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कोरोना प्रबंधन की विफलता पर खड़गे ने पूछे तीखे सवाल, इन समस्याओं को सुलझाने में फेल रहे पीएम

राज्यसभा में कोरोना पर चर्चा के दौरान मंगलवार को विपक्ष ने प्रधानमंत्री मोदी पर कराया प्रहार किया है। विपक्ष के नेता और कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि सरकार कोरोना महामारी के प्रबंधन में पूरी तरह विफल रही है। प्रधानमंत्री समस्याएं सुलझाने में फेल रहे और स्वास्थ्य मंत्री को उन्होंने बलि का बकरा बना दिया। उनका इशारा पूर्व स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की तरफ था। ज्ञात हो कि डाॅ. हर्षवर्धन ने इस्तीफा दे दिया है। विपक्षी दलों के नेताओं ने राज्यसभा में आरोप लगाया कि केंद्र ने कोरोना संबंधी आंकड़े छिपाये। सत्ता पक्ष ने शोर के दौरान जवाब में कहा कि देश की अर्थव्यवस्था की पुख्ता नींव और कई पहलों की वजह से इस महामारी के दौर में देश मजबूती से खड़ा रहा।

कांग्रेस के वरिष्ठ सदस्य मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि कोविड-19 के नतीजे इतने भयावह होंगे, इसका अनुमान नहीं था। देश इस महामारी की दूसरी लहर से गुजरा। उन्होंने कहा कि बताया जा रहा है कि हम तीसरी लहर के मुहाने पर खड़े हैं। इस महामारी से मिले घाव कभी नहीं भरेंगे। उन्होंने कहा कि नोटबंदी की तरह ही लॉकडाउन की घोषणा भी रात को की गई। इस घोषणा के बाद प्रवासी कामगार किस हद तक परेशान हुए, यह सबने देखा है। उन्होंने सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि लॉकडाउन की घोषणा न केवल आठ से पंद्रह दिन पहले की जानी चाहिए थी बल्कि प्रवासी कामगारों को उनके गंतव्य तक पहंचाने के लिए व्यवस्था भी की जानी चाहिए थी। सरकार अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकामयाब रही।

अपने बनाए नियमों को खुद सरकार ने तोड़ा
उन्होंने कहा कि अपने ही बनाए नियमों को तोड़ने का पूरा श्रेय इसी सरकार को जाता है। सरकार के लोगों ने ही कोरोना से बचाव के लिए मास्क पहनने और उचित दूरी का पालन नहीं किया। पश्चिम बंगाल और दूसरे चुनावी राज्यों में कोरोना के वाहक बन गये।

पीएम अपने ऊपर दोष नहीं लेते, बलि का बकरा बनाते हैं
मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री ने अपील की और लोगों ने थाली बजाई, दीया जलाया, खुद को घरों में कैद रखा लेकिन आपने उनका भरोसा तोड़ा। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य मंत्री को आपने बलि का बकरा बनाया। प्रधानमंत्री जी अपने ऊपर कोई दोष नहीं लेते। बलि का बकरा बनाते हैं। कोरोना के कुप्रबंधन से ना सिर्फ लोगों की नौकरियां गईं बल्कि अर्थव्यवस्था तबाह हो गयी। उन्होंने कहा कि आप दावा कर रहे हैं कि इस साल दिसम्बर तक पूरे देश का टीकाकरण पूरा कर लिया जाएगा लेकिन अभी तक सिर्फ पांच प्रतिशत लोगों को ही टीकों की दोनों खुराक लगी है।

उन्होंने कहा कि कई बार उच्चतम न्यायालय के कहने के बाद सरकार को कदम उठाने पड़े। कोरोना सिर्फ देश की ही समस्या नहीं है। इससे पूरा विश्व प्रभावित है। हम इस मामले में सरकार को सहयोग करने की पूरी कोशिश करेंगे। उन्होंने कहा कि प्रवासी कामगार, नौकरी-रोजगार जाना, अस्पतालों में बेड-ऑक्सीजन न मिलना, लॉकडाउन और अर्थव्यवस्था का तबाह होना यह दुखद रहा। सरकार ने इस पर चिंता नहीं जताई। सरकार को विज्ञापन दिखाने में, लुभावनी बातें करने और उन्हें बार-बार दोहराने में व्यस्त रही। उन्होंने सरकार पर झूठे आंकड़े जारी करने का आरोप लगाया। सरकार दावा करती है कि कोविड-19 महामारी से करीब चार लाख लोगों की जान गई। देश में 6,38,565 गांव हैं। अगर एक एक गांव में इस महामारी ने पांच-पांच लोगों की भी जान ली है तो कोविड से मौत का आंकड़ा 31,91,825 होता है।

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