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जवानों से हुई मुठभेड़ में मारा गया मसूद अजहर का करीबी IED एक्सपर्ट रहमान

जम्मू-कश्मीर में पिछले काफी दिनों से रूक-रूक कर आतंकियों से भारतीय जवानों की मुठभेड़ जारी है. पिछले 4 दिनों से तो लगातार सुरक्षाबल आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन जारी कर उन्हें मौत की नींद सुलाने में लगे हैं. लेकिन पूरे चीर दिन के बाद जाकर पुलवाना एनकाउंटर ऑपरेशन खत्म हुआ है. आज यानी बुद्धवार को तीन आंतकी भारतीय जवानों के हाथ मारे गए हैं. जिनमें से एक आतंकी जैश-ए-मोहम्मद का बम एक्सपर्ट फौजी भाई इलियास अब्दुल रहमान (Fauji Bhai Alias Abdul Rehman) भी शामिल है. दिलचस्प बात तो ये है कि अब्दुल रहमान उर्फ फौजी भाई जैश सरगना मसूद अजहर का करीबी रिश्तेदार था. बताया जा रहा है कि ये आतंकी वर्ष 2017 से ही दक्षिण कश्मीर में एक्टिव था. फिलहाल इस एनकाउंटर के बाद से ही पुलवामा में सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए इंटरनेट सेवा को बंद कर दिया गया है.

 

इस बारे में बात करते हुए जम्मू-कश्मीर पुलिस के आईजी विजय कुमार ने बताया कि, जवानों को इस बात की खबर मिली थी कि आतंकी कंगन गांव में छिपे हैं. इसी गुप्त सूचना के आधार पर एनकाउंटर शुरू किया गया था. हालांकि जवानों की ओर से आतंकियों के सामने ये पेशकश जरूर रखी गई थी कि वो अपने हथियार सेना के आगे डाल दें. Pulwama encounterलेकिन उन्होंने इस ऐलान के बाद फायरिंग शुरू कर दी. ऐसे में जवानों को जवाबी कार्रवाई करनी पड़ी. जिसमें 3 आतंकी मारे गए हैं. इनमें से सिर्फ 1 आतंकी की पहचान हो पाई है, बाकी दो की पहचान अभी की जा रही है.

दरअसल जानकारी मिली है कि पुलवामा में एक बार फिर से दिल दहला देने वाले अटैक में आतंकी फौजी भाई इलियास अब्दुल रहमान का नाम शामिल था. जिसकी लंबाई करीब साढ़े 6 फीट बताई जा रही है, यही वजह है कि उसे लंबू के नाम से भी पुकारा जाता था. इसके साथ ही उसे मोहम्मद इस्माइल अल्वी (Mohammad Ismail Alvi) के नाम से भी जाना जाता था. अदनान और जब्बार भी उसी के नाम थे. बताया जा रहा है कि आतंकी अल्वी को कश्मीर घाटी में जैश का कमांडर बनाया गया था. दरअसल जब करी मुफ्ती यासिर एनकाउंटर में मार गिराया गया था, तब अल्वी को जनवरी महीने में घाटी में जैश कमांडर पद को संभालने की जिम्मेदारी दी गई थी. गौरतलब है कि कुछ दिन पहले ही पुलवामा के राजपोरा इलाके में कार में 45 किलो इंप्रोवाइस्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस (IED) प्लांट करने की खबर सामने आई थी. इसमें फौजी भाई का हाथ बड़ा हाथ था. हालांकि भारतीय सुरक्षाबलों ने आंतकियों के मंसूबों को कामयाब होने से पहले ही नाकाम कर दिया था.

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