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सावधान! मोबाइल फोन की स्क्रीन पर 10-15 दिन नहीं बल्कि इतने दिनों तक जिंदा रह सकता है कोरोना वायरस

दुनिया के 200 से ज्यादा देश कोरोना वायरस (Coronavirus) की चपेट में हैं. दुनियाभर में कोरोना के कहर से 10 लाख 76 हजार से ज्यादा लोंगों की अब तक मौत हो चुकी है और 3 करोड़ 74 लाख से ज्यादा लोग COVID-19 संक्रमण के शिकार हुए हैं. कोरोना वायरस की प्रमाणिक वैक्सीन (Coronavirus Vaccine) के लिए अभी भी दुनियाभर में शोध जारी है. हालांकि रूस ने कोरोना की वैक्सीन (Covid Vaccine) बनाने का दावा किया है. उधर, कोरोना से जुड़ा कोई न कोई रिसर्च हर दिन सामने आते रहते हैं. हालांकि ताजा स्टडी चिंता बढ़ाने वाली है.

न्यूज एजेंसी AFP की रिपोर्ट के अनुसार, ‘ऑस्ट्रेलिया की राष्ट्रीय साइंस एजेंसी की एक रिसर्च में दावा किया गया है कि कोरोना वायरस बैंक नोट और मोबाइल फोन जैसे उत्पादों पर ठंडे और डार्क परिस्थितियों में 28 दिन तक जीवित रह सकता है. एजेंसी ने कहा कि सीएसआईआरओ के डिसीज प्रीपेडनेस सेंटर के शोधकर्ताओं ने इस बात का परीक्षण किया कि अंधेरे में तीन डिग्री सेल्सियस तापमान पर SARS-CoV-2 कितने समय तक जीवित रह सकता है? इस शोध में पता चला है कि गर्म परिस्थितियों में वायरस की जीवित रहने की दर कम हो जाती है.

वैज्ञानिकों ने पाया कि 20 डिग्री सेल्सियस तापमान पर SARS-CoV-2 वायरस कांच (मोबाइल फोन की स्क्रीन), स्टील और प्लास्टिक के बैंक नोट पर ‘तेजी से फैलता’ है और 28 दिनों तक जीवित रह सकता है. 30 डिग्री तापमान पर वायरस के जीवित रहने की संभावना घटकर 7 दिन पर आ गई, जबकि 40 डिग्री पर वायरस सिर्फ 24 घंटे तक ही जीवित रह सकता है. रिसर्च के अनुसार, वायरस कम तापमान पर खुरदरी सतह में काम देर तक जीवित रह पाता है. उधर, हाल ही में एक स्टडी में ये बात कही गई कि करोनो उन लोगों को जल्दी होता है जो सिंगल हैं. इतना ही नहीं इसमें मौत का खतरा शादीशुदा लोगों के मुकाबले सिंगल लोगों को ज्यादा होता है. ये स्टडी स्वीडन की यूनिवर्सिटी ऑफ स्टॉकहोम ने की है और इसे लेकर उनकी तरफ से चेतावनी भी जारी की गई है.

स्टॉकहोम यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं ने अपनी स्टडी में इस बात का दावा किया है कि जो लोग कुंवारे हैं और इसके साथ ही लो इनकम, कम पढ़े-लिखे और कम आय वाले देश में कोरोना का खतरा बहुत हो गया है. बता दें कि ये स्टडी ‘स्वीडिश नेशनल बोर्ड ऑफ हेल्थ एंड वेलफेयर’ द्वारा स्वीडन में कोविड-19 से हुई रजिस्टर्ड मौतों के डेटा पर आधारित है.

इस स्टडी में 20 साल की उम्र में या उससे अधिक उम्र के लोगों को शामिल किया है, इसके साथ ही इसमें कोरोना से हुई मौतों के साथ कई बड़ी बातों औऱ फैक्टो को साथ रखकर देखा गया है. इससे ये परिणाम निकला है कि जो लोग कुंवारे हैं फिर चाहे वो महिला हो या फिर पुरुष इनमें मौत का खतरा उन लोगों के मुकाबले कहीं ज्यादा है जो शादीशुदा है. इस लिस्ट में अनमैरिड, विधवा/विधुर और तलाकशुदा लोग भी शामिल हैं.

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