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रूस से आजादी के बाद कैसा है खेरसॉन का गांव, महिला ने बताया अंदर का हाल

यूक्रेनी सैनिकों ने रूस के कब्जे से अपनी जमीन को छुड़ाना शुरू कर दिया है। खेरसॉन में रूसी सैनिकों को बेदखल कर दिया गया है। इसके साथ ही वहां रहने वाले लोगों को भी राहत मिलने लगी है। खेरसॉन के करीब स्थित स्वितलाना गलक की बातों से इस बात का अंदाजा लगाया जा सकता है। स्वितलाना ने कहा कि जब यूक्रेनी सिपाही गांव में पहुंचे तो मेरी आंखों से आंसू थे। 43 वर्षीय यूक्रेनी महिला ने कहा कि मुझे नहीं पता कि रूसी सिपाही कब यहां आए। बस मैं एक चीज जानती हूं कि दो दिन पहले यूक्रेन के सिपाही यहां पहुंचे और उसके बाद मैंने राहत की सांस ली।

फरवरी में रूस ने किया था कब्जा
स्वितलाना का गांव प्रैवडिन खेरसॉन से करीब 50 किमी दूर है। इस साल फरवरी में यूक्रेन पर हमले के बाद रूसी सेना ने यहां कब्जा कर लिया था। शुक्रवार को रूस ने यहां से अपने 30 हजार सैनिकों को हटा लिया। इसके साथ ही यूक्रेन के राष्ट्रपति ने ऐलान कर दिया कि खेरसॉन अब हमारा है। इसके बाद से स्थानीय लोगों में जश्न है। गलक, प्रैवडिन गांव में रहने वाले 180 लोगों में से एक हैं। इस युद्ध ने उनकी जिंदगी पर बहुत ज्यादा असर डाला है। उनकी बेटी धमाकों में मारी जा चुकी है। गलक कहती हैं कि मेरी बेटी मारी जा चुकी थी। मुझे यहां पर रूसी सैनिकों का रहना बिल्कुल भी अच्छा नहीं लग रहा था।

लोगों को परेशान करते थे सैनिक
खेतों के बीच बने इस गांव में इस युद्ध से पहले करीब 1000 लोग हुआ करते थे। युद्ध के बाद इस गांव का नजारा बिल्कुल बदला हुआ है। गांव के कई घरों की छत बम धमाकों से उड़ चुकी है और कई घर तबाह हो गए हैं। हर तरफ युद्ध के अवशेष बिखरे दिखाई दे रहे हैं। गलक के पति विक्टर बताते हैं कि रूसी सैनिक यहां पर लोगों के साथ बहुत गलत व्यवहार करते थे। उन्होंने बताया कि एक बार वह गांव के दूसरे छोर पर रहने वाली अपनी मां से मिलने जा रहे थे। रास्ते में कुछ रूसी सैनिकों ने विक्टर को रोक लिया। इसके बाद उन्हें घुटनों पर बैठने के लिए कहा गया और एक सिपाही ने कहा कि वह मुझ पर ग्रेनेड लगाने जा रहे हैं।

यहां खुश नहीं थे रूसी सैनिक
विक्टर ने कहा कि जब हमने यूक्रेनी सैनिकों को आते देखा तो बेहद खुश हुए। उन्होंने बताया कि रूसी सैनिकों के यहां रहते हुए काम-काज भी भी नहीं हो पा रहा था। ऐसे में लोगों ने रूसी सैनिकों द्वारा दी गई मिठाइयों, कैन्स और खाने ले लिए। आखिर लोग भूख से मरने के लिए तैयार नहीं थे। विक्टर ने बताया कि वैसे तो रूस के सैनिक यहां थे, लेकिन वह बहुत खुश नहीं थे। वह लोग अपने परिवार के पास जाना चाहते थे और उन्हें याद कर रहे थे।

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