और उनके विरोधियों के बीच गतिरोध में तटस्थ रहेगा।