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खास अपील: जजों और मुख्यमंत्रियों से बोले PM मोदी- अंडर ट्रायल कैदी…

दिल्ली के विज्ञान भवन में देशभर के हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों और मुख्यमंत्रियों का सम्मेलन हुआ. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस एनवी रमना भी शामिल हुए. पीएम मोदी ने इस दौरान जजों से न्यायिक प्रक्रिया में डिजिटलीकरण को बढ़ावा देने की अपील की. इस दौरान पीएम ने जेल में बंद अंडर ट्रायल कैदियों के लिए हाईकोर्ट के जजों और राज्य सरकारों से खास अपील की. पीएम मोदी ने कहा कि आज 3.50 लाख ऐसे कैदी हैं जो अंडर ट्रायल हैं और जेल में हैं. इनमें से अधिकांश लोग गरीबी या सामान्य परिवारों से हैं. हर जिले में डिस्ट्रिक्ट जज की अध्यक्षता में एक कमेटी होती है, ताकि इन केसों की समीक्षा हो सके. मोदी ने कहा कि जहां संभव हो, बेल पर उन्हें रिहा किया जा सके. मैं सभी मुख्यमंत्रियों और हाईकोर्ट के जजों से अपील करना चाहूंगा कि मानवीय संवेदनाओं और कानून के आधार पर इन मामलों को भी संभव हो तो प्राथमिकता दी जाए. मोदी ने कहा कि इसी तरह न्यायालयों और खासकर स्थानीय स्तर पर लंबित मामलों के समाधान के लिए मध्यस्थता भी एक महत्वपूर्ण जरिया है.


पीएम ने कहा कि हमारे समाज में तो मध्यस्थता के जरिए विवादों के समाधान निकालने की हजारों साल पुरानी परंपरा रही है. आपसी सहमति और परस्पर भागीदारी न्याय की अपनी अलग मानवीय अवधारणा है. अगर हम देखें तो हमारे समाज का वो स्वभाव कहीं ना कहीं अभी भी बना हुआ है. हमने हमारी उन परंपराओं को खोया नहीं है. हमें इस लोकतांत्रिक व्यवस्थाओं को मजबूत बनाने की जरूरत है. मामलों का कम समय में समाधान भी होता है. न्यायालयों का बोझ भी कम होता है और सामाजिक ताना बाना भी सुरक्षित रहता है. उन्होंने कहा कि हमें मानवीय संवदेनाओं को केंद्र में रखना होगा.

मोदी ने कहा कि हम मीडिएशन से सॉल्यूशन की विद्या में ग्लोबल लीडर बन सकते हैं. हम पूरी दुनिया के सामने एक नजीर पेश कर सकते हैं. मुझे पूरा भरोसा है कि प्राचीन मानवीय मूल्यों और आधुनिक एप्रोच के साथ ऐसे सभी विषयों पर आप सभी लोगा विस्तार से चर्चा करेंगे. पीएम ने कानून की पेंचीदगियों पर भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि समीक्षा में पाया था कि 1800 कानून अप्रासंगिक हो चुके हैं. इनमें 1450 कानूनों को खत्म कर दिया. लेकिन राज्यों की तरफ से सिर्फ 75 कानून खत्म किए गए हैं. आज सभी मुख्यमंत्रियों से अपील करना चाहता हूं कि नागरिकों के लिए अधिकारों के लिए ये कानून का जाल बना हुआ है, उन कानूनों को निरस्त करने के लिए कदम उठाईए. लोग आशीर्वाद देंगे. न्याय सुधार के लिए हरसंभव प्रयास हो रहे हैं.


मोदी ने कहा कि किसी भी देश में स्वराज का आधार न्याय होता है. न्याय जनता से जुड़ा होना चाहिए. जनता की भाषा में होना चाहिए. जब तक न्याय के आधार को समान्य मानवीय नहीं समझता, तब तक उसके लिए न्याय और राजकीय आदेश में बहुत फर्क नहीं होता है. मैं दिनों सरकार में एक विषय पर दिमाग खपा रहा हूं. एक बड़ी आबादी को न्यायिक प्रक्रिया से लेकर फैसलों तक को समझना मुश्किल होता है. हमें इस व्यवस्था को सरल और आम जनता के लिए बनाने की जरूरत है. हमें स्थानीय भाषा को महत्व देने की जरूरत है. इससे सामान्य नागरिकों में न्याय प्रणाली में भरोसा बढ़ेगा और वे इससे जुड़ा हुआ महसूस करेंगे.


अभी हम विचार कर रहे हैं कि टेक्निकल और मेडिकल एजुकेशन मातृ भाषा में क्यों नहीं होना चाहिए. कई राज्यों ने फैसले लिए हैं. गांव और गरीब का बचचा के लिए सारे रास्ते खुल जाएंगे. ये सामाजिक न्याय है. सामाजिक न्याय के लिए भाषा भी कारण बन सकती है.

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